कदम-कदम पर मौत का खतरा

आजकल पेट्स को पालना फैशन का रूप लेता जा रहा है। खुद को पेट्स लवर्स साबित करने के चक्कर में लोग हजारों और लाखों रुपये खर्च करके पपी, जर्मन शेफर्ड, बुल्डॉग और अन्य कई मशहूर प्रजातियों के डॉगी पालते हैं। इन पर हजारों और लाखों रुपये महीने खर्च किए जाते हैं। इन पेट्स को कुछ लोग शौकिया पालते हैं तो कुछ लोग सुरक्षा की दृष्टि से पालते हैं। आपके और हमारे आस-पास रहने वाले बहुत से लोग ऐसे हैं, जिनके घरों में खतरनाक ब्रीड के पालतू डॉगी हैं।

sanjay sharma editor5रात के सन्नाटे में आप कहीं जा रहे हों और अचानक से कुत्ते के भौंकने की आवाज आये। आप कुछ समझें, इसके पहले ही वह आप पर हमला बोल दे। आप को बुरी तरह नोच डाले। आप खुद को जिन्दगी और मौत के बिल्कुल करीब महसूस करने लगें। जी हां, बिल्कुल ऐसा ही कुछ केरल में एक बुजुर्ग महिला के साथ हुआ। वह सडक़ों पर घूमने वाले कुछ आवारा कुत्तों का शिकार बन गई। दर्जन भर कुत्तों ने महिला को बुरी तरह नोच डाला और उसकी मौत हो गई। इस घटना को सुनकर अनायास ही मन मष्तिष्क में सडक़ों पर घूमने वाले आवारा कुत्तों का झुंड नजर आने लगा। ऐसा महसूस हुआ कि वाकई आवारा कुत्तों का खतरा बड़ा है। इससे बचने और निपटने की जरूरत है।
केरल की घटना न सिर्फ केरल बल्कि देश के अन्य सभी हिस्सों में रहने वाले लोगों के अंदर भी डर पैदा कर दिया है। इसकी सबसे बड़ी वजह घरों में पाले जाने वाले खतरनाक डॉगी और गली मोहल्लों में घूमने वाले आवारा कुत्ते हैं। जो दिन हो रात राह चलते लोगों को अपना शिकार बनाते ही रहते हैं लेकिन केरल की घटना ने हम सबको सोचने पर मजबूर किया है। आजकल पेट्स को पालना फैशन का रूप लेता जा रहा है। खुद को पेट्स लवर्स साबित करने के चक्कर में लोग हजारों और लाखों रुपये खर्च करके पपी, जर्मन शेफर्ड, बुल्डॉग और अन्य कई मशहूर प्रजातियों के डॉगी पालते हैं। इन पर हजारों और लाखों रुपये महीने खर्च किए जाते हैं। इन पेट्स को कुछ लोग शौकिया पालते हैं तो कुछ लोग सुरक्षा की दृष्टि से पालते हैं। आपके और हमारे आस-पास रहने वाले बहुत से लोग ऐसे हैं, जिनके घरों में खतरनाक ब्रीड के पालतू डॉगी हैं। ये बहुत से बेकसूर लोगों को अपना शिकार बना चुके हैं। वहीं शहरों और गांवों में घूमने वाले आवारा कुत्ते भी कम खतरनाक नहीं होते हैं। रात के समय में कोई भी अंजान व्यक्ति गुजरता है, तो गली में आवारा घूमने वाले कुत्तों का झुंड उन पर भौंकना शुरू कर देता है। कार और बाइक से गुजरने वाले लोगों को भी आवारा कुत्ते अपना शिकार बनाने की कोशिश करते हैं। ऐसे लोगों का काफी दूर तक पीछा करते हुए कुत्तों को देखा जा सकता है।
फिलहाल तो नगर निगम के कैटिल कैचिंग विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजिमी है। यदि नगर निगम का कैटिल कैचिंग विभाग आवारा कुत्तों और अन्य जानवरों को पकड़ेगा तो सरकारी कार्यालयों और सडक़ों पर आवारा जानवरों का दिखना बंद हो जायेगा। इससे लोगों को कुत्तों का शिकार बनने का खतरा भी कम हो जायेगा।

Pin It