और घातक हुआ दिमागी बुखार व डेंगू, पांच की मौत

 Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। दिमागी बुखार से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। दिमागी बुखार और डेंगू के चपेट में आकर मौतों का सिलसिला बदस्तूर जारी है। रविवार को दिमागी बुखार से तीन और डेंगू से दो की मौत हो गई। राजधानी में अब तक दिमागी बुखार से 27 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा सिविल, लोहिया, बलरामपुर व केजीएमयू में दिमागी बुखार और डेंगू के कई मरीज भर्ती हैं।
रविवार को सिविल अस्पताल में भर्ती लखनऊ के सुमित (6) ने दिमागी बुखार की चपेट में आकर दम तोड़ दिया। परिजनों का कहना है कि उसे दो दिनों से तेज बुखार था, जिसका इलाज निजी अस्पताल में चल रहा था। अचानक तबियत ज्यादा खराब होने पर शनिवार को सुबह करीब नौ बजे सिविल अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने देर रात मृत घोषित कर दिया। इलाज कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि मरीज की हालत जब ज्यादा गंभीर हो जाती है तब परिवारीजन मरीज को लेकर अस्पताल आते हैं, ऐसे में मरीज को बचा पाना कठिन होता है। वहीं बलरामपुर अस्पताल में दिमागी बुखार से इटौंजा की रहने वाली रचना (8) व शिवम (2) की मौत हो गई। उसे कुछ दिन से तेज बुाार था। इसके अलावा सहारा हॉस्पिटल में डेंगू से विकासनगर निवासी दुर्गेश (25) की मौत हो गई। दुर्गेश के पिता रामेन्द्र सिंह ने बताया कि उसे कई दिनों से बुखार था। हालत गंभीर होने पर बीते शुक्रवार को सहारा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। सीएचसी गोसाईगंज में मस्तराम (16) ने डेंगू बुखार के कारण दम तोड़ दिया। इसके अलावा बलरामपुर अस्पताल में सात लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई है।
डेंगू से बचाव के उपाय
बलरामपुर अस्पताल के आयुर्वेद के डॉ. निरंजन ने बताया कि अनार जूस, पपीते के पत्तों का रस, गिलोय/अमृता/अमरबेल सत्व अनार जूस नया खून बनाने तथा रोगी की रोग से लडऩे की शक्ति प्रदान करने के लिए है। अनार जूस आसानी से उपलब्ध है। रोगी को सेब का रस भी दिया जा सकता है। पपीते के पत्तों का रस सबसे महत्वपूर्ण है। पपीते का पेड़ आसानी से मिल जाता है, उसकी ताजी पत्तियों का रस निकाल कर मरीज को दिन में 2 से 3 बार दें। एक दिन की खुराक के बाद ही प्लेटलेट की संख्या बढऩे लगेगी। गिलोय की बेल का सत्व मरीज को दिन में 2-3 बार दें, इससे खून में प्लेटलेट की संख्या बढ़ती है। यदि बुखार एक दिन से ज्यादा रहे तो खून की जांच अवश्य करवा लें। यदि रोगी बार-बार उलटी करे तो सेब के रस में थोडा नींबू मिला कर रोगी को दें, उल्टियां बंद हो जाएंगी। रोगी को अंग्रेजी दवाइयां दी जा रही हैं तब भी यह चीजें रोगी को बिना किसी डर के दी जा सकती हैं।

डेंगू को लेकर डॉक्टरों के पक्ष में खड़ा आईएमए

लखनऊ। डेंगू को लेकर सरकारी और निजी अस्पतालों के डॉक्टरों की लापरवाही की खबरों के बीच इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की लखनऊ शाखा अब इन डॉक्टरों के पक्ष में खड़ा हो गया है।
आईएमए का कहना है कि वर्तमान समय में डेंगू भयंकर रूप से फैला हुआ है, इसके जिम्मेदार डॉक्टर नहीं है। डॉक्टर तो इन विकराल परिस्थितियों में मरीजों का इलाज करके सरकार की मदद कर रहे हैं। आईएमए लखनऊ शाखा की अध्यक्ष डॉ. रुकसाना खान का कहना है कि इस समय डेंगू के इलाज में लापरवाही के बहुत मामले सामने आ रहे हैं, जिसमे डॉक्टरों पर बिना वजह लापरवाही के आरोप लगाए जा रहे हैं। इससे न केवल डॉक्टरों का मनोबल कम हो रहा है बल्कि चिकित्सा क्षेत्र के भविष्य को भी क्षति पहुँच रही है। आईएमए के सेक्रेटरी डॉ . विश्वजीत सिंह ने बताया कि डेंगू की बीमारी हर वर्ष मच्छरों के काटने से इन्ही महीनों में अपना प्रकोप दिखाती है। इस समय अधिकांश अस्पताल अपनी क्षमता से अधिक कार्य करके मरीजों की जान बचा रहे हैं। इतनी मेहनत के बावजूद सरकार की ओर अपनी कमियों को छुपाते हुए डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया जा रहा है।

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