कसौटी पर खरी नहीं उतर रही लखनऊ विश्वविद्यालय की तीसरी आंख

जिम्मेदार काट रहे कन्नी, छात्राओं की सुरक्षा संदेह के घेरे में

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ । लखनऊ विश्वविद्यालय में आए दिन हंगामे और छात्राओं के साथ छेडख़ानी के मामले बढ़ते जा रहे हैं। इन पर लगाम लगाने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। विवि के न्यू-कैंपस से लेकर ओल्ड कैंपस तक में दजर्नों कैमरे लगावाए गए हैं। लेकिन अब तक एक सीसीटीवी के फुटेज से एक भी उपद्रवी पकड़ा नहीं जा सका है।
विश्वविद्यालय में छात्राओं के साथ छेडख़ानी मामलों में पहचान न होने पर शोहदे बच निकलते हैं। यह हालात तब भी थे जब विवि परिसर में सीसीटीवी कैमरे नहीं थे। सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद उपद्रवियों की पहचान नहीं की जा पा रही है। कैमरे नहीं होने पर अधिकारियों का बयान रहता था कि पहचान नहीं हो पायी है, लेकिन सीसीटीवी के बाद भी मामले जस के तस बने हुए हैं। ऐसे में दोषी विवि प्रशासन के पकड़ से बाहर होते जा रहे हैं। विवि प्रशासन ने सीसीटीवी कैंमरे लगवाते समय यह दावे किए थे कि अब कोई भी इस तरह के मामलों में बच नहीं सकेगा। पर इन दावों की पूरी तरह से हवा निकलती दिख रही है। उपद्रवी घटना को अंजाम देकर विवि प्रशासन को अंगूठा दिखा जाते हैं।
पिछले साल लगे थे कैमरे
बीते ओल्ड कैंपस में 50 और न्यू-कैंपस में 24 सीसीटीवी कैंमरे लगवाने की अनुमति विवि प्रशासन से दी गई थी। ओल्ड कैंपस में गेट नंबर एक से लेकर अन्य गेट पर एक-एक कैमरे व हॉस्टल के मुख्य द्वार से लेकर अंदर तक कैमरे लगवाए गए। इन कैमरों को लगवाने की शुरुआत पिछले साल से की गई थी। वहीं न्यू कैंपस में गर्ल्स हॉस्टल में चार अंदर और चार बाहर कैमरे लगाए गए हैं। सीसीटीवी कैमरे लगवाने की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो पाई है।
कैमरों के लिए 20 लाख का बजट
कई बैठकों के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने सीसीटीवी कैमरे के लिए 20 लाख का बजट पास किया। बजट पास होने के साथ ही यह निर्देश दिया गया कि कैमरे की गुणवत्ता अच्छी होनी चाहिए। लेकिन जिम्मेदारों ने अपने फायदे के लिए इन निर्देश को अनदेखा कर दिया।
सीसीटीवी की खराब गुणवत्ता
विश्वविद्यालय परिसर में हंगामा करने वाले उपद्रवियों को यह बात अच्छी तरह से पता है कि सीसीटीवी से उनकी पहचान नहीं हो पाएगी। उसकी गुणवत्ता इतनी भी नहीं है कि करीब खड़े व्यक्ति को पहचाना जा सके। उपद्रवी इसी का फायदा उठाते हैं।
विवि प्रशासन का यह कहना है कि कैमरे वाले को बुलाया है जिसने कैमरा लगाया था। हो सकता है वह कुछ तरकीब लगाए।

कैमरे लगने भी हुईं कई घटनाएं

नकल सामग्री चुराने की कोशिश

कैमरे लगने के बाद ही छात्रों ने परीक्षा के समय देर रात कैंपस में घुस कर नकल की सामग्री छुपाने की कोशिश की मौके पर पहुंची प्रॉक्टोरियल टीम ने रोकने की कोशिश की तो उपद्रवियों ने विवि परिसर में बने एटीएम मशीन में तोड़-फोड़ कर सिक्योरिटी गाड़ की पिटाई भी। इस पूरे प्रकरण में सीसीटीवी फुटेज खगाला गया लेकिन एक भी उपद्रवी का चेहरा सामने नहीं आया।
मशीन की चोरी
सितम्बर में ओसीआर बील्डिंग के निमार्ण के समय कई मशीन चोरी होने का मामला सामने आया था। इस प्रकरण में इंजिनीयर ने हॉस्टल की तरफ से आए छात्रों पर संदेह जताया था। जिसकी पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज खगाल गए लेकिन खराब क्वालिटी के कारण पहचान न हो पाने से दोषियों को सजा नहीं मिल सकी है।
साइकिल चोरी का मामला
शारीरिक शिक्षा विभाग के बाहर से एक छात्रा की साइकिल चोरी होने का मामला सामने आया था। चोर जिस जगह से साइकिल ले उड़ा था वहां पर चार कैमरे लगे हुए थे। उसके बाद भी चोर की पहचान नहीं की जा सकी।
हॉस्टल में दाखिल हुआ छात्र
एलयू के न्यू-कैंपस में शनिवार देर रात एक छात्र हॉस्टल में घुस आया। इस बात की जानकारी मिलने पर उसकी पहचान के लिए विवि प्रशासन ने सीसीटीवी फुटेज की जांच की लेकिन उसमें कोई भी साक्ष्य हाथ नहीं आया।

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