एलडीए में लाखों के भ्रष्टïाचार को उजागर कर रहीं स्ट्रीट लाइटें

तीन माह से गोमतीनगर विस्तार में अलकनंदा से लेकर सरस्वती अपार्टमेंट तक नहीं जल रहीं स्ट्रीट लाइटें
शिकायत के बावजूद अधिकारी अदला-बदली कर जिम्मेदारी से झाड़ रहे पल्ला

captureअंकुश जायसवाल
लखनऊ। एलडीए में भ्रष्टïचार इस कदर व्याप्त है कि कर्मचारी से लेकर उच्च अधिकारी तक सभी इसमें संलिप्तता बनाये हुए हैं। यहां स्ट्रीट लाइटों के नाम पर लाखों का खेल कर दिया गया, जिसका खामियाजा गोमतीनगर विस्तार के निवासियों को भुगतना पड़ रहा है। करीब तीन माह से अलकनंदा से लेकर सरस्वती अपार्टमेण्ट तक का इलाका शाम होते ही अंधेरे में डूब जाता है और जिम्मेदार अधिकारी क्षेत्रीय लोगों की शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय खानापूर्ति में लगे हुए हैं।
शहर के गोमतीनगर विस्तार में एलडीए द्वारा बनवाये गये अपार्टमेण्टों की हालत बद से बदतर होती जा रही है, जिसको पूछने वाला शायद कोई नहीं है। इसका जीता जाता उदाहरण है, यहां लगभग एक किलोमीटर रेंज में स्ट्रीट लाइटों का न जलना। यहां अलकनंदा अपार्टमेण्ट से लेकर सरस्वती अपार्टमेण्ट तक सडक़ों पर लगी स्ट्रीट लाइटें बीते तीन महीने से खराब पड़ी हुई हैं, जिसकी सुध लेना वाला कोई नहीं है। स्ट्रीट लाइटों का आलम यह है कि एक-दो लाइटें ही कभी कभार जलती नजर आती हैं, वह भी कुछ देर जलने के बाद दम तोडऩे लगती है। इस संबंध में कई बार शिकायत की जा चुकी है, जिसके बाद मौके पर पहुंचकर कर्मचारियों ने लाइटों की अदला -बदली करके अपनी जिम्मेदारी निभाने का दिखावा किया । लेकिन स्थिति बिल्कुल उलट है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि स्ट्रीट लाइटें इतनी जल्दी खराब कैसे हो गईं। ऐसा तो नहीं स्ट्रीट लाइट लगाने वाले विभागीय लोग ही लाइटों को उतरवाकर ले गये हों।

वीआईपी दौरों पर बदल जाती है इलाकों की सूरत 

इलाके के लोग बताते हैं कि यहां करीब तीन महीने से शाम ढलते ही अंधेरा छा जाता है। सडक़ों पर सन्नाटा पसरा रहता है। स्ट्रीट लाइट न जलने से लोग अपने घरों से रात्रि में कम निकलते हैं। वहीं शिकायतों के बाद भी लाइटों को सही नहीं कराया गया। लोगों के मुताबिक अभी किसी वीआइपी या नेता का क्षेत्र में आवागमन हो जाएं, तो सारी व्यवस्था चॉक चौबंद रातो रात कर दी जाएगी।

सिर्फ होती है खानापूर्ति
क्षेत्रीय लोगों ने बताया कि कई बार स्ट्रीट लाइटें खराब होने की शिकायत की गई, तो कर्मचारी यहां आकर अपनी खानापूर्ति करके चलते जाते हैं। एक तो जो लाइट जल रही होती है उसी को बदलकर खराब पड़े हैलोजन से बदल देते हैं और खराब हैलोजन को लेकर चले जाते हैं। यहां तक कि लोगों को यह भी कहना है कि ज्यादातर लाइटें विभागीय कर्मचारी ही लेकर रफूचक्कर हो गये हैं। इसलिए पोलों पर लाइटें नहीं दिख रही हैं। खाली पड़े हुए हैं। कुल मिलाकर लाइटें चोरी करके लाखों रुपये का खेल किया गया है।

खंभों से लाइटें नदारद

गोमतीनगर विस्तार की सडक़ों के बीच लगी स्ट्रीट लाइटें अपनी दुश्वारियां बयां करती नजर आ रही हैं। वहीं सडक़ों के किनारे लगे पोल बिना लाइटों के मुंह चिढ़ा रहे हैं। लोगों को मानना है कि यहां पोल जब से लगाये गये हैं तब से ऐसे ही लगे हैं और इनमें लाइटें भगवान जाने का कब लगाई जाएंगी।

दुर्घटनाओं की आशंका
सडक़ों पर स्ट्रीट लाइटें न जलने से रात्रि में दुघटनाएं होने की संभावनाएं बढ़ जाती है। रोडों पर अंधेरा रहता है, जिससे लोगों को बाहर सडक़ों पर निकलने से डर लगता है। वहीं यहां सूनसान सडक़ों पर एक्सीडेंट के साथ-साथ अन्य घटनाओं को भी अंजाम देने का डर बना रहता है।

अगर ऐसा है, तो जल्द ही अलकनंदा से सरस्वती अपार्टमेण्ट तक स्ट्रीट लाइटों की व्यवस्था कराई जाएगी।
-अनूप यादव, उपाध्यक्ष, एलडीए

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