एक ओर मधुशाला, दूसरी ओर पाठशाला

नियमों का नहीं हो रहा पालन

स्कूल व धार्मिक स्थलों के पास धड़ल्ले से चल रहीं शराब की दुकानें

Captureरणविजय सिंह
लखनऊ। लखनऊ में नियमों को ताक पर रख शराब की दुकानें संचालित हो रही हैं। धार्मिक स्थलों से लेकर स्कूलों के पास तक धड़ल्ले से शराब की दुकानें चल रही हैं और विभाग मौन साधे हुए है। किस आधार पर विभाग लाइसेंस देता है यह तो साहब लोग जानें, पर यहां मानकों की अवहेलना डंके की चोट पर हो रही है।
यहां के शराब विक्रेताओं में कानून का डर नहीं है। जेब में पैसे हों और विभाग के अधिकारियों का आशीर्वाद, फिर क्या, जहां चाहे शराब की दुकान खोल लो। चाहे वो किसी धार्मिक स्थल के सामने हो या फिर किसी शिक्षण संस्थान के पास, क्या फर्क पड़ता है? राजधानी में फिलहाल 563 लाइसेंसी शराब की दुकानें हैं, जिनमें कई दुकानें किसी धार्मिक स्थल या स्कूल-कॉलेजों के सामने हैं। जबकि नियमत: इन दुकानों को किसी भी ऐसे स्थान से 100 मीटर की दूरी पर होना चाहिए। ऐसा नहीं है कि ऐसी दुकानों के खिलाफ कभी कोई शिकायत न हुई हो। शिकायतों पर कार्रवाई तो होती है लेकिन कागजी। शिकायत के बावजूद शराब व्यवसायियों का धंधा फल फूल रहा है और विभाग हर साल इनका लाइसेंन्स रेनुअल भी कर देता है।
हमारी 4पीएम की टीम ने जब राजधानी के अलग-अलग इलाकों की पड़ताल की तो पता चला की कई शराब की दुकानें तो मंदिर और मस्जिदों के सामने ही हैं। सबसे ज्यादा चौकाने वाली बात तो यह रही कि अलीगंज में जिस मकान में शराब की दुकान है उसी में छात्रों का कोचिंग इंस्टीट्यूट भी है। अब इन बच्चों पर इस माहौल का क्या प्रभाव पड़ता होगा यह तो आप भी समझ सकते हैं। कुछ इसी तरह का हाल कपूरथला में मस्जिद के पास और विकास नगर के गुलाचीन मंदिर के पास का नजारा है। यहां मस्जिद व मंदिर में उतने भक्त नहीं आते जितनी भीड़ शराब की दुकानों पर शौकीनों की होती है।
होती है छेडख़ानी
जिन चौराहों पर शराब की दुकानें हैं, उस रास्ते महिलाओं, लड़कियों का आना-जाना दूभर है। इसकी वजह है दुकान पर शराबियों का लगा हुजूम। जब कोई लडक़ी या महिला गुजरती है तो वे छीटाकशी व छेडख़ानी करने से बाज नहीं आते। अलीगंज की मीरा, फातिमा और अंजू चौधरी कहती हैं अब तो रास्ते से गुजरने में डर लगता है। शाम होते ही शराबियों की भीड़ चौराहे पर जुट जाती है। महिलाओं को देखते ही शराबी गंदी टिप्पणी करने लगते हैं। सार्वजनिक जगहों से शराब की दुकानों को हटा देना चाहिए।
इस विषय पर क्या कहना है जनता का…

मंदिर और स्कूल के बगल में शराब की दुकान का होना बहुत ही गलत है। इससे समाज पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसके खिलाफ प्रशासन को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
-ऋषभ जायसवाल छात्र
शराब की दुकान मंदिर के बगल में नहीं होनी चाहिए। इससे श्रद्धालुओं की भावना आहत होती है। इसके खिलाफ सरकार को कोई कदम उठाना चाहिए और उचित कार्रवाई करनी चाहिये
-प्रवीन चौधरी छात्र
शराब की दुकान मंदिर के बगल में नहीं होनी चाहिए। इससे श्रद्धालुओं की भावना आहत होती है। इसके खिलाफ सरकार को कोई कदम उठाना चाहिए और उचित कार्रवाई करनी चाहिये
-प्रवीन चौधरी छात्र

मस्जिद के सामने शराब की दुकान का होना कहीं से भी सही नहीं है। यहां का माहौल खराब हो रहा है। हमने कई बार इस दुकान की शिकायत की है लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
-अब्दुल माजिद व्यवसायी

सार्वजनिक जगहों पर शराब की दुकानों को लेकर हम कई बार आंदोलन कर चुके हैं। हमारी मांग रही है कि सार्वजनिक जगह से शराब की दुकानों को हटा दिया जाए। सरकार रेवेन्यू की वजह से इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाती। सार्वजनिक जगह पर महिलाओं और लड़कियों का आना-जाना लगा रहता है। नशे में लोग अभद्र टिप्पणी करते हैं। इसके अलावा भी बहुत सारे नुकसान हैेें। गरीब आदमी दिन भर की मेहनत की कमाई शाम को शराब में उड़ा देता है। परिवार के साथ मार-पिटाई करता है। यह समस्या मिडिल क्लास से लेकर लोवर क्लास तक की है।
ताहिरा हसन राष्टï्रीय उपाध्यक्ष, एपवा

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