कड़े आदेश के बावजूद एलडीए को ठेंगा दिखा रहे हैं शहर के अवैध निर्माण

  • गली-मोहल्लों में बिना मानचित्र के बन रहे ग्रुप हाउसिंग
  • मानकों को दरकिनार कर घरों में लगाये जा रहे टॉवर
  • बस कागजों पर जारी है आदेश का खेल

अंकुश जायसवाल

captureलखनऊ। अवैध निर्माणों को लेकर लखनऊ विकास प्राधिकरण संजीदा नहीं है। गली-मोहल्लों में बिना मानचित्र के गु्रप हाउसिंग बन रहे हैं। अवैध निर्माण के विरुद्ध शिकायत करने के बाद भी एलडीए कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। हाल यह है कि विहित प्राधिकारी ने अवैध निर्माणों को गिराने के भी आदेश जारी कर दिए हैं लेकिन छह महीने से कार्रवाई फाइलों में बंद है। छह महीने पहले एलडीए के विहित प्राधिकारी ने 29 मामलों में अवैध निर्माणों व अवैध रूप से लगाए गए मोबाइल टॉवर को हटाने के आदेश दिए थे। इनमें से एक भी कार्रवाई अभी तक नहीं की गई है।
केस-1
गोमती नगर विस्तार में कथित किसान नेता तारा सिंह बिष्ट ने अवैध निर्माण कराया है। हाल ही में शिकायत पर एलडीए के प्रवर्तन विभाग ने इसे सील कर दिया। लेकिन अगले ही दिन बिष्ट ने सीलिंग हटाकर काम शुरू करा दिया। यह शिकायत मार्च 2015 में की गई थी। इस पर तारा सिंह बिष्ट को नोटिस जारी की गई। स्थल पर बिना मानचित्र निर्माण करता हुआ पाया गया। यहां दुकान के आगे लगे टीन शेड को हटाकर लगभग 10 गुणा 20 फुट पर स्लैब निर्माण शुरू कराया गया था। बिना मानचित्र के निर्माण होने के बाद भी कार्य नहीं रूकवाया गया। इससे इस समय स्लैब बनकर तैयार है। इस पर उसे गिराने का आदेश विहित प्राधिकारी अधीक्षण अभियंता दुर्गेश श्रीवास्तव ने जारी किया है। सुनवाई के दौरान बिष्ट की ओर से कोई जवाब व साक्ष्य न देने पर शिकायतकर्ता के सभी आरोप सही साबित हुए। इस मामले की सुनवाई करते हुए विहित प्राधिकारी राजीव कुमार ने अनाधिकृत निर्माण को गिराने का आदेश जारी कर दिया। अवैध निर्माणकर्ता को खुद से अनाधिकृत निर्माण को नोटिस प्राप्ति के 25 दिनों के अंदर स्वयं गिराने के आदेश हुए। मई में हुआ यह आदेश अभी तक फाइलों में बंद था। छह महीने बाद नोटिस देने की सुध आई जबकि अभी तक अवैध निर्माण को गिरा देना चाहिए था।
केस-2
बिना स्वीकृति तैयार हो रही गु्रप हाउसिंग नटवर गोयल का सुल्तानपुर रोड स्थित अहिमामऊ के चढ़ाईपुरवा में 27,000 वर्गफुट क्षेत्रफल पर गु्रप हाउसिंग का निर्माण हो रहा है। इसके लिए एलडीए से किसी प्रकार का मानचित्र स्वीकृत नहीं कराया गया है। गु्रप हाउसिंग के निर्माण के लिए बेसमेंट की खुदाई के दौरान शिकायत की गई थी। इस मार्च 2015 में शिकायत के बाद नोटिस जारी की गई। विहित न्यायालय में सुनवाई के दौरान न तो उपस्थित हुए और न ही कोई जवाब दाखिल किया। इस पर विहित प्राधिकारी राजीव कुमार ने अनाधिकृत निर्माण को गिराने के आदेश दिए थे। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई और निर्माण कार्य जारी है। इस पर कार्रवाई करने की बजाए प्रवर्तन विभाग का तर्क है कि जिला पंचायत से नक्शा पास कराने की कार्रवाई चल रही है।
केस-3
इसी प्रकार विकल्प खंड में मीना अग्रवाल ने दो भूखंडों को मिलाकर लगभग 6400 वर्गफुट क्षेत्रफल में पांच मंजिला भवन का निर्माण कराया है। मानचित्र स्वीकृत न होने पर कारण बताओ नोटिस भी जारी की गई। इसे भी गिराने के विहित प्राधिकारी दुर्गेश श्रीवास्तव ने आदेश जारी किया था।

मानकों के विपरीत लगाए गए टॉवर

खदरा स्थित दीनदयाल नगर में मंशा राम मंदिर के पास राखी गुप्ता पर आरोप है कि लगभग 1500 वर्गफुट के क्षेत्रफल पर भूतल एवं प्रथम तल का आवासीय भवन का निर्माण कर उसके ऊपर मोबाइल टॉवर लगाया गया। इससे भवन के सटे मकान में दरारें आ गईं। टावर लगाने के लिए कोई एनओसी व स्वीकृती नहीं ली गई है। जून में अधीक्षण अभियंता व विहित प्राधिकारी ने टावर को हटाने का आदेश जारी किया। 25 दिन में कार्रवाई होनी थी लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ है। वहीं, सीतापुर रोड, कमलाबाद भिठौली में अलका पांडेय ने अपने भूखंड पर बीटीएस टावर लगाने के लिए फाउंडेशन का निर्माण किया। इसकी शिकायत 2015 में की गई। निर्माण कार्य के लिए कोई स्वीकृत मानचित्र व अनुमति नहीं ली गई। इस पर हटाने के आदेश हुए। इंद्रपुरी कालोनी में प्रदीप कुमार वर्मा ने भवन पर मोबाइल टावर लगवाया है। रिलायंस कंपनी के लगाए गए टावर के दौरान भवन निर्माण मानकों का उल्लंघन किया गया। नौ मीटर से कम चौड़ी सडक़ पर भवन पर टावर लगा दिया गया जबकि कोई सेट बैक भी नहीं छोड़ा गया है। इसकी शिकायत 2014 में की गई थी। जून 2016 में विहित प्राधिकारी ने इसे हटाने के आदेश दिए थे।

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