कब सुधरेंगे हमारे सांसद

कांग्रेस अपनी जिद पर अड़ी हुई है कि बिना इस्तीफे के वह सदन में किसी बिल या मुद्दे पर चर्चा नहीं होने देगी और केन्द्र सरकार सिरे से यह खारिज कर रही है कि वह अपने किसी मंत्री का इस्तीफा नहीं लेगी। इसी मुद्दे पर दोनों सदनों में गतिरोध बना हुआ है।

sanjay sharma editor5संसद का गतिरोध टूट नहीं रहा है। मानसून सत्र शुरू होने के बाद से एक दिन भी संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल पाई। रोज-रोज कांग्रेस सांसदों द्वारा संसद में हंगामे से आजिज आकर आखिर लोकसभा स्पीकर ने 25 कांगे्रसी सांसदों को 5 दिन के लिए निलंबित कर दिया। लोकसभा संचालन के नियम 364 (ए) के तहत यह कार्रवाई हुई। इन सांसदों पर संसद की कार्यवाही में बाधा डालने का आरोप था। इस निलंबन के कारण कांग्रेस के 25 सांसद लोकसभा की कार्यवाही में शामिल नहीं हो सकेंगे। इससे सदन में कांग्रेस सांसदों की संख्या घटकर 19 रह गई है।

अपने सांसदों के निलंबन पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इसे लोकतंत्र के लिए काला दिन बताया। अब सांसदों के निलंबन के विरोध में कांग्रेस सांसद संसद का बहिष्कार करेंगे। टीएमसी भी इसमें शामिल होगी। इस कार्रवाई का अन्य राजनैतिक पार्टियों ने भी विरोध किया है। स्पीकर के लगातार ऐतराज के बावजूद कांग्रेस सांसद सदन में काली पट्टïी बांधकर और हाथों में पोस्टर लेकर आ रहे हैं। फिलहाल इस कार्रवाई के बाद सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। इस कार्रवाई के बाद भी संसद का गतिरोध टूटने वाला नहीं है। जब से मानसून सत्र शुरू हुआ है तब से कांग्रेस ललित मोदी और व्यापमं मुद्दे पर इस्तीफे की मांग कर रही है। कांग्रेस लगातार संसद में आक्रामक रुख अपनाए हुए है।

कांग्रेस अपनी जिद पर अड़ी हुई है कि बिना इस्तीफे के वह सदन में किसी बिल या मुद्दे पर चर्चा नहीं होने देगी और केन्द्र सरकार सिरे से यह खारिज कर रही है कि वह अपने किसी मंत्री का इस्तीफा नहीं लेगी। इसी मुद्दे पर दोनों सदनों में गतिरोध बना हुआ है। संसद की कार्यवाही के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च हो चुके हैं पर अभी तक कोई सार्थक परिणाम नहीं निकला है। बीजेपी बजाय रक्षात्मक होने के आक्रामक हो रही है। यह सत्र 13 अगस्त तक के लिए है। अगले 5 दिन तो गतिरोध तय है। बाकी बचे दिनों में कुछ उम्मीद बचेगी नहीं।

इस सत्र में कई महत्वपूर्ण बिलों पर चर्चा होनी थी। 30 विधेयक पास होने थे जिसमें वस्तु एवं सेवाकर विधेयक, श्रम सुधार व भूमि अधिग्रहण सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। कितने महत्वपूर्ण बिल हंगामे की भेंट चढ़ गए। कांग्रेस राष्टï्रीय स्तर पर प्रासंगिक बने रहने के लिए जनता के हित को नजरअंदाज कर रही है। मीडिया में कांग्रेस की उपस्थिति दर्ज होगी पर संसदीय काम का धक्का पहुंचाने का आरोप लगेगा, खासतौर से ऐसे मौके पर जब अर्थव्यवस्था गति पकड़ रही है।

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