करोड़ों के खेल में क्या पंचायती राज मंत्री भारी पड़ गए ग्राम्य विकास मंत्री पर

  • पंचायत राज विभाग के कर्मचारियों की भीड़ देखकर रोके गए मुख्य सचिव की बैठक का कार्यव्रत, फैसले के खिलाफ अब ग्राम्य विकास के लोग सडक़ पर आने को तैयार प्रदेश के सभी ब्लाकों में लगेंगे ताले
  • प्रमुख सचिव पंचायती राज ने करोड़ों रुपए लेकर जारी कर दिया शासनादेश, गलत शासनादेश के खिलाफ प्रदेश भर के पंचायत राज और ग्राम्य विकास के कर्मचारी आमने-सामने लड़ाई के मूड में
  • सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर ने कहा कि चंचल तिवारी के करोड़ो के भ्रष्टïाचार की हो उच्च स्तरीय जांच, नहीं हुई जांच तो
    जायेंगी हाईकोर्ट

18 JUNE PAGE11संजय शर्मा
लखनऊ। सालों से एक स्थापित परंपरा चली आ रही है कि विकास खंड स्तर पर खंड विकास अधिकारी ही ब्लाक स्तर पर सबसे बड़ा अधिकारी होता है। बाकी सब विभागों के विकास से संबंधित अधिकारी उसके अधीन आते हैं। ऐसा इसलिए भी होता है क्योंकि विकास खंड स्तर पर खंड विकास अधिकारी ही एक मात्र ऐसा अधिकारी होता है जो राजपत्रित होता है। मगर इस बार 14वें वित्त आयोग के साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये ने घमासान मचा दिया है। इस मामले में पंचायती राज मंत्री और ग्राम्य विकास मंत्री आमने-सामने आ गए हैं।

बदनाम प्रमुख सचिव चंचल तिवारी ने एक विवादित शासनादेश जारी कर दिया, जिसमें कहा गया कि यह धनराशि सीधे एडीओ पंचायत निकाल सकते हैं। इस राशि के चेकों पर खंड विकास अधिकारी के हस्ताक्षर होना अनिवार्य नहीं है। इस फैसले के खिलाफ ग्राम्य विकास के अधिकारियों ने आंदोलन करना शुरू किया तो विवाद बढ़ता देखकर मुख्य सचिव के निर्देश पर एपीसी प्रवीर कुमार ने दोनों पक्षों को और संबंधित अधिकारियों की बैठक करके तय कर दिया कि खंड विकास अधिकारी ही सक्षम अधिकारी है। मगर मामला करोड़ों रुपये से जुड़ा था। सफाई कर्मचारियों से पैसे का प्रलोभन दिखाकर धनराशि वसूली गई थी, लिहाजा कल लखनऊ में पंचायत राज विभाग के बीस हजार कर्मचारियों को बुलाकर प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने पंचायती राज मंत्री की अध्यक्षता में बैठक करी और उसके बाद पंचायती राज मंत्री ने प्रेस नोट जारी करके कहा कि अब इस मामले में ग्राम्य विकास मंत्री से वार्ता करने तक शासनादेश जारी नहीं होगा, जाहिर है पंचायती राज मंत्री राज किशोर सिंह अपने विभाग के लोगों को अधिकार दिलाने के लिए जुट गए हैं, तो वहीं ग्राम्य विकास मंत्री अरविन्द सिंह गोप के लिए भी यह अग्नि परीक्षा की बात है। इस सारे विवाद के पीछे प्रमुख सचिव चंचल तिवारी के शासनादेश की वह लाइन है जिसमें 14वें वित्त आयोग के पैसे के इस्तेमाल के लिए सिर्फ एडीओ पंचायत को ही अधिकृत कर दिया गया है। पंचायत राज कर्मचारियों की भीड़ का जवाब अब ग्राम्य विकास भी देने जा रहा है।

