करोड़ों रुपए की मूर्तियां फेंक दी गईं कूड़े के ढेर में

कूड़े के ढेर में पड़े राष्टï्रपिता महात्मा गांधी, बाबा साहब भीमराव अंबेडकर व गौतम बुद्ध

D1 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। यह अजीब विडंबना है कि सत्तारूढ़ पार्टियों से लेकर विपक्षी दलों को महापुरुषों की याद सिर्फ उनके जन्मदिवस या परिनिर्वाण दिवस के दिन ही आती है। सरकार और विपक्षी पार्टियों को इससे कोई सरोकार नहीं है कि देश के महापुरुषों की मूर्तियां किस हालत में है। जिस महात्मा गांधी की वजह से पूरी दुनिया में भारत की पहचान है। जिस कुशीनगर और लुंबिनी में हर साल लाखों की संख्या में अनुयायी महात्मा बुद्ध के दर्शन करने आते हैं उन्हीं भगवान बुद्ध और महात्मा गांधी की मूर्तियां संगीत नाटक अकादमी के परिसर में कूड़े की ढेर में डाल दी गई है। इतना ही नहीं कुछ दिनों पहले अंबेडकर पार्क की दीवार टूटने पर बसपा के दिग्गज नेता और हजारों कार्यकर्ता विरोध में अनशन पर बैठ गए थे, उन्हीं बाबा साहब अंबेडकर की मूर्ति भी कूड़े की ढ़ेर में पड़ी हुई है। ऐसा नहीं है कि इन महापुरुषों की मूर्तियों पर किसी की निगाह नहीं पड़ती। एसएनए में प्रदेश के अति महत्वपूर्ण लोगों का यहां आना-जाना होता है लेकिन ये महत्वपूर्ण लोग एक नजर डाल आगे बढ़ जाते है। उन्हें इससे कोई सरोकार नहीं है कि हमारे देश की पहचान और धरोहर धूल की गर्त में पड़ी है।
संगीत नाटक अकादमी परिसर में देश के महापुरुषों की करोड़ों रुपए की संगमरमर की लगभग 15 मूर्तियां कूड़े की ढेर में पड़ी हुई है। इसमें भगवान बुद्ध, डा. साहब भीमराव अंबेडकर, बाल्मिकी जी, ज्योतिबा फुले सहित कई लोगों की मूर्तियां है। आलम यह है कि कई मूर्तियां कूड़े की ढ़ेर में दब गई है। कई मूर्तियों पर तो पान की पीक भी पड़ी हुई है। इन महापुरुषों के नाम पर राजनैतिक दल अपनी रोटी सेंकते है और इन्ही लोगों की उपेक्षा से इन्हें कोई मतलब नहीं है।

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