एमसीआई के नियमों को भी नहीं मानता केजीएमयू प्रशासन

  • केजीएमयू के सीएमएस और डीन की फर्जी नियुक्ति
  • एमसीआई के 2009 के नियम 3 (2) के विपरीत हुई नियुक्ति

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। वैसे तो मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई ) के आदेश के बगैर देश के मेडिकल कॉलेजों में एक पत्ता भी नहीं हिल सकता। आये दिन एमसीआई की ओर से देश भर के चिकित्सा संस्थानों पर नियमों का पालन न करने पर कार्रवाई की जाती रहती है लेकिन देश के प्रतिष्ठिïत संस्थानों में शुमार किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज (केजीएमयू ) में एमसीआई के नियम को ताक पर रखकर आला-अधिकारियों को बैठाया गया है। एमसीआई के 21 जुलाई 2009 के नियम 3 (2) के अनुसार किसी भी चिकित्सा संस्थान का डीन, प्रिंसिपल और डायरेक्टर को उस चिकित्सा संस्थान में किसी भी विभाग का एचओडी नहीं बनाया जा सकता हैै। यह एमसीआई के नियम के विरूद्व है लेकिन केजीएमयू में एमसीआई के नियमों को ताक पर रखकर मनमानी की जा रही है। केजीएमयू प्रशासन की ओर से एमसीआई के नियमों को भी तोड़ा जा रहा है।

केजीएमयू के डॉ. एससी तिवारी चिकित्सा संस्थान के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के पद पर तैनात हैं। एमसीआई के नियम के मुताबिक मुख्य चिकित्सा अधीक्षक होने के नाते उन्हें किसी भी विभाग का विभागाध्यक्ष नहीं बनाया जा सकता लेकिन डॉ. एससी तिवारी वृद्वावस्था मानसिक रोग विभाग के एचओडी पद की भी जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। इसी तरह केजीएमयू के डीन पर तैनात डॉ. मस्तान सिंह को एमसीआई के नियम के विरूद्व माइक्रोबायोलॉजी का हेड बनाया गया है।

कार्यपरिषद सदस्यों ने राजभवन में की शिकायत
इस मामले को लेकर केजीएमयू के कार्यपरिषद के सदस्यों की ओर से राजभव में भी शिकायत की गई है। कार्यपरिषद के सदस्यों का कहना है कि चिकित्सा संस्थान में तमाम नियुक्तियों को लेकर धांधली चल रही है। केजीएमयू के कुलपति भी इस मसले पर चुप्पी साधे हुए हैं। इसके आलावा संस्थान के सीएमएस एससी तिवारी के वृद्धावस्था एवं मानसिक रोग विभाग में नए शिक्षकों के चयन से जुड़ा विवाद खत्म नहीं हो रहा है। जिनका चयन नहीं हुआ है वे सवाल उठा रहे हैं। एक आवेदक ने प्रशासन के आला अधिकारियों पर चहेतों की नियुक्ति का आरोप लगाया है। पीडि़त ने पत्र लिखकर गुहार लगाई है। राजभवन ने केजीएमयू प्रशासन से बिन्दुवार रिपोर्ट भी तलब की है। राजधानी के विकास नगर निवासी डॉ. शरदधर शर्मा ने राजभवन को भेजे पत्र में कहा है कि वह बीते छह वर्ष से काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से बतौर शिक्षक जुड़े हैं। उन्होंने कहा मेरे एक दर्जन से अधिक शोधपत्र प्रकाशित हो चुके हैं। विभाग द्वारा असिस्टेंट प्रोफेसर (नॉन टेक्निकल) के पद पर चयन के लिए वह सभी मानक पूरे कर रहे थे। इसके बावजूद चयन समिति ने कम योग्यताधारी एक महिला का चयन कर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि चयन समिति ने चहेतों व अपात्रों का चयन किया है।

केजीएमयू की 65 सीटों पर लग चुकी है रोक
एक बार एमसीआई ने औचक निरीक्षण के दौरान केजीएमयू की 65 एमबीबीएस सीटोंं पर रोक लगा दी थी। हालाकि केजीएमयू में सुप्रीम कोर्ट में सफ लता प्राप्त की । केजीएमयू और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के बीच सुप्रीम कोर्ट में चल रहे 65 सीटों पर दाखिले से संबंधित केस में केजीएमयू ने जीत हासिल की थी। गौरतलब है कि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने इन 65 सीटों पर यह कहते हुए दाखिले की रोक लगा दी थी कि यहां जरूरी संसाधन नहीं हैं।

आज यूजीसी की टीम करेगी निरीक्षण
केजीएमयू में आज पहली बार यूजीसी की टीम निरीक्षण करेगी। टीम के आने से पहलं केजीएमयू प्रशासन ने अपनी व्यवस्था चाक चौबंद कर ली है। सूत्रों के मुताबिक इसके बावजूद कई मामलों में यूजीसी की ओर से केजीएमयू प्रशासन से सवाल-जबाब किये जा सकते हैं।

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