एलयू में बीपीएड का कोर्स शुरू करने की कवायद तेज

  • मानकों के अनुसार राजधानी के प्राइमरी व माध्यमिक स्कूलों से जल्द होगा करार 
  • शारीरिक शिक्षा विभाग एयर कंडीशन बस खरीदने की बना रहा योजना
  • जुलाई में बीपीएड की कक्षाओं को शुरू करने की कोशिश में जुटा विभाग

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा विभाग ने बीपीएड का कोर्स शुरू करने की कवायद तेज कर दी है। कोर्स को लेकर यूजीसी की तरफ से जारी गाइड लाइन के अनुसार प्राइमरी व माध्यमिक स्कूलों से करार करने की कोशिश की जा रही है, जिसमें शारीरिक शिक्षा विभाग तय पाठ्यक्रम के आधार पर छात्रों को टीचिंग की ट्रेनिंग देने के व्यवस्था करने में जुटा है।
यूजीसी ने बीपीएड का पाठ्यक्रम और गाइड लाइन तय कर रखी हैं। एनसीटीई की तरफ से 2014 में जारी अध्यादेश के तहत बीपीएड के छात्रों को टीचर की ट्रेनिंग दिया जाना अनिवार्य है। इसके लिए बीपीएड के छात्रों को जिन-जिन स्कूलों में प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की गई है, उनके साथ संस्था का करार होने संबंधी कागजात प्रस्तुत करना भी जरूरी होता है। इसलिए एलयू का शारीरिक शिक्षा विभाग स्कूलों के करार करने में जुट गया है। चूंकि पिछले वर्ष एलयू में छत्रों के आवेदन पत्र भरने और अन्य प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद छात्रों के प्रशिक्षण का प्रबंध न होने की वजह से छात्रों को मना कर दिया गया था। इसलिए मामले को बहुत ही गंभीरता से लेकर काम किया जा रहा है। बीपीएड की प्रवेश प्रक्रिया से पूर्व कोर्स और लेसन प्लान तैयार किया गया है। उम्मीद की जा रही है कि प्रवेश प्रक्रिया पूरा होने के बाद 16 जुलाई से कक्षाएं शुरू हो जाएंगी।
प्रशिक्षण के दौरान शिक्षक रहेंगे मौजूद
हर छात्र समूह के साथ एक शिक्षक भी मौके पर मौजूद रहेगा। प्रशिक्षण के दौरान छात्रों की सारी गतिविधियों को नोट किया जाएगा, जिसके कुछ ग्रेड दिए जाएंगे। छात्रों को प्रशिक्षण के दौरान 30 लेसन प्लान तैयार करना होगा, जिसमें से बीस प्लान प्राइमरी व उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में प्रशिक्षण के दौरान पूरा करना होगा। वहीं बचे हुए 10 लेसन प्लान छात्रों को विश्वविद्यालय में ही पूरे करने होंगे। प्रशिक्षण के दौरान इस बात का भी खास ख्याल रखा जाएगा कि छोटे बच्चों को छात्राएं ही प्रशिक्षण दें। ट्रेनिंग में मिले प्रोजेक्ट के दौरान बीपीएड का प्रशिक्षण लेने वाला छात्र अपनी जिम्मेदारियों को अच्छी तरह समझ पाएगा। इससे उनमें कर्तव्य परायणता की भावना पैदा होगी और अपने काम के प्रति सजग रहेंगे। प्रशिक्षण के दौरान दिए गए माक्र्स को परीक्षा
के बाद मिले फाइनल अंकों में जोड़ा जाएगा।

स्कूलों से करार करना है चुनौती

शरीरिक शिक्षा विभाग के कोऑर्डिनेटर डॉ. नीरज जैन का कहना है कि यूनिवर्सिटी में बीपीएड के स्टूडेंट की सुबह के समय प्रैक्टिकल की क्लास होती है। दोपहर बाद थ्योरी के पेपर होते हैं। जबकि स्कूलों में खेलकूद से संबंधित कक्षाएं 10 बजे के बाद कराई जाती हैं। ऐसे में दोनों की कक्षाओं का समय प्रशिक्षण की प्लानिंग के अनुसार फिट नहीं बैठ पा रहा है। इसलिए स्कूलों के साथ करार करना भी बड़ी चुनौती है।

अलग-अलग स्कूलों में प्रशिक्षण के लिए जाएंगे छात्र
एयू ने शैक्षिक सत्र 2016-17 में बीपीएड के पाठ्यक्रमों में थ्योरी व प्रेक्टिकल के अलावा लेसन प्लान बनाना भी अनिवार्य कर दिया गया है। इसके लिए राजधानी के बीस स्कूलों में कक्षा एक से लेकर इंटर तक के छात्रों को शारीरिक शिक्षा के पाठ्यक्रमों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए छात्रों को अलग-अलग गुटों में बांटकर अलग-अलग स्कूलों में भेजा जाएगा।

एसी बसों के लिए बना रहे प्रपोजल

बीपीएड के छात्रों को अलग-अलग स्कूलों तक ले जाना और उन्हें वहां से ले कर आना कठिन कार्य है। स्कूलों में आने-जाने के दौरान छात्रों का समय बर्बाद न हो, इसके लिए विभाग ने अपनी बस खरीदने का निर्णय लिया है। इसके लिए 37 सीटर एसी बस के लिए प्रापोजल तैयार किया जा रहा है,जिससे छात्रों को आने जाने की सुविधा मिल सके।

Pin It