एमसीआई के मानकों के विपरीत हुयी थी केजीएमयू में तैनाती

  • कुछ का हुआ खुलासा कुछ हैं बाकी

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राज्यपाल व केजीएमयू के कुलाधिपति राम नाईक ने केजीएमयू के जिरियाट्रिक विभाग में असि. प्रोफेसर के पद पर डॉ. प्रीति की नियुक्ति को निरस्त कर दिया। इसके बाद इस नियुक्ति को लेकर केजीएमयू प्रशासन से रिपोर्ट मांगी। वहीं मेडिकल काउंसिल ऑफ इण्डिया ने मानसिक रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एससी तिवारी की तैनाती को भी गलत बता दिया है।
मानसिक रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एससी तिवारी लम्बे समय से मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के पद पर बने हुए हैं। सूत्रों की मानें तो मानसिक रोग विभाग के साथ और भी विभाग है जहां पर एमसीआई के मानकों के विपरीत तैनाती कर दी गयी है। जिसकों एमसीआई से छुपाया गया था। कुछ महीने पहले हुये एमसीआई के दौर के समय कई चिकित्सकों के मौजूदा पद भार को छुपाया गया था। आज भी वो चिकि त्सक अपना कार्यभार संभाले हुये हैं। वहीं बीते सोमवार कोउप कुलसचिव डा. वेद ने इस्तीफा दे दिया, जबकि डा. वेद उपचिकित्सा अधीक्षक के पद पर भी तैनात है। इसके बाद से पूरे केजीएमयू में हडक़म्प मच गया है। डॉ. वेद को कुलपति प्रो. रविकांत ने प्रमुख सलाहकार होने के कारण यह महत्वपूर्ण पद दिया था, जिसके बाद कई अहम फैसले भी उपकुलसचिव ने लिये थे। केजीएमयू के मैन पॉवर व अन्य महत्वपूर्ण निर्णय लेने की जिम्मेदारी डा. वेद के पास ही थी।

विवादित रहा है उपकुलसचिव का पद
गौरतलब है कि यह उपकुलसचिव का पद शुरू से ही विवादित रहा है। इसके अलावा सहायक कुलसचिव भी डा. अवनीश को बना दिया गया था, जबकि पहले से ही कार्यवाहक कुलसचिव के पद डा. शैलेन्द्र मौजूद थे। अब अचानक उपकुलसचिव के पद से इस्तीफा देने के बाद सहायक कुलसचिव के पद को भी खतरे में देखा जा रहा है। डॉक्टरों में तो यह भी चर्चा है कि डा. वेद ने इस्तीफा दिया नहीं बल्कि लिया गया है क्योंकि केजीएमयू में नियुक्तियों पर डॉक्टरों के एक बड़े वर्ग ने सवाल खड़ा कर दिया है।

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