करोड़ों की गाडिय़ां खड़े-खड़े खा रहीं धूल, कोई नहीं ले रहा सुध

  • नगर निगम के आरआर विभाग में वर्षों से खड़ी हैं रोड स्वीपिंग गाडिय़ां
  • माननीयों व वीवीआईपी के लिए कभी कभार निकलती हैं गाडिय़ां
  • जनता की गाढ़ी कमाई का हो रहा दुरुपयोग

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। एक ओर जहां शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए नगर निगम से लेकर शासन-प्रशासन तक रोजाना बैठकें की जा रही हैं। वहीं दूसरी ओर जनता की गाढ़ी कमाई का दुरुपयोग किया जा रहा है। जब सडक़ें ही साफ नहीं होंगी, तो शहर को स्मार्ट बनाने का सपना कैसे पूरा होगा। जी हां शहर की सडक़ों को साफ करने वाली रोड स्वीपिंग गाडिय़ां सालों से नगर निगम के गोमतीनगर स्थित आरआर विभाग में खड़े-खड़े धूल फांक रही हैं। वहीं इन गाडिय़ों को विदेशों से जिस उद्देश्य की पूर्ति के लिए लाया गया था। वह दर किनार हो गया है। इक्का दुक्का अगर कभी दिख भी जाती हैं, तो वह माननीयों के घर के आस-पास अथवा वीवीआईपी रोडों पर ही सफाई करती देखी जाएंगी।
वीवीआईपी इलाकों
में होता है उपयोग

जानकारों के अनुसार सडक़ों की सफार्ई के लिए लायी गयी रोड स्वीपिंग गाडिय़ों का उपयोग माननीयों के अलावा वीवीआईपी इलाकों में किया जाता है। बाकी शहर भर में कहीं भी इन गाडिय़ों को नहीं देखा जाता है। इसका मतलब है कि जनता की गाढ़ी कमाई से विदेशों से लाई गर्ई करोड़ों की गाडिय़ां सिर्फ माननीयों के लिए ही लाई गर्ई है। इसके अलावा जब शहर में माननीयों का जिस रोड पर दौरा अथवा कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जाना होता है, तो जिस रोड से माननीयों का काफिला निकलना होता है उस रोड को रोड स्वीपिंग गाडिय़ां चमकाने के लिए पहुंच जाती है।
क्या ऐसे होगा शहर स्मार्ट

शहर में एक ओर जहां स्मार्ट सिटी को लेकर जोर शोर से कवायद चल रही है। वहीं यहां की सडक़ों की हालत किसी से भी छिपी नहीं है। ऊपर से जिन अधिकारियों पर शहर की साफ-सफाई की जिम्मेदारी है, वही अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहे हैं। अधिकारियों की मानें तो जिस एरिये की सडक़ चौड़ी होती है। वहीं इन गाडिय़ों को चलाया जा सकता है। इसलिए शहर भर में इन गाडिय़ों को नहीं पहुंचाया जा सकता है।
एक गाड़ी की कीमत
है लाखों में
जानकारी के अनुसार रोड स्वीपिंग की गाडिय़ों की कीमत लगभग 70 से 80 लाख रुपये के बीच की है। इसको विदेशों से शहर में लाये हुए लगभग १५ साल हो रहे हैं लेकिन इन्हें शहर के कुछ ही इलाकों में सफाई करते हुए देखा गया है। जानकारों की माने तो यह गाडिय़ां नगर निगम के गोमतीनगर स्थित आर आर विभाग में खड़े-खड़े धूल फांक रही हैं। वहीं इसमें से कुछ गाडिय़ां वर्षों से खराब पड़ी हैं, जिसको अभी तक ठीक नहीं करवाया गया है।
क्या कहते हैं अधिकारी

विभाग में पांच रोड स्वीपिंग गाडिय़ां रोड की सफाई के लिए मौजूद हैं। यह गाडिय़ां हर रोज अपने तय रूट पर रात्रि में दस बजते ही निकल जाती हैं। ये गाडिय़ां चौड़ी सडक़ों पर ही चल पाएंगी। पांच गाडिय़ों में से एक खराब पड़ी है और उस गाड़ी के रूट के काम को दूसरी गाडिय़ों से पूरा कराया जाता है।
दीपक यादव
प्रभारी, आरआर विभाग
नगर निगम।

कमीशन के चलते नये-नये प्रोजेक्टों को लाया जाता है और मतलब सीधा हो जाने के बाद वह प्रोजेक्ट कूड़े के ढेर की तरह पड़े-पड़े धूल फांकते हैं। इस तरह कई वर्षों से नगर निगम के पैसों को लूटा जा रहा है, जो आता है वह लूटने की फिराक में लग जाता है और फिर चला जाता है।
दुर्गेश वाल्मीकि
पदाधिकारी, स्थानीय निकाय एवं सफाई कर्मचारी संयुक्त मोर्चा।

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