एफडीएम कोर्स से डिजास्टर के समय पीडि़तों को मिलेगी सुविधा

डॉक्टर, नर्सेज, पुलिस सहित तमाम लोगों को होनी चाहिए जानकारी

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। केजीएमयू के एनेस्थीसिया एवं क्रिटिकल केयर विभाग में स्टेट डिजॉस्टर मैनेजमेंट अथॉरटी और यूनीसेफ के सहयेाग से एकदिवसीय एफडीएम (फंडामेंटल ऑफ डिजॉस्टर मैनेजमेंट) कोर्स के बारे में बताया गया। इस दौरान सेासाइटी ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन शिकागो के विशेषज्ञों ने जानकारी दी।
इस कोर्स को लेकर पहली बार उत्तर भारत में सीएमई का अयोजन किया गया था इस कोर्स के बारे में जानकारी देने के लिए डॉ. जगदीप शाह अमेरिका से आये थे। कोर्स का आयोजन केजीएमयू की डॉ. मोनिका कोहली, डॉ. जे बोगरा, डॉ. जिया अरशद और डॉ. सरिता सिंह की ओर से किया गया था। इस दौरान सेक्रेटरी और रिलीफ कमिश्नर लीना जोहरी ने डिजॉस्टर मैनेजमेंट को लेकर अपने द्वारा किये गये कार्यों के बारे में बताया।
उन्होने बताया कि डिजॉस्टर कीे कोई समय सीमा नहीं होता। इसलिए इसको लेकर पहले से कोई तैयारी नहीं की जाती। आपत्ति या तो प्राकृतिक होती है या फिर इंसान की ओर से की जाती है। मेडिकल फैकल्टी की यह जिम्मेदारी होती है कि वह आपत्ति में दुर्घटनाग्रस्त हुए लोगों को हर संभव इलाज मुहैया कराये। लेकिन इसके लिए हॉस्पिटल प्रशासन का सहयोग, डॉक्टर्स, नर्सेज, पुलिस, पैरामेडिकल स्टॉफ, राज्य सरकार का सहयेाग, एंबुलेंस सर्विसेज और तमाम समाजसेवी एनजीओ की जरूरत होती है, जो समय से लेागों को उचित जगह पहुंचा सकें और लोगों को ज्यादा से ज्यादा नुकसान होने से बचाया जा सके । एफडीएम कार्स के अंतर्गत इन्ही सब बातों को आपत्ति के समय कैसे प्रयोग में लाया जाय और हर व्यक्ति की जिम्मेदारी क्या है, इस पर चर्चा हुई।ड्ढ

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