ऑपरेशन थियेटर बनाने में भी करोड़ों का गोलमाल

निर्माण निगम के एमडी आरके गोयल के काले कारनामे, पैसों के लिए दांव पर लोगों की जिंदगी

ऑपरेशन थियेटर बनवाने में किया सैकड़ों करोड़ का गोलमाल
भाजपा ने की गोयल की संपत्ति की इडी से जांच कराने की मांग

 संजय शर्मा
R1लखनऊ। हमने सपने में भी नहीं सोचा था कि राजकीय निर्माण निगम के कर्ता-धर्ता इतने भ्रष्टï हो चुके होंगे कि आम आदमी की जिंदगी से भी खिलवाड़ करने में जरा भी नहीं हिचकिचायेंगे। मगर हकीकत यही है। मुख्यमंत्री चाहते हैं कि आम आदमी के स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जायेगा। सरकार अच्छे अस्पताल और अच्छे उपकरण खरीदने में सैकड़ो करोड़ रुपये खर्च कर रही है, मगर जब निर्माण निगम के एमडी आरके गोयल ने तय ही कर लिया कि उन्हें भ्रष्टïाचार का साम्राज्य खड़ा करना है इसलिए नियम कायदे ताक पर रख दिये जाते हैं। गोरखपुर, मेरठ, इलाहाबाद तथा आगरा में मॉड्यूलर ऑपरेशन थियेटर बनाने के नाम पर भारी गोलमाल किया गया। इन ऑपरेशन थियेटरों को बनाने का काम ऐसी कंपनी को दे दिया गया, जो मानक भी पूरे नहीं करती। मामले की शिकायत लोकायुक्त के साथ-साथ राज्यपाल और मुख्यमंत्री को भी कर दी गयी है। मगर गोयल समर्थको का कहना है कि वे अपने पैसे के दम पर सब कुछ मैनेज कर लेंगे।
मुख्यमंत्री को भेजी गयी शिकायत में लिखा है कि ऑपरेशन थियेटर बनाने की महत्वपूर्ण निविदा को सिर्फ इंटरनेट पर ही जारी किया गया। समाचार पत्रों में इसका विज्ञापन नहीं दिया गया। कुछ खास फर्मों को लाभ पहुंचाने के लिए कुछ विशेष शर्तें डाल दी गयी। जिससे यह काम उन्हीं फर्मों को मिल सके, जिन्हें गोयल चाहते हैं।
इन कार्यों में 125 करोड़ रुपये की लागत आनी थी। विभाग की स्वीकृति के बाद ओटी बनाने के लिए यह पैसा निर्माण निगम को दे दिया गया। इस कार्य में होने वाली गड़बडिय़ों की शिकायतों के लिये बनी कमेटी में पीजीआई के डॉक्टरों को हटाकर जिम्मा निर्माण निगम के अधिकारियों को दे दिया गया। तत्कालीन डायरेक्टर जनरल मेडिकल एजुकेशन केके गुप्ता को भी इस साजिश में शामिल किया गया और फिर न तो अखबार में विज्ञापन दिया गया और न ही कोई ईओआई का विज्ञापन दिया गया।
भारत सरकार के नियमानुसार किसी भी लेटेस्ट टेक्नोलॉजी ऑपरेशन थियेटर की सूचना मेडिकल एजुकेशन विभाग को दी जाती है, मगर यह सूचना भी नहीं दी गयी। बताया जाता है कि इस पूरे प्रकरण में दिल्ली की एक फर्म से उसके द्वारा निर्माण किये जाने वाली ऑपरेशन थियेटर की स्पेशिफिकेशन ली गयी और उसे कार्य देने का समझौता किया गया। शिकायती पत्र में लिखा है कि यह लाइजनिंग महेश चन्द्र श्रीवास्तव द्वारा की गयी जो हेल्थ महकमें में कई बड़े अफसरों की लाइजनिंग करते रहते हैं। पत्र में लिखा है इसके बाद जो स्पेशिफिकेशन दिल्ली की फर्म ने दिये उन्हीं फर्जी ब्रांड को फाइनल कर दिया गया और यह कोशिश की गयी कोई भी ऑपरेशन थियेटर निर्माता कंपनी इसमें भाग न ले सके। डीजीएमई द्वारा जो तीन ब्रांड एप्रूव किये गये उनके बारे में बताया गया कि यह जर्मनी में निर्माण होते हैं और कंपनी के पास सभी प्रकार के हाईजिन प्रमाण पत्र, फायर प्रोटक्शन प्रमाण पत्र मौजूद हैं।
मजे की बात यह है कि यह सारा गोलमाल करते समय सरकार को बताया गया कि यह आधुनिक ऑपरेशन थियेटर बनाये जा रहे हैं और यह जर्मनी की कंपनी से ही मैन्यूफैक्चरिंग की जा रही है। हकीकीत यह है कि उक्त तीनों कंपनी के दस्तावेजों में न तो जर्मनी में निर्माण करने का प्रूफ है और न ही यह फर्में जर्मनी में ऑपरेशन थियेटर बेचने या निर्माण करने के लिए रजिस्ट्रड है। बताया जाता है कि उक्त तीनों कंपनियों का मालिक एक ही व्यक्ति है। सबसे खतरनाक बात यह है कि जर्मनी तकनीक के नाम पर उक्त कंपनियां फरीदाबाद में घटिया तरीके से ओटी का निर्माण करा रही हैं जिससे सैंकड़ों मरीजों की जान को खतरा हो सकता है। इस संबंध में पूछे जाने पर गोयल ने कहा कि वह बैठक में व्यस्त हैं बाद में फोन करना।

गोयल की हजारों करोड़ों की सम्पत्ति की इडी से हो जांच: आईपी सिंह

भाजपा प्रवक्ता आईपी सिंह ने प्रधानमंत्री को खत लिखकर निर्माण निगम के एमडी आरके गोयल की हजारों करोड़ की संपत्ति की जांच प्रवर्तन निदेशालय से किये जाने की मांग की है। खत में उन्होंने लिखा है कि श्री गोयल ने निर्माण निगम में भारी गोलमाल करके हजारों करोड़ की बेनामी संपत्ति जुटा ली है। उन्होंने कहा है कि कुछ साल पहले तक मामूली ठेकेदारों को गोयल ने सैकड़ों करोड़ का मालिक इसलिए बना दिया क्योंकि उन्होंने गोयल के साथ पार्टनरशिप कर ली थी। उन्होंने निर्माण निगम के गोयल के कार्यकाल में दिये गये ठेकों की जांच सीबीआई से भी कराने की मांग की है, क्योंकि इन ठेकों में कुछ अपराधी भी भारी फायदा ले चुके हैं। उन्होंने राज्यपाल और मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखकर कहा है कि तत्काल गोयल को आय से अधिक संपत्ति जुटाने के आरोप में बर्खास्त करके उनके द्वारा दिये गये ठेकों की जांच करायी जाय।

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