पंचायत राज के कल के आंदोलन की भीड़ जुटाने के लिए की गई वसूली भी अब चर्चा का विषय बन गई है। बताया जाता है कि सफाई कर्मचारियों से कहा गया कि अगर वह लखनऊ चलकर आंदोलन में भाग लेंगे तो उन्हें ग्राम्य विकास अधिकारी का पद मिल सकता है। इसके लिए पांच-पांच सौ रुपए की वसूली की गई।…करोड़ो रुपए की वसूली के बाद कर्मचारी आए तो मगर उन्हें ग्राय विकास अधिकारी
बनाए जाने जैसे विषयों पर कोई फैसला नहीं किया गया। हकीकत यह है कि सारी लड़ाई सिर्फ इस बात की है कि चेकों पर सिंगल हस्ताक्षर करने का अधिकार पंचायत राज कर्मियों को मिल जाए। हकीकत यह है कि प्रदेश भर में सिंगल हस्ताक्षर से पैसे निकालने का अधिकार किसी भी अधिकारी को नहीं दिया गया है। साढ़े तीन हजार करोड़ के इस खेल में भ्रष्टाचार करने के लिए सब मैदान में आ गए हैं। सब जानते हैं कि इस भ्रष्टचार की हकीकत या है, मगर कोई इस पर रोक लगाने की हिमत नहीं कर रहा।

उधर ग्राय विकास के लोग इस बात से बेहद नाराज है कि जब विवाद के बाद मुय सचिव स्तर पर बातचीत हुई और एपीसी की बैठक में सब बिन्दुओं का निस्तारण कर लिया गया तो फिर भीड़ के दबाव में फैसला कैसे बदला जा सकता है। इस संबंध में ग्राय विकास के कर्मचारियों ने एक महापरिषद भी बनाई थी। महापरिषद की अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने कहा कि किसी भी कीमत पर यह स्वीकार नहीं किया जा सकता कि विकास खंड स्तर पर विकास कार्यों के लिए खंड विकास अधिकारियों को अलग कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि कल सभी लोगों की बैठक बुलाई गई है अगर शासनादेश जारी नहीं हुआ तो प्रदेश के सभी लाकों में ताले डाल दिए जायेंगे और लखनऊ में ग्राय विकास के लाखों लोग प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि ग्राय विकास के लोग सरकार की नीतियों को बेहतर तरीके से लागू करने के लिए अपना सर्वस्व अर्पण करते हैं और आंदोलन के समय में भी हमने दो घंटे ज्यादा काम किया। इस बारे में पंचायती राज मंत्री और ग्राय विकास मंत्री कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है, मगर यह विवाद अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोगों की निगाह इस बात पर टिकी है कि दोनों मंत्रियों में भारी कौन रहेगा। इस संबंध में
कृषि उत्पादन आयुत प्रवीर कुमार ने कहा है कि मुय सचिव के कार्यव्रत के मिनट कैङ्क्षसल नहीं किए गए हैं। कल की वार्ता में तय हुआ कि माननीय पंचायतीराज मंत्री एवं माननीय ग्राय विकास मंत्री आपस में वार्ता करेंगे और उसके बाद शासनादेश जारी कर दिया जाएगा।

भ्रष्टाचार के खिलाड़ी चंचल के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं
जिस विवादित और बदनाम प्रमुख सचिव चंचल तिवारी के गलत शासनादेश के खिलाफ सरकार के दो विभाग आमने-सामने आ गए, वह चंचल तिवारी आज भी अपने पद पर बने हुए हैं। कल के प्रदर्शन की योजना उनके ही दिमाग की उपज थी। दरअसल साढ़े तीन हजार करोड़ रुपए पंचायत राज विभाग के कर्मचारियों द्वारा ही खर्च करने के आदेश से यह सारा विवाद हुआ। सूत्रों का कहना है कि इस शासनादेश को जारी करने के लिए चंचल ने पांच करोड़ की धनराशि ली थी।

चंचल के भ्रष्टाचार की हो उच्च स्तरीय जांच: नूतन
सामाजिक कार्यकर्ता डा. नूतन ठाकुर ने कहा है कि यह बेहद गंभीर मामला है कि प्रदेश भर में सफाई कर्मचारियों से पांच-पांच सौ रुपये वसूले गए और चर्चा में आया कि करोड़ो रुपये लेकर चंचल तिवारी ने शासनादेश जारी कर दिया। इससे पहले भी भर्ती घोटाले में करोड़ो रुपये के हेराफेरी का फैसला चंचल तिवारी ने किया था, मगर मामला खुल जाने पर यह भर्ती निरस्त कर दी गई। अगर चंचल के भ्रष्टाचार की उच्च स्तरीय जांच नहीं हुई तो मैं इस जांच के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाउंगी।

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