करोड़ों कर्मचारियों की हड़ताल से देश भर में मचा हडक़ंप

  • राष्ट्रव्यापी हड़ताल से आम जन-जीवन बुरी तरह प्रभावित
  • सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों का बुरा हाल, निजी अस्पतालों में जाने को मजबूर

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

Captureलखनऊ। देश भर में ट्रेड यूनियनों से जुड़े करीब 18 करोड़ कर्मचारी हड़ताल पर हैं। केंद्र सरकार की कामगार संबंधी नीति के खिलाफ कर्मचारियों की महाहड़ताल हो रही है। इस हड़ताल में केन्द्र और राज्य सरकार के अधिकांश विभागों के कर्मचारियों ने काम बंद कर दिया है। बैंकिंग सेवाओं में भी छह सार्वजनिक बैंकों के कर्मचारी हड़ताल में शामिल हैं। वहीं देश के कई हिस्सों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट और दूरसंचार से जुड़े कर्मचारी भी ट्रेड यूनियन का समर्थन कर रहे हैं। ऐसे में बैंकों के साथ तमाम फैक्टरियां और केंद्र सरकार के तमाम दफ्तरों में कामकाज ठप है। इससे एक दिन में हजारों करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका व्यक्त की गई है।

ट्रेड यूनियनों के आज भारत बंद के चलते ज्यादातर राज्यों में सरकारी दफ्तर और बैंक बंद हैं। परिवहन सेवायें भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। देश के ज्यादातर हिस्सों में स्कूल, कॉलेज और निजी बैंक खुले हैं। दिल्ली, मुंबई और लखनऊ में बसें सामान्य रूप से चल रही हैं, वहीं बिजली और जलापूर्ति भी प्रभावित नहीं हुई हैं। जबकि कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ट्रेड यूनियनों की हड़ताल का समर्थन कर रही है। इसलिए यहां स्कूल-कॉलेज भी बंद हैं और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था भी प्रभावित हुई हैं। सडक़ों पर बेहद कम बसें नजर आ रही हैं। इनके अलावा रेडियोलॉजिस्टों और सरकारी अस्पतालों की नर्सों ने भी अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की है। हालांकि उन्होंने कहा है कि आपात सेवाएं प्रभावित नहीं होंगी। कोल इंडिया के कर्मचारी भी इस हड़ताल में शामिल हैं।
गौरतलब है कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में सरकार ने निजीकरण और कुछ कंपनियों को बंद करके करीब 55,907 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। सरकार की ओर से संचालित 77 कंपनियों का घाटा बढक़र 26, 700 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। ट्रेड यूनियनों की हड़ताल को खत्म करने के प्रयासों के तहत वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को कहा था कि सरकार अपने कर्मचारियों का पिछले दो साल का बोनस जारी करेगी। इसके साथ अकुशल श्रमिकों के न्यूनतम वेतन में इजाफे की बात भी कही गई है। लेकिन ऑल इंडिया ट्रेड यूनियंस कांग्रेस और सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस जैसे संगठनों ने सरकार की ओर से मंगलवार को की गई अपील को ठुकरा दिया है। इन संगठनों का कहना है कि सरकार उनकी मांगों को पूरा करने में नाकाम रही है। इनकी आपत्ति बीमा और रक्षा जैसे क्षेत्रों में विदेशी निवेश के नियमों के शिथिल करने को लेकर है। घाटे में चल रहे सार्वजनिक उपक्रमों को बंद करने की योजना का भी श्रमिक संगठन विरोध कर रहे हैं।
18 करोड़ कर्मचारी हड़ताल पर
ट्रेड यूनियनों ने दावा किया है कि आज के हड़ताल में सरकारी विभागों के 18 करोड़ कर्मचारी हिस्सा ले रहे हैं। पिछले साल हुई हड़ताल में 14 करोड़ कर्मचारियों ने हिस्सा लिया था। केंद्र सरकार के कोल इंडिया, गेल, ओएनजीसी, एनटीपीसी, ऑयल इंडिया, एचएएल और बीएचईएल के कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल हैं। जबकि आरएसएस समर्थित भारतीय मजदूर संघ ने हड़ताल से खुद को अलग रखा है।

