एकेटीयू के लचर रवैये से जा सकती है कॉलेजों की मान्यता

  • एकेटीयू से सम्बद्ध 608 कॉलेजों की मान्यता पर मंडरा रहा खतरा
  • 31 मई तक देना है मान्यता, अब बचे हैं सिर्फ चार दिन

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी एकेटीयू से संबद्ध सभी इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेजों में पाई गई अनियमितता को लेकर शासन में रिपोर्ट भेजी गई है। कोर्ट के नियमों के आधार पर इन कॉलेजों का नवीनीकरण 31 मई तक हो जाना चाहिए था। इन चार दिनों में ऐसे सभी कॉलेजों की जांच और नवीनीकरण की प्रक्रिया समय से पूरा कराना एकेटीयू के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।
बताते चले कि एकेटीयू से सम्बद्ध लगभग 608 कॉलेजों में लगभग 20 हजार फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर मिली शिकायत पर एकेटीयू ने कार्रवाई कर शासन को जांच रिपोर्ट सौंपी है। वहीं ऐसे अधिकतर कॉलेज हैं जहां के छात्रों ने कॉलेजों पर अधिक फीस वसूलने का आरोप लगाया है। लम्बे समय से इन कॉलेजों की शिकायत एकेटीयू से की जा रही है, बावजूद इसके एकेटीयू ने कार्रवाई का लचर रवैया अपना रखा था। एकेटीयू पर दबाव पडऩे के कारण ऐसे कॉलेजों पर कार्रवाई के बजाय फाइन लगाया गया है।
दाखिले के समय कम और बाद में बढ़ा देते हैं फीस
विश्वविद्यालय से संबद्ध अधिकांश कॉलेजों के खिलाफ छात्रों ने शिकायत दर्ज कराई है कि कॉलेज पहले वर्ष दाखिले के दौरान कम फीस लेते हैं, लेकिन इसके बाद दूसरे वर्ष से अधिक फीस वसूलना शुरू कर देते हैं। कॉलेज दाखिले के दौरान फीस की कोई स्पष्ट जानकारी भी नहीं देते। दाखिले के बाद बढ़ी फीस देने को छात्र मजबूर होते हैं।
कॉलेज वेबसाइट पर फीस का ब्योरा करें सार्वजनिक
एकेटीयू ने कॉलेजों में वसूली के आरोप पर निर्देश दिया कि कॉलेजों को वेबसाइट पर फीस का ब्योरा सार्वजनिक करना होगा। किस-किस मद में फीस ली जा रही है इसकी पूरी जानकारी देनी होगी। ऐसा नहीं करने वाले कॉलेजों के खिलाफ विश्वविद्यालय की ओर से सख्त कार्रवाई की जाएगी। विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक कॉलेज छात्रों से सिर्फ वही फीस ले सकेंगे जिसकी जानकारी वेबसाइट पर सार्वजनिक होगी। वेबसाइट पर फीस का ब्योरा सार्वजनिक होने से छात्रों को दाखिले के बाद किसी तरह की समस्या नहीं होगी। इसी के साथ कॉलेज वर्ष में सिर्फ एक बार ही फीस बढ़ा सकेंगे और इसके लिए उन्हें विश्वविद्यालय से अनुमति भी लेनी होगी। इन निर्देशों का भी कॉलेजों ने पूरी तरह से पालन नहीं किया है।
जानकारी मिलने के बाद भी देर से शुरू की कार्रवाई
फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति के बारे में एकेटीयू को करीब एक माह पहले ही जानकारी मिल गई थी। उसके बाद भी एकेटीयू ने कार्रवाई नहीं की। सूत्रों की माने तो एकेटीयू इन कॉलेजों से मोटी रकम कमाने के लिए ही कार्रवाई नहीं कर रहा था। कॉलेज अपनी मान्यता बचाने के लिए एकेटीयू को मुह मांगा पैसे देने को तैयार हो सकते हैं।
31 मई तक कॉलेजों का होना चाहिए नवीनीकरण
नियम के अनुसार हर साल इन एकेटीयू कॉलेजों की मान्यता का नवीनीकरण कराया जाता है। यह प्रक्रिया एकेटीयू को 31 मई तक हर हाल में पूरी करनी होती है। इस प्रक्रिया में कॉलेजों के डाक्युमेंट के साथ अन्य जरूरी प्रक्रियाओं को पूरी हो जानी चाहिए थी, जो अब तक नहीं हो सकी है।
एकेटीयू के सामने चुनौती
सूत्रों की माने तो विवि को एक कॉलेज पर कार्रवाई करने में लगभग एक से दो महीना लग जाता है। कभी-कभी तो एक साल का भी वक्त कम पड़ जाता है। अब इन 608 दोषी कॉलेजों पर तीन से चार दिन के भीतर कार्रवाई व इनका नवीनीकरण करना विवि प्रशासन के लिए कड़ी चुनौती से कम नहीं है। इस साल का नवीनीकरण अब तक नहीं हो सका है।
प्रशासन को भेजी है रिपोर्ट
विवि प्रशासन ने आखिरकार ऐसे सभी कॉलेजों की जांच पूरी कर इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी है। इस संबंध में जिम्मेदारों का कहना है कि हम खुद कोई कार्रवाई नहीं करेंगे। रिपोर्ट के आधार पर शासन से जो भी कार्रवाई करने का निर्देश मिलेगा वह किया जाएगा। फिर वह चाहे कॉलेजों से फाइन लेकर उन्हें छोडऩा हो या फिर उनकी मान्यता रद्द करनी हो। यह फैसला शासन के निर्देश के आधार पर ही लिया जाएगा।

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