करोड़ों खर्च करने के बाद भी डेंगू पर नहीं लग पा रहा नियंत्रण

  • नगर निगम की लचर व्यवस्था के कारण तेजी से फैल रही बीमारी
  • शहर में लगातार बढ़ रहा मौतों का आंकड़ा, कारगर साबित नहीं हो रही फॉगिंग

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। राजधानी लखनऊ के कई इलाके इस वक्त डेंगू की चपेट में है। रोजाना अस्पतालों में डेंगू के दर्जनों मरीज इलाज करवाने पहुंच रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ नगर निगम मच्छरों को मारने के नाम पर एक करोड़ रुपये धुएं में उड़ा रहा है। इसके बावजूद मच्छर हैं कि मरने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। शहर में मच्छरों की स्थिति जस की तस बनी हुर्ई है। मच्छरों के प्रकोप से मलेरिया, चिकनगुनिया, फाइलेरिया व डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। शायद ही कोई ऐसा अस्पताल हो जहां मच्छरों के काटने से मरीज नहीं पहुंच रहें हो, फिर भी नगर निगम प्रशासन नहीं चेत रहा है।
जानकारों के मुताबिक नगर निगम की तरफ से तीस लाख रुपये सिर्फ फॉगिंग के लिए इस्तेमाल की जानी वाली दवा डेल्टा मेथ्रीन पर खर्च किया जा रहा है। वहीं सवा लाख रुपये ईंधन पर नियमित रूप से 29 गाडिय़ों पर खर्च हो रहे हैं। इसके बाद भी डेंगू से राजधानी में मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अब तक डेंगू से 36 लोगों की मौत हो चुकी है।
खराब पड़ीं मशीनें

नगर निगम प्रशासन ने अगस्त के मध्य से फॉगिंग की तैयारी कागजों पर कर ली थी। अगस्त खत्म हो गया, लेकिन फॉगिंग की मशीनें आज तक ठीक नहीं हो सकी हैं। आज भी सात मशीनें खराब पड़ी हैं। 110 वार्ड में सिर्फ 29 मशीनों से क्रमबद्ध तरीके से फागिंग कराई जा रही है। किन्तु दर्जनों इलाके अब भी ऐसे हैं, जिनमें अभी तक फॉगिंग शुरू नहीं कराई गई है। फॉगिंग मशीनों के जिम्मे एक दिन में 18 से 20 वार्ड की जिम्मेदारी है। इनमें कुछ गाडिय़ां नियमित रूप से खराब होती होंगी, कई कर्मचारी भी नियमित रूप से गायब रहते होंगे। इसके बाद भी नगर निगम प्रशासन दावा कर रहा है कि फॉगिंग नियमित रूप से जोन वाइज की जा रही है। इसके लिए नगर स्वास्थ अधिकारी ने दिन बांट रखे हैं।

इतना खर्च हो रहा ईंधन

प्रति वाहन में छह लीटर डीजल दिया जाता है। साठ लीटर डीजल दवा में मिलाया जाता है और पंद्रह लीटर पेट्रोल मशीन में डालकर चलाया जाता है। करीब 29 गाडिय़ों में इसी तरह डीजल व पेट्रोल धुएं में उड़ाया जा रहा है। हर माह करीब 60 हजार से अधिक पेट्रोल व डीजल खर्च हो रहा है। इसके बावजूद भी डेंगू का कहर जस का तस बना हुआ है। उधर अधिकारियों का कहना है कि वार्डों में पार्षद के कहने पर ही फॉगिंग कराई जाती है। इसमें जोनल अधिकारी भी नहीं शामिल होता है। ऐसे में सवाल खड़ा होता है, क्या पार्षद उस मोहल्ले में फॉगिंग कराता है जहां से उसे वोट न मिले हों।

बौना साबित हो रहा शासन-प्रशासन

आम जनता पर डेंगू का हमला जारी है। इस बीमारी से रोजाना किसी न किसी की मौत हो रही है। वहीं सैकड़ों लोग बीमारी की गिरफ्त में हैं। अधिकारियों को नियंत्रण के उपाय नहीं सूझ रहे हैं। लिहाजा शहरी और ग्रामीण इलाकों में मच्छरों का हमला जारी है। उधर ग्रामीण क्षेत्रों का तो इससे बुरा हाल है। यहां फॉगिंग की व्यवस्था तो दूर की बात, कभी सफाई कर्मी नहीं पहुंचता। चारो ओर गंदगी का अंबार लगा रहता है। बात करें ग्रामीण क्षेत्र बंथरा की, तो यहां भी डेंगू फैल गया है। यहां तेज बुखार से पीडि़त बेती निवासी रेखा की मौत हो चुकी है। पति दिलीप के मुताबिक रेखा का इलाज सिविल अस्पताल में चल रहा था। यहां जांच में डेंगू की पुष्टि हुई थी। वहीं मंगलवार रात में भर्ती रेखा ने दम तोड़ दिया। इसके अलावा नानमऊ गांव निवासी सर्वेश पुत्र मोलहे की भी डेंगू से मौत हो गई। सर्वेश का इलाज निजी अस्पताल में चल रहा था। वहीं काकोरी निवासी लालू राम (61) की मौत हो गई। बेटे अजय के मुताबिक डॉक्टरों ने लालूराम को डेंगू से पीडि़त बताया था। इस तरह शहर में अब डेंगू से मृतकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और शासन-प्रशासन इस भयावह बीमारी की रोकथाम करने में बौना साबित हो रहा है।

सभासद तय करता है कि फॉगिंग कहां होनी है और कहां नहीं। प्रति वार्ड में सभासद का प्रमाण लेकर गाड़ी शाम को लौटती है। इसमें जोनल अफसर की भी भूमिका बहुत ज्यादा नहीं है।
पीके सिंह, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम।

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