स्वास्थ्य व्यवस्था बुरी तरह चरमराई

देश भर में नर्सों की हड़ताल की वजह से स्वास्थ्य व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है। लखनऊ में एसजीपीजीआई, लोहिया अस्पताल, केजीएमयू और जिले की सभी सीएचसी पीएचसी पर मरीजों की लंबी लाइन लगी हुई है। अस्पतालों में भर्ती मरीजों की देखभाल करने वाला कोई नहीं है। मुख्य चिकित्साधिकारी और अन्य सभी अस्पतालों के सीएमएस की तरफ से वैकल्पिक व्यवस्था की गई है लेकिन वह ऊंट के मुंह में जीरा ही साबित हो रही है। हजारों की संख्या में अस्पतालों में भर्ती मरीजों की सुध लेेने वाला कोई नहीं है। वहीं डेंगू और संक्रामक रोग वार्ड में भर्ती मरीजों का सबसे बुरा हाल है। इस वार्ड में भर्ती मरीजों को इंजेक् शन लगवाने और दवा लेने में भी समस्या आ रही है। इसलिए मरीजों को नर्सों की हड़ताल और इलाज की पर्याप्त सुविधा न मिलने का डर सताने लगा है। आज केजीएमयू, बलरामपुर, लोहिया अस्पताल और सिविल अस्पताल समेत कई जगहों पर नर्सों की हड़ताल देखकर लोग वापस लौट गये। वहीं केजीएमयू प्रशासन हड़ताल करने वाली नर्सों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग कर रहा है। पीजीआई में नर्सों की हड़ताल से निपटने के लिए गुरुवार की शाम संस्थान के सभी विभागों में चेतावनी चिपका दी गई है। यदि नर्सों ने हड़ताल की तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी। उसके बाद भी हड़ताल बदस्तूर जारी है।

ऑल इंडिया गवर्नमेंट नर्सेज संघ अपनी मांगों को लेकर देश भर में आज हड़ताल पर हैं। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री से वार्ता के बाद भी अभी तक नर्सों की मांगें पूरी नहीं हो पाई हैं। इसलिए आज प्रदेश में लगभग 12 हजार नर्सेज हड़ताल पर हैं। इसमें केजीएमयू, एसपीजीआई और जिले की सभी सीएचसी, पीएचसी समेत अन्य सरकारी अस्पतालों में भी नर्सेज ने काम बंद कर दिया है।
अशोक कुमार, महामंत्री
राजकीय नर्सेज संघ।

नर्सेज की हड़ताल का ज्यादा असर नहीं है। हमने पहले ही इससे निपटने के लिए व्यवस्था कर ली थी। संविदा पर तैनात नर्सों को तैनात कर दिया गया है। इसके साथ ही सभी चिकित्सक तथा अन्य कर्मचारी स्टाफ पूरी तरह से अलर्ट पर हैं।
डॉ. ओंकार यादव, सीएमएस, लोहिया चिकित्सालय।

केजीएमयू में नर्सों की हड़ताल से कोई फर्क नहीं पड़ा है। हमारे पास पार्याप्त स्टाफ है, जिससे मरीजों के इलाज में कोई समस्या नहीं आने दी जा रही है।
डॉ. वेद प्रकाश, उप चिकित्सा अधीक्षक, केजीएमयू

हड़ताल के मुद्दे

ट्रेड यूनियनों का कहना है कि पहली श्रेणी के शहरों के लिए सरकार ने अकुशल कारीगरों की कम से कम मजदूरी में 20 फीसदी इजाफा किया है, जो कम है। बता दें कि इससे ऐसे कामगारों को हर महीने 12 हजार रुपए ही तनख्वाह मिल सकेगी। यूनियनों ने इसके अलावा कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा और 18 हजार के न्यूनतम वेतन की मांग की है। साथ ही असंगठित क्षेत्र के कारीगरों समेत सभी वर्गों के लिए न्यूनतम पेंशन भी बढ़ाकर तीन हजार रुपए हर महीने करने को लेकर भी हड़ताल का ऐलान किया गया है। ट्रेड यूनियनें रेलवे, रक्षा और अन्य कई क्षेत्रों से एफडीआई (विदेशी निवेश) हटाने की मांग पर भी जोर डाल रहे हैं।

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