कलम के तपस्वी हैं पत्रकार: मैथ्रिपाला सिरिसेना

श्रीलंका के राष्टï्रपति ने वरिष्ठï पत्रकार के.विक्रम राव समेत तमाम भारतीय पत्रकारों की प्रशांसा की

Captureकोलंबो/लखनऊ। पत्रकारिता किसी तपस्या से कम नहीं। पत्रकार कलम के पुजारी हैं और उनकी तपस्या कलम है। जनता की बातें उजागर करते हैं तभी सरकार सही निर्णय ले पाती है। उक्त बातें श्रीलंका के राष्टï्रपति मैथ्रिपाला सिरिसेना ने शुक्रवार को कोलंबो स्थित भंडारनायके अंतर्राष्टï्रीय प्रेक्षागृह में कहीं। श्री सिरिसेना श्रीलंका प्रेस एसोशिएसन की 60वीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में भारत व श्रीलंका सहित दक्षिण एशिया के पत्रकारों को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
इस दौरान राष्टï्रपति ने पत्रकारों की सुरक्षा एवं आजादी को भी महत्वपूर्ण बताया। खास तौर भारतीय पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत से हमारा गहरा लगाव है और इस तरह के कार्यक्रमों से राष्टï्रों के द्विपक्षीय संबंधों में प्रगाणता बनती है। इससे पूर्व संसद सुधार एवं मॉस मीडिया मंत्री गयंतकरुणा तिलक ने संबोधित करते हुए कहा कि श्रीलंका की मीडिया काफी दबाव में कार्य कर रही थी। इसमें एक वर्ष में महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। जो अब स्वतंत्र रूप से कार्य कर रहे हैं किंतु आज भी इसमें बहुत से सुधार बाकी हैं। फिलहाल हमारी सरकार इनकी स्थिति और उनके कार्य को देखते हुए इन्हें आवश्यक सहयोग की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि कम से कम इन्हें दो पहिया वाहन प्रदान करने की व्यवस्था हो। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मुदिता करियाकरवाना ने अपने स्वागत भाषण में आईएफडब्ल्यूजे के राष्टï्रीय अध्यक्ष के. विक्रम राव की सराहना करते हुए कहा कि उनके सहयोग से संभव हो पाया कि दोनों देश के पत्रकार आपसी सहयोग कर पाते हैं। श्री राव अस्वस्थता के कारण कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए। उनके संदेश को पत्रकार एवं आईएफडब्ल्यूजे के सोशल प्रभारी के. विश्वदेव राव ने पढ़ा। भारतीय पत्रकार दल की अगुवायी कर रहे आईएफडब्ल्यूजे के विदेश मामलों के सचिव एच.बी. मदन गौड़ा ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने फरवरी में आयोजित होने वाले आईएफडब्ल्यूजे के राष्टï्रीय सम्मेलन में सभी को आमंत्रित किया। कार्यक्रम के उपरांत भारतीय पत्रकार दल ने राष्टï्रपति एवं मीडिया मंत्री को स्मृति चिन्ह भेंट किया। भारतीय दल का नेतृत्व कर रहे मदन गौड़ा, के.विश्वदेव राव, उपेंद्र पाधी, सी.के. शर्मा, शंकर दत्त शर्मा, हरिओम पाण्डेय, विकास शर्मा, इंद्रमणि, विश्वतेजा, अनुप पाण्डेय, पंकज कुमार, बृजेश कुमार पाण्डेय, शिवराम, नवीन शंकर दत्त आदि से राष्टï्रपति ने मुलाकात की।

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