एक भ्रष्ट इंजीनियर ने कुछ बिल्डरों के साथ मिलकर कोशिश की थी एलडीए के वीसी को हटाने की

  • r1नौ महीनों में एलडीए की हालत सुधार दी एलडीए के वीसी सत्येन्द्र सिंह ने
  • सौ करोड़ की रिश्वत के खेल म्यूटेशन को बंद कर दिया गया एलडीए मेंएसी दफ्तर में बैठकर काम न करने वाले लोगों के लिए बना दिया गया पूरे शहर में जोनल सिस्टम
  • टेंडर आमंत्रित करने का अधिकार दे दिया गया सभी अधिशासी अभियंताओं को
  • पूरे एलडीए में लगा दिए गए कैमरे और दलालों के प्रवेश पर नियंत्रण के लिए भवन में घुसने पर पास बनाना किया अनिवार्य

मैं सिर्फ अपने काम पर विश्वास रखता हूं: सत्येन्द्र सिंह

एलडीए के वीसी का कहना है कि उन्हें कुछ नहीं पता कि उनके तबादले की चर्चा कहां से चली। उन्होंने कहा कि वह सिर्फ यह चाहते हैं कि प्राधिकरण के सभी लोगों को यह महसूस हो कि उनके कामों को पूरा लखनऊ देख रहा है। उन्होंने कहा कि हर हाल में सबको पारदर्शी तरीके से काम करना ही होगा।

 प्रभात तिवारी
लखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष सत्येन्द्र सिंह को अपने विभाग के भ्रष्टï इंजीनियर की ताकत का अंदाजा नहीं था। पिछले कुछ महीनों से उन्होंने विकास प्राधिकरण की तस्वीर बदलने के लिए जो काम शुरू किए थे उससे कई भ्रष्टï और ताकतवर लोगों की दुकान बंद कर दी थी। इन लोगों को लग रहा था कि अगर यही रवैया रहा तो उनकी कमाई पर खासा ग्रहण लग जाएगा। लिहाजा इन लोगों ने वीसी के खिलाफ मोर्चा बंदी शुरू कर दी। कल जब मुख्यमंत्री ने तीन वीसी को हटाने के आदेश दिए तो नियुक्ति विभाग ने उसमें लखनऊ का नाम भी शामिल करने की कोशिश की। सीएम को जैसे ही इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने नियुक्ति विभाग के कुछ अफसरों की जमकर क्लास ली।
लखनऊ विकास प्राधिकरण में अगर आप नौ महीने पहले गए हों और अब जाए तो आप चौंक जाएगे। पहले दफ्तर में जाने पर अधिकतर कर्मचारी अपनी कुर्सी की जगह बाहर चाय की दुकान पर नजर आते थे। यहीं पर काम का रेट तय होता था और तभी काम की गारन्टी दी जाती थी। अगर रकम ठीक-ठाक है तो यहां के काबिल लोग पूरी फाइल ही गायब करने का जिम्मा ले लिया करते थे। एलडीए जाने के नाम पर ही लोगों की कंपकंपी चढ़ जाती थी। एलडीए में तैनात होने के कुछ महीने के भीतर ही सत्येन्द्र सिंह ने इस विभाग की हालत सुधार दी। उन्होंने निर्देश कर दिया कि पूरे एलडीए में कैमरे लगा दिए जाएं जिससे पता चले कि कौन कर्मचारी अपनी सीट पर नहीं है। जब उन्हें जानकारी मिली कि विभाग के लोग दोपहर 12 बजे के बाद दफ्तर आते हैं तो उन्होंने बायोमैट्रिक हाजिरी शुरू करवा दी। पहले एलडीए के कर्मचारियों के पास दलालों का जमावाड़ा लगा रहता था। सत्येन्द्र सिंह ने यह सुनिश्चित किया कि गेट के अंदर आने से पहले व्यक्ति का पास बनाया जाए, जिससे अधिकृत व्यक्ति ही अन्दर जा सके।
एलडीए के वीसी ने सबसे खतरनाक काम यह किया कि लखनऊ में जोनल सिस्टम बना दिया। इसके तहत शहर में 22 स्थानों पर जन सुविधा कार्यालय खोल दिए गए जहां अधिशासी अभियंता और ज्वाइंट सेक्रेटरी को बैठने के आदेश कर दिए गए। मतलब साफ था कि यह अधिकारी अपने इस कार्यालय में बैठेंगे और उस इलाके के लोगों की समस्या का वहीं निदान कर देंगे। इस सिस्टम का शुरूआत में लोगों ने विरोध किया, मगर उनकी एक न चल सकी।
एलडीए में सबको पता था कि सालों से म्यूटेशन के नाम पर करोड़ों का खेल होता है। फ्री होल्ड प्रापर्टी में नाम परिवर्तन के लिए लोग मनचाही रकम देने को तैयार रहते थे। वीसी ने यह सुनिश्चित कर दिया कि एलडीए में म्यूटेशन का काम नहीं होगा। सैकड़ों करोड़ की रिश्वत एक झटके में बंद करना कई लोगों को बेहद अखरा। इस बीच लापरवाही बरतने वाले कई लोगों के खिलाफ एफआईआर भी हो गई।
इंजीनियरों की तानाशाही और ठेकेदारों का तालमेल तोडऩे के लिए वीसी ने तय किया कि प्रत्येक बुधवार और शुक्रवार को चीफ इंजीनियर, सचिव और फाईनेंस कंट्रोलर एक साथ बैंठेगे और हर भुगतान के संबंध में उसी समय निर्णय लेंगे। यदि किसी को कोई आपत्ति है तो वह उसी समय बताएगा और तीन दिन के भीतर उस आपत्ति का निस्तारण किया जाएगा, जाहिर है ऐसा होने से ठेकेदारी की प्रथा पर अंकुश लग गया, जिससे एक इंजीनियर बहुत आहत था। बताया जाता है कि इस इंजीनियर की सम्पत्ति एक हजार करोड़ से ज्यादा की है।
कुछ लोगों को यह भी अखरा कि वीसी ने सभी लोगों के टारगेट निर्धारित कर दिए। इन लोगों से पूछा गया कि पिछले तीन महीनों में आपने क्या काम किया। इस मानिटरिंग का जिम्मा एक निजी संस्था को दे दिया गया। वीसी की इस कार्यशैली का विरोध जमकर हुआ। कभी ठेकेदारों ने आंदोलन किया तो कभी उन पर भी आरोप लगाए गए। मजे की बात यह है कि वीसी के इस विरोध की कमान एलडीए के ही एक ताकतवर इंजीनियर ने संभाल रखी थी। नियुक्ति विभाग का कल का दांव तो खाली चला गया, अब देखना यह है कि यह भ्रष्टï लॉबी क्या वीसी को हटवा पाएगी।

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