करोड़ों का राजस्व देने वाला आबकारी विभाग विकलांग

– गणेश जी वर्मा
लखनऊ। प्रतिमाह करोड़ों रुपये का राजस्व देने वाला आबकारी विभाग विकलांग है। विभाग के पास न ही पर्याप्त मात्रा में फोर्स है और न ही चलने के वाहन हैं। ऐसे में शराब का गलत कारोबार करने वालों के खिलाफ विभाग नाकाम हो रहा है। सरकार को सबसे ज्यादा राजस्व देने वाला यह विभाग अपने संसाधनों के लिए ही तरस रहा है। इतना ही नहीं यह विभाग संसाधन के साथ ही उन कड़े नियमों के लिए भी मोहताज है जो इसके पास नहीं हैं। जबकि पुलिस विभाग के पास सारी वस्तुयें मुहैया होने के बाद भी यह विभाग अपराधियों को संरक्षण देने में लगा रहता है।
बता दें कि मलिहाबाद कांड में जहरीली शराब से जब कई दर्जन लोगों की मौत हुई तो सरकार ने आनन-फानन में आबकारी विभाग के सभी अधिकारियों के ऊपर कार्रवाई करते हुए उनको पद से हटा दिया। जबकि दूसरी तरफ पुलिस विभाग के सीओ स्तर तक ही कार्रवाई की गई। सूत्र बताते हैं कि इस अवैध कारोबार में पुलिस की मोटी रकम प्रतिमाह बंधी हुई होती है। कभी-कभार आबकारी विभाग की टीम छापेमारी करती है तो उससे पहले अवैध कारोबार करने वालों को पता चल जाता है। ऐसे में इसकी जानकारी अधिकतर पुलिस ही देती है। वहीं दूसरी तरफ प्रतिवर्ष आबकारी का राजस्व निर्धारित रहता है।
पुलिस नहीं करती सहयोग
आबकारी विभाग के पास अवैध शराब का कारोबार करने वालों के खिलाफ कोई सख्त कानून नहीं है जिसके माध्यम से विभाग कठोर कार्रवाई कर पाए। विभाग कहीं भी अवैध शराब पकड़ता है तो उसे एक्साइज की धारा 60, 61 और 62 के तहत ही कार्रवाई करनी पड़ती है। कच्ची हो देसी या फिर विदेशी। किसी भी तरह की अवैध मदिरा का व्यवसाय करने वालों के खिलाफ आबकारी विभाग सिर्फ इसी धाराओं में कार्रवाई करती है। यह धाराएं जमानतीय होती हैं। जबकि कुछ रुपए का ही जुर्माना होता है। सबसे बड़ी बात यह है कि सुबह विभाग इनको पकड़ कर कोर्ट में पेश करता है जबकि शाम तक यह आरोपी जमानत पर रिहा होकर फिर अपने धंधे में लग जाते हैं। अगर इससे भी ज्यादा कुछ होगा तो मात्र छह माह की कैद हो जायेगी। वहीं दूसरी तरफ पुलिस इसमें सहयोग सिर्फ नहीं के बराबर करती है। सूत्र बताते हैं कि यदि जब कभी आबकारी विभाग इनके ऊपर धोखाधड़ी सहित अन्य मामलों में मुकदमा दर्ज करने के लिए लिखित देती है तब भी पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती है। बता दें कि कृष्णानगर थाना क्षेत्र के अन्र्तगत करनैल सिंह को आबकारी टीम ने पकड़ा था और विभागीय कार्रवाई कर उसे पुलिस के हवाले कर दिया था। इस अवैध कारोबारी के पास से हरियाणा राज्य की शराब भी मिली थी। पुलिस चाहती तो उस पर कुछ सख्त धाराएं लगा सकती थी। लेकिन दूसरे दिन ही जमानत पर छूट कर बाहर आ गया।
एक वाहन से छापेमारी
संसाधनों की कमी से आबकारी विभाग कराह रहा है। इसी वजह से विभाग में कार्यरत कर्मचारी और अधिकारी दूर दराज के क्षेत्रों में छापेमारी नहीं कर पाते। सरकार ने छापेमारी करने के लिए मात्र एक चार पहिया वाहन ही उपलब्ध कराया है। जिसको एक माह में मात्र 15 सौ किलोमीटर से ज्यादा नहीं चलाया जा सकता। अगर उससे ज्यादा किसी अधिकारी ने चलायी तो उसको अपनी जेब से भरना पड़ता है।
आबकारी विभाग के पास जेल भी नहीं
विभाग के ऊपर शराब का अवैध कारोबार करने वालों को पकडऩे का दायित्व तो है लेकिन पकडऩे के बाद उन आरोपियों को रखने के लिए जेल नहीं है। आबकारी विभाग पुलिस का सहयोग लेती है। जबकि हकीकत यह है कि एक रात जेल में रहने पर आरोपी और पुलिस के बीच काफी साठगांठ हो जाती है। जो आए दिन और प्रगाढ़ होता जाता है।

इन नम्बरों पर दें सूचना
आम व्यक्ति भी अवैध शराब के कारोबार करने वाले की सूचना दे सकता है। इनका नाम गोपनीय रखा जाएगा। जिला आबकारी निरीक्षक 9454465631, विशाल वर्मा आबकारी निरीक्षक 9454466254, संजय यादव आबकारी निरीक्षक 9454466255, अश्विनी कुमार आबकारी निरीक्षक 945446625, ए एनएन पाण्डेय 9454466257, ओएन अग्रवाल 9454466258, सीताराम यादव 9454466259, एनएन त्रिपाठी 9454466260 तथा ग्रामीण क्षेत्रों के लिए संजय यादव 9454466255 और एएन सिंह के 9454466262 के नम्बर पर सूचना दी जा सकती है।
चार्ज के लिए परेशान क्यों होते हैं पुलिस अधिकारी
चार्ज पाने के लिए वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं होती है। लेकिन इसके बाद भी पुलिस विभाग के अधिकारी चार्ज पाने के लिए परेशान क्यों होते हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक चार्ज पाने के बाद थानाध्यक्ष सहित अन्य अधिकारियों की कमाई में इजाफा हो जाता है। अवैध रूप से दुकान लगाना, अवैध टैक्सी स्टैंड, अवैध शराब, सहित अन्य स्थानों से चार्ज पाने वाले अधिकारी को मोटी रकम प्रतिमाह मिलना प्रारम्भ हो जाता है।

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