कब तक गुमराह होती रहेगी जनता

“दरअसल लंबे समय से यह राजनेता इसी तरह खेल खेलते रहे हैं। जब-जब चुनाव पास आता है, तब-तब राजनेता अपनी इन्हीं घिनौनी चालों में वयस्त हो जाते हैं। वह जानते हैं कि चुनाव के समय जनता सवाल करेगी कि अब तक उनके लिए क्या किया? लोग घोषणा पत्र की भी याद दिलायेंगे। क्षेत्र में विकास की बात करेंगे। बिजली, पानी और अस्पताल में डॉक्टर और दवा की कमी के बारे पूछेंगे।”

sanjay sharma editor5यूपी में चुनाव नजदीक हैं। अभी कुछ दिन पहले ही मैं पढ़ रहा था कि विहिप के एक जिम्मेदार पदाधिकारी ने कहा कि अब हमको राम मंदिर बनाने से कोई नहीं रोक सकता। गाय के बाद अब राम मंदिर दांव पर है। यह कोई पहली बार नहीं है। जब-जब चुनाव पास आते हैं, तब-तब राम मंदिर और गौ माता लोगों को याद आने लगती हैं। किसी एक पक्ष को नहीं बल्कि खुद को धर्म-निरपेक्ष कहने वालों और सांप्रदायिकता का आरोप झेल रहे लोगों को भी। मैं सोचता रहा कि क्या देश का आम-आदमी अभी भी इतना सीधा है, जो इन नेताओं की कारगुजारी नहीं समझ पाता या उसे वक्त का इंतजार है, जो अब इन नेताओं को बता सकें कि तुम्हारे इस तरह के हथकंडों के जाल में अब नहीं आने वाले हैं।
दरअसल लंबे समय से यह राजनेता इसी तरह खेल खेलते रहे हैं। जब-जब चुनाव पास आता है, तब-तब राजनेता अपनी इन्हीं घिनौनी चालों में वयस्त हो जाते हैं। वह जानते हैं कि चुनाव के समय जनता सवाल करेगी कि अब तक उनके लिए क्या किया? लोग घोषणा पत्र की भी याद दिलायेंगे। क्षेत्र में विकास की बात करेंगे। बिजली, पानी और अस्पताल में डॉक्टर और दवा की कमी के बारे पूछेंगे। इन सबसे बचने का एक मात्र यही उपाय है कि लोगों का ध्यान इन बुनियादी मुद्ïदों से हटा दिया जाये।
हमारे देश में धर्म अफीम के नशे की तरह काम करता है। लोगों की भावनायें जब एक बार भडक़ा दी जाती हैं, तो उन्हें कुछ और याद नहीं रहता। अयोध्या में यह प्रयोग एक बार हो चुका है। उसकी वजह से पूरी दुनिया के सामने देश को शर्मिंदगी उठानी पड़ी थी। लेकिन मंदिर का निर्माण अब तक नहीं हुआ। इन सबके बावजूद चुनाव नजदीक होने की वजह से राजनेता बड़ी सफाई के साथ धर्म का कार्ड खेलने में जुट गये हैं। कहीं गाय तो कहीं मंदिर-मस्जिद के नाम पर भावनायें भडक़ाने की तैयारी चल रही है। सब कोशिश में जुटे है कि उनका धर्म का कार्ड इन चुनावों में चल जाये।
दरअसल गलती हमारी और आपकी दोनों की है। हम सब कुछ जानकार भी नेताओं की गलत हरकतों का विरोध नहीं कर पाते, इसलिए इन नेताओं के हौसले बढ़ जाते हैं। समाज के जागरूक लोग अगर अपने-अपने स्तर से इन राजनेताओं की कारगुजारियों का खुलासा करें, उनका विरोध करें तो इन लोगों के हौसले पस्त होंगे। यूपी में वोटर नेताओं को साफ-साफ संदेश दें कि उन्हें धर्म की नहीं बल्कि विकास की बात करनी है। जो विकास की बात करेंगा और उसे हकीकत में बदलेगा,उसी को सत्ता हासिल होगी।

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