…और ’राम‘ ने वनवास जाने से मना कर दिया

समाजवादी कुनबे के सत्ता संग्राम में दशरथ की भूमिका में दिख रहे मुलायम
सपा की रामायण में कैकेयी की भरमार, नहीं दिखा भरत सा भाई
राजनीतिक समझ और दूरदर्शिता से अखिलेश तोड़ सके तमाम कुचक्रों को
अपनी अलग विरासत तैयार कर सकते हैं मुख्यमंत्री अखिलेश

t1प्रीति सिंह
लखनऊ। रामायण, राम वनवास और वनवास की पटकथा तैयार करने वाली कैकेयी। ये वे पात्र हैं जिनसे हर कोई परिचित है। त्रेतायुग में राजसिंहासन को लेकर कैकेयी ने कैसी-कैसी चालें चलीं इसका उल्लेख रामायण में किया गया है और अब कलियुग में सत्ता के लिए ऐसी ही पटकथा तैयार है। राम भी हैं, दशरथ भी और वनवास भेजने वाली कैकेयी भी। बस अंतर इतना है कि राम ने वनवास जाने से मना कर दिया है। समाजवादी कुनबे में छिड़े महासंग्राम का ताना-बाना भी सत्ता के लिए ही है। दशरथ की भूमिका में सपा मुखिया मुलायम है तो राम की भूमिका में मुख्यमंत्री अखिलेश। मुलायम सिंह की बेबसी दशरथ से कम नहीं है। यह जानते हुए कि उनकी विरासत के लिए अखिलेश से बेहतर अन्य कोई विकल्प नहीं है, वह भी दशरथ की तरह परिस्थितियों से मजबूर होकर बेटे को वनवास का फरमान सुना चुके हैं। लेकिन अखिलेश राम की तरह वनवास जाने को तैयार नहीं हैं। इस बार परिस्थितियां थोड़ी भिन्न हैं। अखिलेश कैकेयी के मंतव्य को समझ रहे हैं और यह भी जानते हैं कि उनका भाई ‘भरत’ जैसा बिल्कुल नहीं है।
ïइतिहास गवाह है कि राजा की विरासत हमेशा से उसके ज्येष्ठï पुत्र को मिली है। सपा मुखिया मुलायम सिंह भी पांच साल पहले यूपी की सत्ता अखिलेश को सौंपकर उस परंपरा का निर्वहन कर चुके हैं। सब कुछ सही चल रहा था लेकिन घर-परिवार में उपजी विपरीत परिस्थितियों ने मुलायम सिंह यादव को दशरथ बनने पर मजबूर कर दिया। कैकेयी ने दशरथ से अपने बेटे भरत के लिए राजगद्दी और राम के लिए वनवास मांगा था। मुलायम के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ। जिस बेटे को बड़े ही अरमान के साथ उत्तर प्रदेश की सत्ता सौंपी और उसे राजनीति का मझा हुआ खिलाड़ी बनाया उसे ही वे सत्ता से दूर करने में लग गए। हालांकि वे जब भी अखिलेश के विरोध में खड़े हुए उनकी पीड़ा साफ दिखी। अखिलेश ने जब भी उनकी बात नहीं मानी उन्होंने इसके लिए अखिलेश को कभी भी दोषी नहीं माना। हर बार उन्होंने रामगोपाल पर अखिलेश को बरगलाने का आरोप लगाया। अखिलेश भी पिता की मजबूरी समझ रहे हैं शायद इसीलिए हर बार एक ही बात कह रहे हैं कि आप मेरे पिता हैं। आपके लिए जान भी हाजिर है। लेकिन आपकी ये बात नहीं मानंूगा। अखिलेश के रामायण में पिता की मजबूरी साफ दिख रही है। लेकिन अखिलेश मजबूर नहीं हैं। वह जानते हैं कि उनके पिता से फायदा उठाने की कोशिश की जा रही है। जिसके लिए उन्हें अलग किया जा रहा है वे लोग उस विरासत के लिए न तो परिपक्व हैं और न ही उसमें गुण हैं। शायद इसलिए अखिलेश पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। शुरू में मुलायम ने बड़े ही सूझबूझ के साथ मामले को सुलझाने की कोशिश की लेकिन हालात नहीं संभाल पाए। यदि अखिलेश उनकी बात मान लेते तो आज परिवार की लड़ाई चुनाव आयोग की चौखट तक न पहुंचती। आज अखिलेश राजनीति के मझे हुए खिलाड़ी हंै। वह सारे दांव-पेच समझ रहे हैं कि किस तरह उनको दरकिनार करने की साजिश की गई है। उनको फंसाने के लिए जिस चक्रव्यूह की रचना की गई थी, यदि उसे वह तोड़ पाए तो अपनी परिपक्वता की वजह से ही। अब जब अखिलेश खुलकर सामने हैं तो देखना होगा कि राम की तरह उनकी ताजपोशी होती है या वह अपनी अलग विरासत तैयार करने की राह पर चलते हैं।

भाजपा ने जारी की पहली सूची पंजाब में 17 और गोवा में 29 नामों का किया ऐलान

उत्तर प्रदेश में उम्मीदवारों के नाम तय करने के लिए 15 को होगी बैठक
अमृतसर लोकसभा सीट से राजेंद्र मोहन चीना होंगे उम्मीदवार

लखनऊ। पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा ने अपनी तैयारियां तेज कर दी है। इसी कड़ी में भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने पंजाब और गोवा विधानसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। वहीं भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के उम्मीदवारों के नाम तय करने के लिए 15 जनवरी को बैठक कर सकती है।
भाजपा नेता जेपी नड्डा ने पंजाब की पहली लिस्ट में 17 और गोवा लिए 29 नामों का ऐलान किया है। इसके साथ पंजाब की अमृतसर लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए उम्मीदवार की घोषणा भी कर दी है। राजेंद्र मोहन चीना इस सीट से पार्टी उम्मीदवार होंगे। कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे से यह सीट खाली हुई थी। भाजपा पंजाब में 23 सीटों पर चुनाव लड़ेगी शेष सीटों पर सहयोगी अकाली दल अपने उम्मीदवार उतारेगी। दोनों राज्यों में चार फरवरी को एक चरण में चुनाव होने हैं। मतगणना 11 को होगी।

दुविधा में पार्टी
पंजाब के लिए घोषित 17 नामों में से 6 वर्तमान विधायक हैं। दो उम्मीदवार 75 साल से ऊपर आयु के हैं। पार्टी उन्हें टिकट देने के मूड में नहीं है। राजेंद्र कालिया और अनिल जोशी पार्टी के सीनियर एमएलए हैं उनकी टिकट को लेकर भी फैसला लंबित है। पार्टी इन नामों को लेकर दुविधा में हैं।

अरुण पाठक उन्नाव से एमएलसी प्रत्याशी
भाजपा ने तीन एमएलसी प्रत्याशियो के नामों का भी ऐलान कर दिया है। अरुण पाठक उन्नाव से एमएलसी प्रत्याशी बनाए गए हैं। वहीं जयपाल सिंह को बरेली और देवेन्द्र प्रताप सिंह को गोरखपुर से प्रत्याशी बनाया गया है।

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