कश्मीर में पैलेट गन का इस्तेमाल बंद होगा: राजनाथ

  • सरकार पैलेट गन का विकल्प जल्द सामने लायेगी
  • सुरक्षा बलों को पैलेट गन के इस्तेमाल से बचने का निर्देश
  • कश्मीर के भटके हुए नौजवानों को समझाने की होगी कोशिश

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Capture 3जम्मू कश्मीर। केन्द्र सरकार के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कश्मीर में पैलेट गन का इस्तेमाल बंद करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि पैलेट गन के इस्तेमाल और उसकी भयावहता का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था। इस मसले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया था, जिसको दो महीने के अंदर रिपोर्ट सौंपने का समय दिया गया था लेकिन मात्र महीने भर का वक्त पूरा होने पर ही कमेटी की जांच अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। हम उम्मीद करते हैं कि दो से चार दिनों से अंदर रिपोर्ट मिल जायेगी। उसके बाद हम बहुत जल्द पैलेट गन का विकल्प तलाशेंगे।
गृहमंत्री राजनाथ सिंह एक महीने के अंदर दूसरी बार कश्मीर पहुंचे हैं। वहां उन्होंने जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के साथ कश्मीर मसले पर बात की । इसके साथ ही कश्मीर की समस्या को लेकर काम कर रहे 20 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से भी मिले। इसके बाद गृहमंत्री ने संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा कि सरकार हिन्दुस्तान के भविष्य को कश्मीर के भविष्य के साथ जोडक़र देख रही है। इसलिए यदि कश्मीर के नौजवानों का भविष्य बेहतर होगा, तो हिन्दुस्तान का भविष्य भी उज्ज्वल होगा। गृहमंत्री ने कश्मीर की जनता से अपील की है कि वह कश्मीर के हालात बिगाडऩे की कोशिश में लगे लोगों को बेनकाब करने में मदद करे। गृहमंत्री ने कहा कि वो कौन लोग हैं, जो छोटे-छोटे बच्चों को पत्थर उठाने की इजाजत देते हैं। वो कौन लोग हैं, जो हाथों में कलम, लैपटाप और किताबें लेने की उम्र में बच्चों को बंदूकें पकड़ा रहे हैं। ऐसे लोगों को बेनकाब करना होगा। यह तभी संभव होगा, जब कश्मीर की जनता सरकार का साथ देगी। उन्होंने कहा कि मैं बहुत जल्द कश्मीर में आल पार्टी डेलीगेशन लाना चाहता हूं। इसका मकसद सभी पार्टी के लोगों को बातचीत का मौका देना है, ताकी वह स्थिति को बेहतर जान सकें। वहीं जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि विरोध और टकराव से जम्मू कश्मीर का मसला बिल्कुल भी हल नहीं होगा। कश्मीर के छोटे-छोटे बच्चों को बुराई के रास्ते पर जाने से मैने खुद रोका है। उस दलदल से निकाला है। इसलिए अच्छी तरह जानती हूं कि लोग कश्मीर के हालात बिगाडऩे की कोशिश में किस हद तक जुटे हुए हैं। फिलहाल कश्मीर में 95 प्रतिशत लोग शांति चाहते हैं। केवल पांच प्रतिशत लोग बच्चों का मिसयूज करते हैं। उनका इस्तेमाल करके हमले कराते हैं। इन सबका समाधान निकालने की जरूरत है।

Pin It