और नहीं चलेगी प्राइवेट स्कूलों की मनमानी

बच्चों के भविष्य को लेकर एनजीओ जुलाई में जारी करेगा टोल फ्री नम्बर, अभिभावक कर सकेंगे शिकायत

Captureभय के कारण अभिभावक स्कूलों के खिलाफ नहीं उठा पाते कोई कदम, स्कूल करते रहते हैं मनमानी
 हिना खान
लखनऊ। प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर किसी का जोर नहीं है। राजधानी में ऐसे स्कूल हैं जो अपनी मनमानी की वजह से चर्चा में रहते हैं। कभी अपने नियमों को लेकर तो कभी किसी छात्र को पीटने को लेकर, और अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य की वजह से स्कूल के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठा पाते। इस समस्या से निपटने के लिए एक एनजीओ ने पहल की है। जुलाई माह में एक टोल फ्री नंबर जारी किया जायेगा जिस पर अभिभावक अपनी समस्या बता सकेंगे।
प्राइवेट स्कूलों की मनमानी के खिलाफ न अभिभावक बोलने की हिम्मत करते हैं न ही जल्दी प्रशासन। ऐसे में अनुशासन के नाम पर प्राइवेट स्कूलों में बच्चों के साथ कई बार गलत व्यवहार हो जाता है और स्कूल मानने को तैयार नहीं होता। इस समस्या को देखते हुए एल्डिको ग्रीन सिटी में भारती अभ्युदय फाउण्डेशन ने एक कमेटी का गठन किया है जिसमें जुलाई माह में एक टोल फ्री नम्बर जारी किया जाएगा। इस नंबर पर अभिभावक स्कूलों के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकेंगे। कमेटी के सदस्य पहले स्कूल में खुद जाकर बात करेंगे। यदि स्कूल मान गया तो ठीक नहीं तो इन शिकायतों को शिक्षा विभाग के अफसरों के पास भेजेंगे। राजधानी में पिछले सत्र के दौरान कुछ स्कूलों द्वारा छात्रों के साथ मनमानी की गई जिस पर हो हल्ला मचा फिर भी स्कूलों की मनमानी बदस्तूर जारी है।

मनमानी चरम पर

इस संबंध में भारती अभ्युदय फाउण्डेशन की सदस्य शमीना बानो कहती हैं कि प्राइवेट स्कूलों की मनमानी चरम पर है। हमारी कोशिश रहेगी कि अभिभावकों की समस्या का निस्तारण हो। किसी बच्चे को स्कूल के नियम-कानून के नाम पर मानसिक आघात नहीं पंहुचाया जा सकता।

प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर एक नजर

केस नम्बर -1
सेंट फ्रांसिस कॉलेज के सातवीं कक्षा के छात्र देव कुमार मिश्रा को फेल कर अगली कक्षा में जाने से रोका गया है। अभिभावकों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका दायर की। यह स्कूल अनिवार्य शिक्षा अधिनियम 2009 की धारा 16 को भी नजरंदाज कर रहा है। इस धारा में यह साफ-साफ दिया गया है कि आठवीं कक्षा तक किसी भी छात्र को फेल कर अगली कक्षा में जाने से नहीं रोका जायेगा, लेकिन स्कूल को किसी नियम की नहीं पड़ी है।
केस नम्बर-2
शहर के जाने माने स्कूल सीएमएस ने 31 गरीब बच्चों के भविष्य को अधर में लटका रखा है। आरटीई के तहत इन गरीब बच्चों को सीएमएस को अपने स्कूल में प्रवेश देना था। पहले तो यह स्कूल तैयार हो गया। इन छात्रों की आवेदन की प्रक्रिया भी पूरी हो गयी लेकिन जब प्रवेश देने का समय आया तो यह अपनी बात से मुकर गया। साथ ही कोई इस पर दबाव न बना सके इसलिए सीएमएस ने इस मामले को कोर्ट में अटका दिया है।
केस नम्बर-3
ला-मार्टिनियर में कक्षा 9 में पढऩे वाला राहुल 10 अप्रैल को स्कूल में मृत पाया गया। कॉलेज प्रशासन ने राहुल के पिता वी. श्रीधरन और मां अनम्मा को बताया था कि राहुल 10 अप्रैल को असेम्बली में नहीं आया था। स्कूल ने इसे आत्महत्या बताया है पर राहुल के मां-बाप मानने को तैयार नहीं है।
केस नम्बर-4
लामार्ट कॉलेज मे छठवीं के छात्र को अध्यापक ने बाल न कटवाने पर बुरी तरह पीटा था। इतना ही नहीं छात्र को धमकी भी दिया कि घरवालों को बताओगे तो स्कूल से निकाल दिया जाएगा। छात्र ने अपने घरवालों को इस बारे में बताया तो घरवालों ने मुख्यमंत्री से इसकी शिकायत की लेकिन उसका भी कुछ असर नही दिखा। यहां तक की महाराणा प्रताप जयंती पर सीएम के आदेश के बाद भी स्कूल खोला गया।
केस नम्बर -5
सेंट जोसेफ की ठाकुरगंज की ब्रांच ने स्कूल के पहले दिन एक छात्रा को केवल इसलिए कई घंटे स्कूल के बाहर बैठाया कि उसने स्कार्फ पहना हुआ था। दूसरे दिन जब वह छात्रा स्कूल गयी तो उसे वापस घर भेज दिया। परिवार वालों ने जब स्कूल से इस विषय में सवाल किया तो स्कूल के जिम्मेदारों का कहना था कि स्कार्फ लगा कर स्कूल में आने की इजाजत नहीं है। इसका परिवार वालों के साथ अन्य ऐसे अभिभावकों ने भी विरोध किया। इस प्रकरण में यूपी राज्य बाल अधिकार आयोग ने दौरा किया और कार्रवाई पर भी जोर दिया।

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