कमजोर फेफड़े वालों पर कोरोना का खतरा ज्यादा

कमजोर फेफड़े वालों पर कोरोना का खतरा ज्यादा

फेफड़े में संक्रमण पहुंचते ही अन्य अंग भी होने लगते हैं प्रभावित
शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने से ही संक्रमण भाग जाएगा

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। कोरोना वायरस मानव शरीर में कमजोर फेफड़ों पर तेजी के साथ अटैक करता है। यह वायरस धीरे-धीरे इंसान की इम्यूनिटी को कम करता है। यदि संक्रमण फेफड़ों में पहुंच जाता है तो अन्य अंगों की कार्यप्रणाली में बदलाव आने लगते हैं और शारीरिक प्रतिक्रिया गड़बड़ाने लगती है। ऐसे में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता का मजबूत होना बेहद आवश्यक होता है।
मानव शरीर में वायुजनित संक्रमण का मुख्य भाग फेफड़े ही होते हैं इसके इफेक्ट होने से शरीर की अन्य कार्यप्रणाली में समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। कमजोर फेफड़ों को ओपेसिटी कहते हैं। फेफड़ों में संक्रमण के प्रवेश से हवा वाले स्थान पर बलगम बनना शुरू हो जाता है, जिस कारण सांस लेने में तकलीफ होती है। कोरोना वायरस से बचने के लिए इम्यूनिटी का सही होना आवश्यक है। शरीर की प्रतिरोधक क्षमता संक्रमण से बचाव में बेहद कारगर है तो वहीं मरीजों को बीमारी से उबारने में सहायता करती है। समय के साथ केसों की बढ़ती संख्या में कमजोर फेफड़ों वालों का आंकड़ा सबसे अधिक है। कमजोर फेफड़े वाले व्यक्तियों की इम्यूनिटी कम होने के कारण वायरस का सीधा अटैक हो रहा है।

कमजोर फेफड़े वाले लोग ऐसे बढ़ाएं इम्यूनिटी

मुनक्का, अंजीर, शहद, लहसुन, तुलसी के पत्ते के सेवन से कमजोर फेफड़ों को मजबूत किया जा सकता है। इसके अलावा कुछ मुद्राएं यानी आसनों से अपनी इम्यूनिटी बढ़ा सकते हैं। इस आसन से कंधे, जांघ की मांसपेशियां व फेफड़े मजबूत होते हैं। साथ ही श्वसन संबंधित सभी बीमारियां ठीक होती हैं। ताड़ासन, मत्स्यासन, शंशाकासन भी इसके बेहतर विकल्प हैं। यह सभी आसन को सुबह खाली पेट करना चाहिए। यह आसन शरीर को लचीला भी बनाते हैं और मांसपेशियों का दर्द कम करने में सहायता प्रदान करते हैं।

ऐसे करता है कमजोर

तनाव, हेल्दी डाइट न लेना, तंबाकू का सेवन, धूम्रपान, चीनी और नमक से भरपूर आहार इम्यूनिटी सिस्टम को कमजोर करता है।

कमजोर इम्यूनिटी वालों पर यह वायरस तेजी से अटैक करता है। इसके लिए शरीर के इम्युनो मार्कर की पड़ताल बेहद अहम है। साथ ही वायरस के गिरफ्त में आए मरीजों में कौन से इम्युनो मार्कर घट या बढ़ रहे हैं, इन्हें चिह्नित किया जाए।
डॉ. सुरुचि शुक्ला, माइक्रोबायोलॉजी, केजीएमयू

https://www.youtube.com/watch?v=5u6f7_QlywI&t=25s

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