ऑड-इवन के बावजूद सडक़ों पर बढ़ी गाडिय़ां और प्रदूषण

प्रदूषण जांचने वाली कम्पनियों की रिपोर्ट आई कि प्रदूषण कम नहीं हुआ, ट्रैफिक कुछ कम हुआ और अगले ऑड-इवन को चालू करने में केजरीवाल सरकार ने अपनी पीठ थपथपाते हुए करोड़ों रुपया विज्ञापनों पर खर्च कर दिया। ‘दिल्ली बोले दिल से, ऑड-इवन फिर से।’ ऑड-इवन 2 में सब लोग यह सोच रहे थे कि अपने आने-जाने का प्रबंध कर लूंंगा या दूसरी गाड़ी खरीद लूंगा।

विजय गोयल
राजा नंगा है- बचपन में एक कहानी सुनी थी। एक राजा को नए-नए कपड़े पहनने का बहुत शौक था। दो लोगों ने उनको मूर्ख बनाया और कहा कि हम आपके ऐसे कपड़े बनाएंगे, जो आज तक किसी ने देखे नहीं होंगे, पर ये उन्हें नहीं दिखाई देंगे, जो बेवकूफ होंगे। यह बात शहर में फैल गई। महीनों की मेहनत के बाद उन्होंने राजा के पुराने कपड़े उतारकर, जो नए कपड़े पहनाए, वह खुद राजा को ही दिखाई नहीं दिए, पर राजा ने इस डर से कि अगर मैं बोलता हूं कि मुझे कपड़े दिखाई नहीं दे रहे तो मैं बेवकूफ कहलाऊंगा, कहा कि वाह! क्या कपड़े पहनाए हैं। राजा ने मंत्री और सभासदों से पूछा तो उन्होंने भी यही कहा, वाह! क्या शानदार कपड़े हैं।
राजा हाथी पर बैठकर, नए कपड़े पहन नगर भ्रमण के लिए गया और पूरे शहर में जुलूस निकाला गया। सारी प्रजा कहने लगी, वाह! क्या कपड़े हैं, वाह! क्या कपड़े हैं। पर छत पर एक छोटा-सा बच्चा खड़ा था, वह चिल्लाया, अरे! राजा तो नंगा है। इसी तरह से केजरीवाल सरकार की ऑड-इवन स्कीम के बारे में भी सारे लोग देख रहे हैं कि ऑड-इवन के नाम पर लूट मची हुई है, लोग परेशान हैं। मेट्रो और बसों में लोग धक्के खा रहे हैं, ओबर, ओला वाले लूट रहे हैं और थ्रीव्हिलर वाले भी मीटर से न चलने के सौ बहाने कभी गैस खत्म तो कभी कुछ और बहाना बनाकर लोगों को परेशान कर रहे हैं। सडक़ों पर तीस प्रतिशत वाहन बढ़ गए हैं और खुद दिल्ली का मुख्यमंत्री भ्रमित है, दो हजार रूपए के चालान का आतंक मचा हुआ है। ऐसा लगता है मानो इमरजेंसी लगी हुई है। प्रदूषण कम होने की जगह बढ़ गया है। पर एक वातावरण बन गया है, मानो ऑड-इवन से प्रदूषण और ट्रैफिक जाम कम हो जाएगा, दोनों ही कम होने का नाम नहीं ले रहे। देखना यह है कि छत पर से कौन-सा बच्चा चिल्लाएगा कि राजा नंगा है-ऑड-इवन फेल है। एक आदमी के खुलकर बोलने भर की देर है कि जनता सडक़ों पर आकर चिल्लाएगी, राजा नंगा है, राजा नंगा है, यानी कि ऑड-इवन फेल है, ऑड-इवन फेल है।
तथ्यों पर जाइए, आप। नया-नया ऑड-इवन जनवरी में लगा था, इसमें केवल कारों पर रोक लगाई गई, जिनसे प्रदूषण 10 प्रतिशत से भी कम होता है। लोग ट्रैफिक और प्रदूषण से बेहद त्रस्त थे। मन में सबने यह सोचा कि शायद हमारे सहयोग से यह ऑड-इवन स्कीम सफल हो जाए तो आगे आने वाली पीढ़ी को राहत मिल जाएगी। सरकार ने बड़ी चतुराई से स्कूलों की छुट्टियों में इसे लागू किया और प्रचार कर दिया कि ऑड-इवन स्कीम सफल हो गई। उसका पहला कारण था, स्कूल की छुट्टियां, दूसरा कारण लोगों का घरों से न निकलना, तीसरा कारण पन्द्रह दिन किसी तरह से गुजार लेंगे और चौथा कारण था कि जिनके पास एक गाड़ी थी, वह परेशान थे, दो गाड़ी वाले मजे में थे।
प्रदूषण जांचने वाली कम्पनियों की रिपोर्ट आई कि प्रदूषण कम नहीं हुआ, ट्रैफिक कुछ कम हुआ और अगले ऑड-इवन को चालू करने में केजरीवाल सरकार ने अपनी पीठ थपथपाते हुए करोड़ों रूपया विज्ञापनों पर खर्च कर दिया। ‘दिल्ली बोले दिल से, ऑड-इवन फिर से।’ ऑड-इवन 2 में सब लोग यह सोच रहे थे कि अपने आने-जाने का प्रबंध कर लूंगा या दूसरी गाड़ी खरीद लूंगा। बाकी पब्लिक अपनी कार सडक़ पर नहीं लाएगी, वह बस और मेट्रो में धक्के खाएगी, तो मुझे तो ट्रैफिक कम मिलेगा। जैसा कि ऑड-इवन स्कीम-2 में दो कार वालों को मजा आ रहा है। उनको लगता है कि जिनके पास एक गाड़ी है, वह तो अपनी गाड़ी ला नहीं पा रहा तो मुझे ट्रैफिक कम मिल रहा है। दूसरी तरफ लोग यह समझे बैठे हैं कि स्कीम चल रही है तो प्रदूषण कम हो ही रहा होगा। जबकि केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को साफ कहा है कि प्रदूषण घटा नहीं, बल्कि बढ़ा है और आईआईटी दिल्ली ने भी यही कहा है। सभी मीडिया ने कहा है कि जगह-जगह पर ट्रैफिक जाम लगा हुआ है। पीएम 10 और पीएम 2.5 के उतार-चढ़ाव कोई हैं भी तो वह मौसम और हवा के रूख में बदलाव की वजह से हैं न कि ऑड-इवन- 2 की वजह से।
लोग कहते हैं कि आतंक और बंदूक की नोक पर इसे लागू करने की कोशिश की गई। सवेरे-सवेरे निकल कर अगर आप अपने दफ्तर आठ बजे तक नहीं पहुंचे तो रास्ते में चालान का डर, वह भी दो हजार रूपए का। हेलमेट जिसके न लगाने के कारण जान जोखिम में होती है, उसका चालान दो सौ रूपए है। पहले ही दिन लोगों में आतंक मचाने के लिए 1311 चालान काट दिए गए और अब तक साढ़े चार हजार से भी अधिक चालान काटे गए हैं। अगर दिल्ली बोले दिल से था तो चालान दो सौ-तीन सौ रूपए का रखते, तब पता चलता कि दिल्ली बोले दिल से है या दिल्ली डरी बिल से।

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