एफएसडीए की लापरवाही उजागर

  • डीएम के आदेश के बाद भी स्कूलों में नहीं पहुंच पा रही एफएसडीए की टीम
  • सत्र शुरू होने से दो दिन पूर्व जारी हुआ था मिड-डे मील जांचने का आदेश

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। जिले में स्कूली बच्चों को बांटे जाने वाले खाने की नियमित जांच संबंधी आदेश हवा-हवाई साबित हो रहा है। नया सत्र शुरू होने के 10 दिन बाद भी एफएसडीए के अधिकारी स्कूलों में परोसे जाने वाले खाने की जांच करने नहीं पहुंचे। हाट कुक योजना के तहत स्कूलों में खाना पहुंचाने वाले कई स्वयंसेवी संगठन गंदगीयुक्त और अस्वास्थ्यकर भोजन बनाकर स्कूलों में भेज रहे हैं, जो बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है।

जिलाधिकारी राजशेखर ने स्कूलों में नया सत्र शुरू होने के साथ ही खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम को मिड डे मील के तहत वितरित होने वाले भोजन का नमूना लेने का आदेश दिया था। इसमें हाट कुक योजना के तहत खाना बनाने और स्कूलों में खाना पहुंचाने वाले सभी स्वयंसेवी संस्थानों के रसोईघर और वहां बनने वाले खाने की जांच सप्ताह में एक बार करना अनिवार्य था। इसकी रिपोर्ट तैयार कर जिलाधिकारी को सौंपना था लेकिन खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम ने सत्र शुरू होने के 10 दिन बाद तक मिड डे मिल के तहत मिलने वाले भोजन की जांच नहीं की। इस कारण खाना बनाने वाले कई संगठन अपनी सहुलियत और लाभ के अनुसार बिना साफ-सफाई के बना खाना स्कूलों में भेज रहे हैं। इसी वजह से राजधानी में शहरी क्षेत्र के स्कूल में परोसे गए खाने में कीड़ा मिल रहा है, जो कि मिड डे मील योजना के लिए कोई नई बात नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि शहरी क्षेत्र के स्कूल में परोसे गए खाने में कीड़ा मिल रहा है, तो देहात क्षेत्र में तो मिड डे मील के तहत मिलने वाले भोजन का हाल और भी बुरा होगा। हालांकि प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेकर स्कूलों में परोसे जाने वाले खाने की नियमित जांच का आदेश दिया है।

छत्तीसगढ़ सामाजिक सेवा संस्थान को दिया गया नोटिस

मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी एसपी सिंह ने बताया कि क्वींस कालेज में मिड डे मील के तहत 15 जुलाई की दोपहर बच्चों को खाने के लिए कोफ्ता परोसा गया था, जिसमें कीड़ा निकलने की शिकायत मिली। इस मामले को गंभीरता से लेकर खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। वहां से स्कूल में बच्चों को खाने के लिए परोसे गए कोफ्ता का नमूना लिया। इसके बाद सहादतगंज स्थित छत्तीसगढ़ सामाजिक सेवा संस्थान के कार्यालय पहुंची। वहां टीम ने रसोईघर का निरीक्षण किया। स्कूल में लिए गए नमूने को जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया गया है। वहां टीम ने रसोई घर में गंदगी और अस्वास्थ्यकर भोजन बनाये जाने की शिकायत को सही पाया। इस मामले में टीम ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर नगर मजिस्ट्रेट को सौंप दी है। इसके साथ ही संगठन का लाइसेंस निरस्त करने की मांग की गई है। उन्होंने बताया कि खाद्य पदार्थों में मिलावट को लेकर लखनऊ में काफी सक्रियता बरती जा रही है। इसी के अंतर्गत व्यापक स्तर पर छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्र की बड़ी और छोटी दुकानों पर समय-समय पर छापेमारी की जा रही है। यह अभियान नियमित रूप से चलेगा। खाद्य पदार्थों के जिन नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। उनकी रिपोर्ट आने के बाद आगे की कारर्ïवाई की जायेगी।

पहले दिन ही दूध बांटना बना मुसीबत
मिड डे मील योजना के अंतर्गत स्कूलों में दूध बांटने का पहला दिन ही स्कूली बच्चों और प्रशासन के लिए मुसीबत भरा साबित हुआ। इसमें लखनऊ में क्वींस कालेज में बच्चों को परोसे गए कोफ्ता में कीड़ा मिला, जिसका नमूना लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया गया। इसी प्रकार लखीमपुर खीरी स्थित प्राथमिक विद्यालय मड़वा में दूध पीने से 17 बच्चे बीमार हो गए। बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इन दोनों मामलों की जांच की जा रही है। ऐसे में बच्चों के स्वास्थ्य और मिड डे मील के तहत परोसे जाने वाले भोजन और दूध को लेकर लोगों में भय का माहौल बनने लगा है। यह बच्चों की स्कूलों में उपस्थिति और योजना की विश्वसनीयता दोनों को प्रभावित करेगा।

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