एलयू में शिक्षिकाओं की समस्याओं का नहीं हो रहा समाधान

कई बार शिक्षिकायें विवि प्रशासन से शौचालय की साफ-सफाई की कर चुकी हैं शिकायत

टैगोर लाइबे्ररी के शौचालय का भी है बुरा हाल
मैथमैटिक्स विभाग के बाथरूम में भरा रहता है पानी

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर को संवारने के लिए भले ही करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है, लेकिन विवि प्रशासन ने अपने यहां कार्यरत लोगों की प्राथमिक आवश्यकताओं से मुंह मोड़ रखा है। महिला प्रोफेसर हो या कर्मचारी दोनों के लिए शौचालय की समस्या मुख्य है। कुछ शौचालय है भी तो उनकी स्थिति सार्वजनिक शौचालय से भी बदत्तर है। इसके लिए कई बार कई विभागों से कुलपति को पत्र लिखकर शिकायत की गई है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
विश्वविद्यालय की टैगोर लाइब्रेरी अपने आप में अनोखी है। टैगोर लाइब्रेरी की डिप्टी लाइब्रेरियन ज्योति मिश्रा का कहना है कि यहां विदेशों से लोग लाइब्रेरी व किताबों का कलेक्शन देखने आते हैं। उनके लिए भी साफ शौचालय की व्यवस्था नहीं है। बाथरूम में पानी भर जाता है उसकी सारी नालियां चोक हो चुकी है। इसके लिए कई बार रजिस्ट्रार व कुलपति को पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। निर्माण विभाग के लोग आते है खानापूर्ति कर चले जाते हैं। विवि प्रशासन महिलाओं के इस समस्या को लेकर जरा भी संवेदनशील नहीं है। ऐसा ही कुछ हाल मैथमैटिक्स विभाग का है जहां शिक्षिकाओं और छात्राओं के लिए एक ही बाथरूम हैं। उस बाथरूम में भी पानी का जमाव रहता है। सफाई तो बहुत दूर की बात है। इस संबंध में शिक्षिकाओं का कहना है कि महिलाओं की आवश्यकता पर विवि प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है। एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी जी जगह-जगह सफाई के साथ शौचालय बनवा कर सफाई का संदेश दे रहे हैं और विवि केवल खानापूर्ति कर रहा है। बतातें चले कि विवि प्रशासन ने कई महीनों पहले एनजीओ और कई निजी कम्पनियों के साथ मिलकर इंटरनेशनल सेमिनार का आयोजन किया था, जिसमें शौचालय व स्वच्छता को मुद्दा बनाया गया था। इस गम्भीर मुद्दे पर बड़े-बड़े विद्वानों ने हफ्ते भर तक अपना विचार व्यक्त किया था, जिसमें विवि के कुलपति से लेकर सभी जिम्मेदार मौजूद थे। सेमिनार खत्म होते ही स्वच्छता और सुरक्षा के सारे दावे काफू र हो गए। इन मुद्दे पर 4पीएम ने भी इसे प्रमुखता से उठाया था, जिसके बाद लाइब्रेरी व अन्य विभागों के शौचालय की सफाई के नाम पर खानापूर्ति की गई थी। विवि में इस प्रकार की समस्याए दिन-प्र्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। इस बात से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि विवि प्रशासन अपने यहां कार्य करने वालों के प्रति जरा भी सजग नहीं है। इस संबंध में जब भी निर्माण विभाग से बात किया जाता है उनका रटारटाया जवाब होता है कि अभी कुछ दिन पहले ही इसमें सुधार किया गया है।

छात्राओं ने कहा…
आस्था तिवारी का कहना है कि विवि प्रशासन को स्वच्छता पर सबसे ज्यादा ध्यान देना चाहिए, लेकिन विवि प्रशासन इसी की अनदेखी कर रहा है। शौचालय की साफ-सफाई न होने से बहुत परेशानी होती है। सुबह से शाम तक कक्षाएं चलती हैं, जिससे छात्राओं और शिक्षकों को दिक्कत होती है।

कामिनी सिंह का कहना है कि अधिकतर विभागों के बाथरूम का बुरा हाल है। सभी बाथरूम में जल जमाव की स्थिति बनी रहती है। बाथरूम में गंदगी की वजह से भयंकर बदबू भरी रहती है। बाथरूम के पास ही कम्प्यूटर लैब है, जहां बदबू के कारण बैठना मुश्किल होता है।

रौशन जहां ने कहा कि लाइब्रेरी की सुन्दरता बढ़ाने के लिए विवि इतने पैसे खर्च कर रहा है लेकिन शिक्षिकाओं और छात्राओं की जरूरतों से कोई सरोकार नहीं है। विवि प्रशासन को विदेशों से आने वाले लोगों का भी परवाह नहीं है कि वो लोग हमारे विश्वविद्यालय के बारे में क्या कहते होंगे। विवि की छवि की भी परवाह नहीं हैं।

माधुरी वर्मा का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश को स्वच्छ बनाने के लिए स्वच्छता अभियान चला रहे है। जगह-जगह शौचालय बनवा रहे हैं लेकिन हमारे विवि में शौचालय तो है लेकिन उसकी सफाई के लिए कोई जागरुक नहीं है।

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