उर्दू के क्षेत्र में भी है बेहतर भविष्य

2012 से रिसर्च के लिए गैर मुस्लिम व विदेशी छात्र रिसर्च के लिए आ रहे है

Capture हिना खान
लखनऊ। उर्दू महज एक ‘जबान’ ही नही है। उर्दू के क्षेत्र में युवाओं के लिए बहुत सारे अवसर उपलब्ध है। लोगों को लगता है कि उर्दू भाषा का इस्तेमाल सिर्फशेरो-शायरी के लिए ही होता है, पर ऐसा नहीं हैं। उर्दू के क्षेत्र में अनेक अवसर उपलब्ध है। इसीलिए मुस्लिम ही नहीं हिंदू छात्रों के अलावा विदेशों से भी छात्र लखनऊ विश्वविद्यालय में रिसर्च करने आ रहे है।
कुछ सालों पहले तक उर्दूं भाषा को बचाने के लिए मुहिम चलायी गई थी। आज स्थिति में बहुत सुधार है। उर्दू भाषा में कई क्षेत्र में करियर बनाया जा सकता है। सिविल सर्विस के साथ-साथ वकालत, शिक्षण अनुवादक के साथ विदेशों में भी अच्छे मौके उपलब्ध है। लखनऊ विश्वविद्यालय में भी उर्दूं विभाग में 2012 से रिसर्च के लिए गैर मुस्लिम व विदेशी छात्र रिसर्च के लिए आ रहे है। यह संख्या हर साल बढ़ रही है। विश्वविद्यालय में उर्दृं में रिर्सच कर रहे अजय सिंह का कहना है कि बचपन से ही उर्दू पसंद है। इससे मुझे एक अलग सा लगाव है जिसके बाद मैं ने इसे अपने करियर के रूप में चुना है। ये एक ऐसा विषय है जिसमें जितना डूबते जाओ उतना ही इससे लगाव बढ़ जाता है। उर्दू में जितनी मिठास है उतनी किसी जबान में नहीं है। वरजीनियां से आये जार्ज जोसेफ बेटर विवि से हिन्दुस्तानी मीडिया व दलित लिटरेचर पर रिसर्च कर रहे है। वह कहते है कि हिन्दुस्तान और यहां की भाषा उर्दू में जो बात है वह किसाी और देश में नहीं है। उर्दू में सीखने के लिए बहुत कुछ है। 2014 में उर्दू अकादमी अवार्ड से सम्मानित अफसाना निगार राजीव प्रकाश गर्ग ऊर्फ साहिर का कहना है कि उर्दू हिन्दुस्तानी जबान है। इसकी मिठास और नफासत की वजह से यह लखनऊ की पहचान है। मुझे बचपन से उर्दू से मोहब्बत है। उर्दू की मोहब्बत ने मुझे शायर और अफसानानिगार बना दिया है।

उर्दू में भी बना सकते हैं बेहतर कॅरियर
लखनऊ विश्वविद्यालय के उर्दू विभागाध्यक्ष प्रो. अब्बास रज़ा नय्यर कहते है कि उर्दू से आप कई अलग-अलग क्षेत्र में करियर बना सकते है। वकालत को ले लीजिए। वकालत 700 साल पूरानी है। इसके अधिकतर दस्तावेज और धाराएं फारसी और उर्दू में है तो इसमें भी अच्छा मौका है। सिविल सर्विस में भी उर्दू की मांग है। फिल्मों में गाने गज़ल व स्क्रिप्ट राइटिंग में भी उर्दू की जरुरत होती है। वहीं विदेशों में अधिकतर देशों में उर्दू की मांग है, खासकर इंडियन एम्बेसी में अनुवादक की आवश्यकता होती है। इसमें भी करियर बनाया जा सकता है। मीडिया में भी उर्दू की मांग है।

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