एसडीओ साहब व्यस्त विद्युत उपभोक्ता पस्त

उपभोक्ताओं को मिलती है तारीख पर तारीख

जेई साहब रहते हैं दौरे पर उपभोक्ताओं से सिर्फ फोन पर होती है मुलाकात

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी के इन्दिरानगर सेक्टर-25 स्थित उपकेन्द्र के एसडीओ मीटर तथा बिल की समस्या लेकर आने वाले क्षेत्रीय उपभोक्ताओं को समय न होने का हवाला देकर बाद में आने की बात कहते हैं। एसडीओ साहब की बताई हुई तारीख पर जब उपभोक्ता अपनी समस्या लेकर उपकेन्द्र पहुंचते हैं, तो उनके काम को एसडीओ अपने अधीनस्थ जेई को सौंप देते हैं। इसके बाद भी उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान महीनों बीतने के बाद भी नहीं होता। इसके चलते उपभोक्ता उपकेन्द्र के चक्कर लगाता रहता है। परेशान उपभोक्ताओं की मानें तो जेई साहब भी हमेशा दौरे पर रहते हैं। उनसे तो मिलना ही नहीं हो पाता केवल फोन पर बात होती है और दूसरे दिन का समय मिल जाता है।
बिजली विभाग लाख दावे करे लेकिन उसके अधिकारी अपनी व्यस्तता के चलते विभाग को लाखों रुपये का चूना लगा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो अपनी व्यस्तता का दावा करने वाले एसडीओ साहब यहां आने वाले उपभोक्ताओं को हमेशा बिल रिकवरी के काम में व्यस्त होने की बात बताते हैं। बिल रिकवरी में इतनी मेहनत करने के बावजूद भी हर महीने लाखों का बकाया रह जाता है। वहीं बिजली उपभोक्ता भी अधिकारियों की व्यस्तता के चलते उपकेन्द्र के चक्कर लगाने पर मजबूर हैं। उपभोक्ताओं को काम होने की सिर्फ तारीख मिल रही है। सूत्र बताते हैं कि विभाग को हर महीने होने वाले घाटे का एक कारण उपभोक्ताओं को की समस्याओं का समय निस्तारण न हो पाना भी है।

केस-1
कल्याणपुर स्थित पूर्वांचलपुरम निवासी रघुवंश शर्मा पिछले तीन महीने से इन्दिरानगर स्थित सेक्टर-25 विधुत उपकेन्द्र के चक्कर लगा रहे हैं। रधुवंश शर्मा बताते हैं कि कनेक्शन लिया था, पहले तो बिल ही नहीं आया और जब बिल आया तो वो काफी ज्यादा था। इस समस्या को लेकर जब उपकेन्द्र आया तो यहां पता चला कि मीटर खराब है बदलना पड़ेगा। तब से लगातार उपकेन्द्र के चक्कर लगा रहा हूं। सोमवार को जब दोबारा एसडीओ से मिला तो उन्होंने फिर से अपने इलाके के जेई से मिलने के लिए भेज दिया है और कहौकि जेई रिपोर्ट देंगे तब ही मीटर सही हो पायेगा। इस संबंध में जब जेई साहब से फोन पर बात की तो उन्होंने दौरे पर होने की बात कह कर फोन काट दिया। मेरा बिल अब तक दस हजार रुपये हो चुका है। सारा बिल एक साथ कैसे दे पाऊंगा। मीटर सही हो जाता तो हर महीने बिल जमा करने में आसानी होती। एसडीओ साहब से जब आकर समस्या बताता हूं तो उनका हमेशा की तरह एक ही जवाब रहता है कि अभी बिल की रिकवरी करा रहा हूं, व्यस्त हूं बाद में आना या फिर जेई से जाकर मिलो। जब कोई जिम्मेदार मिलेगा ही नहीं तो आखिर अब इस समस्या से कैसे निजात मिलेगी ।

केस-2
इन्दिरानगर स्थित मकान नम्बर ए-1389 पर लगभग छ: महीने पहले मीटर रीडिंग लेने वाले व्यक्ति ने मौजूदा रीडिंग से तीन हजार ज्यादा रीडिंग चढ़ा दी। इसके बाद उपभोक्ता पर एक साथ हजारों रूपये की देनदारी बन गयी। इसकी शिकायत उपभोक्ता ने सेक्टर-25 स्थित विद्युत उपकेन्द्र के एसडीओ से की उन्होंने कहा कि मीटर बदलवा लो रीडिंग सही हो जायेगी। उपभोक्ता के पुत्र डी मिश्र बताते हैं कि बिजली का कनेक्शन उनकी मां के नाम पर है। हम लोग यहां पिछले 15 सालों से रह रहे हैं। बीते जुलाई माह में मीटर रीडिंग लेने वाले ने गलत मीटर रीडिंग जानबूझ कर चढ़ा दी थी। इसकी शिकायत विभागीय अधिकारियों से करने पर भी कोई सुनवाई नहीं हुयी। इसके कुछ ही दिनों बाद घर पहुंचे रीडिंग लेने वाले ने कहा कि ज्यादा मीटर रीडिंग चढ़ाना मीटर बदलवाने की प्रक्रिया का हिस्सा है। इसके बाद मैंने मीटर बदलवा लिया लेेकिन घर में लगे मीटर की रीडिंग आज तक सही नहीं हुयी। इसके चलते मुझे अतिरिक्त जुर्माना भी देना पड़ा। मैंने इसकी शिकायत एसडीओ से लेकर अधिशाषी अभियंता तक से की लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुयी। छ: महीने से ज्यादा समय बीतने वाला है मेरी बढ़ी हुई मीटर रीडिंग अभी भी वैसे ही आती है। इसके अलावा कुछ कर्मचारियों द्वारा मीटर रीडिंग सही कराने के लिए पैसे की मांग की जा रही है।

केस-3
सर्वोदय नगर के रहने वाले डी.पी. सिंह तोमर बताते हैं कि मीटर बदलने के लिए एक साथ दस हजार यूनिट बढ़ा कर बिल भेज दिया गया था। उस समय घर में लगे मीटर की रीडिंग 34000 थी , लेकिन मीटर रीडिंग लेने वाले ने 44000 मीटर रीडिंग कर दी थी। 10000 बढ़ी हुई मीटर रीडिंग सही करवाने के लिये मैंने बहुत प्रयास किये। कई महीने विभाग के चक्कर काटने के बाद मीटर तो बदल गया। लेकिन रीडिंग नहीं बदली गयी। इसके चलते बढ़ा हुआ बिजली का बिल आता रहा। विभाग वालों ने मेरा कनेक्शन तक काट दिया। कई महीने चक्कर काटने के बाद अब बिल सही हुआ।

बिजली बिल को लेकर उपभोक्ताओं को परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, वो मेरे पास आयें उनकी समस्या का समाधान जल्द से जल्द होगा।
-आरपी. सिंह, अधिशाषी अभियंता, वितरण खण्ड- इन्दिरानगर।

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