ऑपरेशन प्रशांत किशोर शुरू, निर्मल खत्री का इस्तीफा, जितिन हो सकते हैं अगले अध्यक्ष

  • सोनिया ने निर्मल खत्री का इस्तीफा किया स्वीकार
  • यूपी में ब्राह्मण चेहरे को प्रदेश अध्यक्ष बनाने को लेकर 10 जनपथ में चल रही बैठक
  • राजेश मिश्रा, प्रमोद तिवारी और जितिन प्रसाद ने नाम पर हो रही चर्चा

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

Captureलखनऊ। प्रशांत किशोर की रणनीतियों का कांग्रेस पार्टी पर असर दिखने लगा है। पार्टी हाईकमान यूपी में अपनी साख बचाने के लिए पीके ही हर शर्त मानने को तैयार दिख रही है। इसीलिए आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर ब्राह्मण चेहरे को प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपने और निर्मल खत्री से इस्तीफा मांगने का निर्णय लिया गया। पार्टी हाईकमान ने खत्री का इस्तीफा भी मंजूर कर लिया है। उनकी जगह किसे प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाएगा, इसको लेकर दिल्ली स्थित 10 जनपथ में मंथन चल रहा है। उम्मीद की जा रही है कि बहुत जल्द प्रदेश अध्यक्ष का नाम घोषित कर दिया जायेगा।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष निर्मल खत्री ने सोमवार को अपना इस्तीफा सोनिया गांधी को भेज दिया। उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। इसके अलावा प्रदेश में नये प्रदेश अध्यक्ष को लेकर 10 जनपथ में सोनिया और राहुल की मौजूदगी में मंथन चल रहा है। इसमें वाराणसी से पूर्व सांसद राजेश मिश्रा, प्रतापगढ़ से प्रमोद तिवारी और शाहजहांपुर से जितिन प्रसाद के नामों पर चर्चा की जा रही है। ऐसा माना जा रहा है कि प्रशांत किशोर की तरफ से सोनिया और राहुल के सामने प्रस्तुत रिपोर्ट और उसके बाद प्रदेश प्रभारी गुलाम नबी आजाद की रिपोर्ट को गंभीरता से लेकर पार्टी हाईकमान ने प्रदेश अध्यक्ष बदलने का निर्णय लिया है। चूंकि लखनऊ में प्रशांत किशोर की कार्यकर्ताओं के साथ होने वाली बैठकों में जिलाधाध्यक्षों, महानगर अध्यक्षों, ब्लाक अध्यक्षों और पार्टी कार्यकर्ताओं की तरफ से लगातार मधुसूदन मिस्त्री और निर्मल खत्री को हटाने की मांग की जाती रही है। इसके साथ ही दोनों नेताओं पर काम करने वालों की बजाय चाटुकारों को तरजीह देने और जमीनी स्तर पर काम करने की बजाय केवल मीडिया में हाईलाइट होने वाले मौकों पर उपस्थित रहने का आरोप लगाया गया था। इनकी निष्क्रियता को पार्टी की बदहाली के लिए जिम्मेदार बताया गया था। इसी वजह से पार्टी हाईकमान ने सबसे पहले मधुसूदन मिस्त्री को प्रदेश प्रभारी के पद से हटाया और उनकी जगह गुलाम नबी आजाद को प्रभारी बनाया गया। ऐसा करके संगठन में बड़े बदलाव का संकेत बहुत पहले दे दिया था लेकिन पार्टी को आंतरिक नुकसान से बचाना भी जरूरी था। इसलिए लंबे अंतराल के बाद प्रदेश अध्यक्ष पद से निर्मल खत्री को हटाने का निर्णय लिया गया। इसमें गुलाम नबी आजाद की रिपोर्ट भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिसमें उन्होंने पार्टी हाईकमान से प्रदेश अध्यक्ष बदलने की मांग की थी।

ब्राह्मण चेहरे को तरजीह

यूपी में होने वाले चुनाव को जातिगत समीकरण हमेशा प्रभावित करते रहे हैं। प्रशांत किशोर ने करीब दो महीने पहले ही पार्टी हाईकमान को प्रस्तुत रिपोर्ट में कहा था कि पार्टी को आगामी विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन के लिए बड़े बदलाव करने होंगे। इसमें प्रियंका को यूपी में सीएम उम्मीदवार के रूप में प्रस्तुत करने और प्रदेश प्रभारी के अलावा प्रदेश अध्यक्ष पद पर वोट बैंक को ध्यान में रखकर बदलाव किया जाना शामिल था। ऐसे में पार्टी हाईकमान ने गुलाम नबी आजाद को प्रदेश प्रभारी बनाकर मुस्लिम वोट बैंक को साधने का काम किया है। अब सामान्य वर्ग के लोगों का वोट बैंक हासिल करने के लिए प्रदेश अध्यक्ष के रूप में ब्राह्मïण चेहरे को बिठाने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल वाराणसी से पूर्व सांसद राजेश मिश्रा, प्रमोद तिवारी और जितिन प्रसाद के बीच कड़ी टक्कर मानी जा रही है। राजेश मिश्रा वाराणसी क्षेत्र में अच्छी पकड़ रखते हैं। चूङ्क्षक वाराणसी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संसदीय क्षेत्र भी है, इसलिए वहां के नेता को पार्टी में तरजीह देकर प्रदेश के अन्य हिस्सों में ब्राह्मण और क्षत्रिय वोट बैंक का समर्थन हासिल करने की कोशिश की जायेगी। प्रमोद तिवारी पार्टी के सीनियर लीडर हैं, उनका प्रदेश की राजनीति में काफी अनुभव है। यदि उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाता है, तो आने वाले चुनाव में ब्राह्मणों को एकजुट करने में लाभ मिल सकता है। जबकि जितिन प्रसाद राहुल गांधी के काफी करीबी माने जाते हैं। राहुल हमेशा युवाओं को पार्टी में तरजीह देने की वकालत करते रहे हैं। इस बात को प्रशांत किशोर भी मानते हैं। इसलिए युवा जितिन प्रसाद को भी मौका मिल सकता है। फिलहाल पार्टी हाईकमान की बैठक में आज शाम तक प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर निर्णय हो जाने की उम्मीद है।

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