करवा चौथ के रंग में रंगे राजधानी के बाजार चूड़ी, साड़ी व गिफ्ट आइटम से दुकानें गुलजार

  • करवा चौथ के लिए शुरू हो गयी हैं पार्लर्स की एडवांस बुकिंग बाजारों में हैवी वक्र्स की साडिय़ों की डिमांड सबसे अधिक

ऐश्वर्या गुप्ता
captureलखनऊ। करवा चौथ पर्व को लेकर बाजार पूरी तरह से सज चुके हैं। मिट्टी के करवा बनाने वाले कारीगरों ने अन्य कई तरीके के करवा तैयार किए हैं। बाजारों में कारीगरों ने डिफरंट डिजाइन और खूबसूरत रंग के करवे रेडी हैं। करवा चौथ की खरीदारी के चलते बाजार में रौनक दिखनी शुरू हो गई है। मार्केट में साड़ी और ट्रेडिशनल ड्रेसेज की खूब खरीदारी शुरू हो गयी है। इनके शोरूम, ज्वेलरी शॉप्स और कॉस्मेटिक की दुकानों पर सबसे ज्यादा भीड़ देखने को मिल रही है।
करवाचौथ का त्यौहार कल है। इसके लिए शहर की सभी सुहागिनों के लिए करवा बनकर तैयार कर लिए गये हैं। निशातगंज में अपनी छोटी सी दुकान लगाने वाले जितेंद्र ने 5-5 हजार करवा और वहीं एक और दुकान लगाने वाले प्रकाश ने 3 हजार करवे तैयार किये हैं।
सरगी का होता है खास महत्व
करवा चौथ में सरगी का विशेष महत्व रहता है। घर की जो बड़े-बुजुर्ग महिला होती हैं वो अपने से छोटी बहुओं, बेटियों को सरगी करवाती हैं। सरगी सुबह 4 से 4.30 के बीच होती है। इसमें दूध और फेनी या दूध से बने पदार्थ का महत्व रहता है। जो पहली बार व्रत रखतीं हैं, उनके लिए सरगी मायके से आती है,जो शुभ मानी जाती है। करवा-चौथ में दिन भर निर्जला व्रत रखते हैं। शाम को करवा चौथ की पूजा की जाती है, कथा होती है। पूजा की थाली को सभी महिलाओं में सात बार घुमाने की प्रथा होती है। इसके साथ ही उसी पूजा से चांद निकलने पर उसकी पूजा करते हैं और व्रत खोलते समय वही पानी पीते हैं। एक बार व्रत शुरू करने पर उसे बीच में तोड़ा नहीं जाता है।

फैशन का खुमार

फेस्टिवल और फैशन दोनों का गहरा नाता है, क्योंकि त्योहारों के आते ही बाजारों की रौनक बढऩे लगती है और बाजार में हर चीज मिलनी शुरू हो जाती है। नवरात्रि के बाद से ही एक के बाद एक त्योहारों का सिलसिला शुरू हो ही जाता है। इन त्योहारों के चलते फैशन बाजार की रौनक भी बढऩे लगती है। खासकर तब जब सुहागनों का त्योहार करवा चौथ आता है, तब तो फैशन की दिवानी महिलाओं और युवतियों के लिए मार्केट पूरी तरह से रेडी रहता है। जाहिर है कि इस त्योहार पर महिलाओं के साज-श्रृंगार का महत्व ज्यादा होता है। इसलिए महिलाओं के लिए खास तौर पर करवा चौथ स्पेशल ज्वेलरी, साड़ी, लहंगा-चुन्नी की मार्केट में जबरदस्त डिमांड है।

हैवी वर्क साडिय़ों की डिमांड

करवा चौथ को देखते हुए सभी व्यापारियों ने बड़े पैमाने पर साड़ी मंगाई है। लेटेस्ट डिजाइन की साडिय़ां आर्डर की गई हैं। कपूरथला स्थित साड़ी की दुकान के मालिक अनिल बताते हैं कि इस बार अच्छी बिक्री हो रही है। उन्होंने बताया कि जिले के अन्य शहरों में सप्लाई के आर्डर आये हैं। उन्होंने बताया कि इस बार के करवा में काफी मुनाफा होगा । साडिय़ां की ज्यादा से ज्यादा बिक्री की उम्मीद है।
शुरू हो गयी एडवांस बुकिंग्स
मीराबाई मार्ग पर स्थित रिवैंप ब्यूटी पार्लर की ओनर रजनी सिंह ने बताया कि करवा चौथ पर उनके पास मेहंदी, मेकअप, हेयर स्टाइल के लिए बुकिंग खूब हो रही है। रजनी बताती हैं कि इस बार मेहंदी हाथ के आकार के अनुसार से लगाई जा रही है जिसमें मोटे डिजाइन के साथ पतली शेप वाले डिजाइन को पसंद किया जा रहा है।

अरेबियन विद आउटलाइन का ट्रेंड

पिछले साल अरेबियन स्टाइल मेहंदी डिमांड में थी, लेकिन इस साल ब्राइडल और ग्रूम स्टाइल की मेहंदी छाई हुई है। पत्रकारपुरम में मेहंदी लगाने वाले सोनू ने बताया कि पहले दूल्हा-दुल्हन स्टाइल शादियों में लगाया जाता था। इस बार फिर से करवाचौथ पर इस तरह की मेहंदी को लगवाया जा रहा है। करवा के एक दो दिन पहले से ही करवाचौथ के लिए मेहंदी लगनी शुरू हो गयी है। पिछले साल सिम्पल और अरेबियन मेहंदी लगाई जा रही गई थी। इस साल अरेबियन मेहंदी को अलग रंग से आउटलाइन करके अलग स्टाइल दिया जा रहा है। मेहंदी लगवाने आई अंकिता ने बताया कि मैं हर साल कुछ नया ट्राई करती हूं। इस साल मैंने न्यू अरेबियन विद आउटलाइन ट्राई किया है। यह डिजाइन काफी अच्छा लग रहा है।

क्यों मनाया जाता है करवा चौथ

कहा जाता है कि जब सत्यवान की आत्मा को लेने के लिए यमराज आए थे तो पतिव्रता सावित्री ने उनसे अपने पति सत्यवान के प्राणों की भीख मांगी और अपने सुहाग को न ले जाने के लिए निवेदन किया। यमराज के न मानने पर सावित्री ने अन्न जल का त्याग कर दिया। वो अपने पति के शरीर के पास ही रोने लगी। पतिव्रता स्त्री के दुख को देखते हुए वह परेशान हो गये। उन्होंने सावित्री से कहा कि अपने पति सत्यवान के जीवन के अतिरिक्त कोई और वर मांग लो। सावित्री ने यमराज से कहा कि आप मुझे कई संतानों की मां बनने का वर दें, जिसे यमराज ने हां कह दिया। पतिव्रता स्त्री होने के नाते सत्यवान के अतिरिक्त किसी अन्य पुरुष के बारे में सोचना भी सावित्री के लिए संभव नहीं था। अंत में अपने वचन में बंधने के कारण एक पतिव्रता स्त्री के सुहाग को यमराज ने जीवनदान दिया।

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