एक-दूसरे की छींटाकशी में लगे विभाग

अवैध अतिक्रमण के लिए समय-समय पर अभियान चलाया जाता है। इसके बाद संबंधित थाने को सपुर्द किया जाता है कि वह दोबारा यहां अतिक्रमण न होने दे। इसके अलावा अतिक्रमण के खिलाफ लोगों को भी जागरुक होना पड़ेगा। 

उदयराज सिंह
नगर आयुक्त, नगर निगम

  • अतिक्रमणकारियों की मौज, अभी आसान नहीं होगी स्मार्ट सिटी की डगर
  • दस्ते के जाते ही फिर गुलजार हो जाती हैं अवैध कब्जेदारों की शाम

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। एक ओर शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए जोर-शोर से कवायद चल रही है। वहीं दूसरी ओर शहर के कुछ विभाग अपनी जेबे भरने व कार्यवाही के नाम पर खानापूर्ति कर शहर को स्मार्ट बनाने में सबसे बड़े रोड़ा बने हुए हैं। बात करें नगर निगम की तो कार्रवाई के चलते अतिक्रमण विरोधी अभियान तो चलाया जाता है पर उसके कुछ दिनों बाद वहीं स्थिति फिर से सामने आ जाती है। कारण यह है कि पूरी तरह से इन अतिक्रमणकारियों पर लगाम लगाने में नगर निगम असमर्थ शाबित हो रहा है। वहीं विभागीय अधिकारियों के मुताबिक अतिक्रमण अभियान के बाद क्षेत्रीय पुलिस को इसकी जिम्मेदारी दे दी जाती है कि वह यहां दोबारा अतिक्रमण न होने दे।
केस-1
मार्च महीने में नगर आयुक्त उदयराज सिंह ने हुसैनगंज से लेकर गुरुगोविंद सिंह मार्ग पर लालकुआं चौराहा, बासमंडी चौराहा, नाका चौराहा होते हुए ऐशबाग तक पटरियों के दोनों तरफ औचक निरीक्षण किया था, जिसमें सडक़ों पर दुकानदार अपनी दुकानों का सामान फैलाए हुए पाये गये थे, जिससे जाम की स्थिति अक्सर यहां बन जाती थी। वहीं कई लोग सडक़ों पर अतिक्रमण किये हुए पाये गये थे, जिसके बाद अतिक्रमकारियों का चालान काटा गया था। साथ ही दोबारा सडक़ पर अतिक्रमण न करने की चेतावनी भी दी गई थी। इसके बावजूद दो महीने के बाद ही गुरु गोविंद सिंह मार्ग पर दुकानदार हो या फिर अन्य अतिक्रमण कारी सभी ने आधी-आधी सडक़ों पर दोबारा कब्जा कर रखा है।
केस-2
मई महीने में नगर निगम, यातायात व पुलिस विभाग की टीम ने संयुक्त रूप से अशोक मार्ग से लेकर संकल्प वाटिका तक अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाकर कई अतिक्रमण कारियों को खदेड़ा था और कईयों का अवैध कब्जा ध्वस्त कर सामान को जब्त किया था। साथ ही कई कब्जेदारों से जुर्माना भी वसूला गया था। इसके अलावा दोबारा अतिक्रमण न करने की चेतावनी दी गई थी। वहीं दैनिक जागरण चौराहा से लेकर सिकंदर बाग चौराहा तक सडक़ों पर से अतिक्रमण हटवाया गया था। किन्तु अभियान के एक सप्ताह बाद ही लोगों ने फिर से अपनी जगहों पर कब्जा कर लिया और धड़ल्ले से अपने कार्य को अंजाम दे रहे हैं।
सुविधा शुल्क लेकर परमीशन
जानकारों की माने तो सडक़ों पर होने वाले अतिक्रमण को बढ़ावा क्षेत्रीय पुलिस से मिलता है। पुलिस अपने क्षेत्र में सडक़ों पर लगाने वाले ठेलावालों, सब्जीवालों, पटरी दुकानदारों से सुविधा शुल्क वसूलती है और उनकों सडक़ों पर बिक्री करने की परमीशन दे देती है। इसी के चलते आज जिधर भी जाओं हर ओर सडक़ों पर अतिक्रमण दिख जाएगा। ज्यादातर इलाकों में अतिक्रमण के लिए पुलिस विभाग ही जिम्मेदार है।

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