एलडीए के भ्रष्टïचार का शिकार भुलई 16 साल से काट रहा दफ्तर के चक्कर

  • सचिव से लेकर एलडीए वीसी तक से लगाई गुहार मगर नहीं मिला न्याय

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
captureलखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा गोमती नगर विस्तार के मलेशेमऊ में की गई अधिग्रहण भूमि में भी खेल किये जाने की आशंका है। प्राधिकरण के अभियंता और अधिकारियों ने अपने निजी स्वार्थ को सिद्घ करने के लिए खास लोगों के नाम ही समायोजित किए है। यह कहना है मलेशेमऊ खसरा संख्या 288 में रहने वाले भुलई यादव का। उन्होंने प्राधिकरण पर आरोप लगाते हुए कहा कि एलडीए ने जिन लोगों को समायोजित किया है उसमे बड़ा खेल किया गया है। जिन लोगों के पास प्लॉट की रजिस्ट्री तक नहीं है प्राधिकरण द्वारा उनका नाम सूची में जोड़ दिया गया है।
बोर्ड बैठक में फैसला कर प्राधिकरण के अधिकारियों ने मलेशेमऊ में रहने वाले और समायोजन में बचे हुए 61 लोगों की परिसम्पत्तियों को जोड़ते हुए उन्हें अपनी लिस्ट में शामिल कर लिया है। इस समायोजित सूची में भी खेल किया गया है। इसमें कई ऐसी परिसंपत्तियों को जोड़ा गया है, जिनके पास अपनी रजिस्ट्री ही नहीं है। यही नहीं प्राधिकरण के भूमि अधिग्रहण के आदेश आने से पूर्व ही वहां पर रहने वाले कई लोगों ने रजिस्ट्री करा ली थी, उनमें से एक भुलई भी हैं, जिनका अभी तक नाम सूची में शामिल नहीं किया गया है और ना ही समायोजित किया गया है। दरअसल, मलेशेमऊ खसरा संख्या 288 में रहने वाले भूलई कुमार यादव ने देवा सहकारी आवास समिति से 800 वर्गफुट का प्लॉट वर्ष 2000 जनवरी में खरीदा था।

क्या कहते हैं अधिकारी

“मामला मेरे संज्ञान में नहीं था। अगर ऐसा हुआ है, तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।”
-अरुण कुमार, सचिव, एलडीए

हर बार सचिव से मिल रहा आश्वासन

बोर्ड बैठक में बचे हुए लोगों की परिसंपत्तियों के समायोजन के बाद भी इनके नाम को अभी तक इसमें जोड़ा तक नहीं गया है। इस बात से नाराजगी जताते हुए भुलई यादव गोमतीनगर स्थित प्राधिकरण भवन में सचिव अरुण कुमार से अपने नाम को भी सूची में दर्ज कराने के लिए पहुंचे, जहां पर उन्होंने अपनी जमीन से संबंधित सभी कागज पेश किए। इसके बाद सचिव ने मामले की जांच कराने का आश्वासन देकर वापस भेज दिया। प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि अब समायोजित किये जाने वाले लोगों की सूची बनकर तैयार हो चुकी है और जिनके नाम भूखण्डों पर चढऩे थे, वह कब के हो चुके। वहीं भुलई का कहना है कि उन्होंने 21 जनवरी 2000 में उक्त भूखण्ड का बैनामा करा लिया था, जोकि राजस्व अभिलेखों की पुस्तक संख्या 1 खण्ड 2892 पृष्ठï 320/324 क्रम संख्या 358 में दर्ज भी है। इसके साक्ष्य भी एलडीए में प्रस्तुत किये जा चुके हैं। इसके बाद भी अधिग्रहण भूमि के लोगों को समायोजन करने की सूची में उनका नाम नहीं डाला गया। जबकि समिति के अन्य प्लॉट होल्डरों के नाम समायोजन सूची में है। प्राधिकरण के अधिकारियों ने सूची में ऐसे भी लोगों का नाम शामिल कर लिया है, जिनके पास अपनी जमीन की रजिस्ट्री तक नहीं है।

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