उम्मीदों के नववर्ष पर लें नए संकल्प

हर बीता वर्ष अपने साथ तमाम दुखद और सुखद यादें छोडक़र जाता है। यह तमाम गतिविधियों का लेखा-जोखा होता है। इसी पर लोग अपने भविष्य की बुनियाद रखते हैं। यह बुनियाद जितनी मजबूत होगी, मनुष्यता उतनी ही विशाल होगी। नववर्ष में सभी को एक दूसरे से उम्मीद होती है। परिवार, दोस्त, पड़ोसी और सरकार सभी इसमें शामिल होते हैं। ये उम्मीदें कई बार सीमित और कई बार असीमित होती हैं।

sajnaysharmasaनए साल का आगाज हो चुका है। लोग बांहे फैलाए अपने-अपने अंदाज में इसका स्वागत कर रहे हैं। पूरा विश्व जश्न में डूबा है। हर ओर आनंद ही आनंद दिख रहा है। पार्टियों का दौर चल रहा है। गीत-संगीत की धुन में लोग थिरक रहे हैं। आतिशबाजियों से आसमान सतरंगी हो चला है। लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं दे रहे हैं। वे आज गिले-शिकवे के मूड में नहीं हैं। आज उत्सव का दिन है। यह उत्सवधर्मिता मनुष्य की मूल प्रवृत्ति है। यह जश्न नई उम्मीद का प्रतीक है। नववर्ष के प्रथम सूर्य ने उम्मीदों को पंख लगा दिए हैं। यह साल पिछले वर्ष घटी दुखद घटनाओं को भूलने का आह्वïान कर रहा है। वह भूल-सुधार की नसीहत भी देता है। नए सबक सीखने की प्रेरणा देता है ताकि हम विकास पथ पर लगातार आगे बढ़ते रहें। सबसे बढक़र यह वर्ष हमें एक संपूर्ण इंसान बनने की प्रेरणा देता है। दरअसल हर बीता वर्ष अपने साथ तमाम दुखद और सुखद यादें छोडक़र जाता है। यह तमाम गतिविधियों का लेखा-जोखा होता है। इसी पर लोग अपने भविष्य की बुनियाद रखते हैं। यह बुनियाद जितनी मजबूत होगी, मनुष्यता उतनी ही विशाल होगी। नए वर्ष में सभी को एक दूसरे से उम्मीद होती है। परिवार, दोस्त, पड़ोसी और सरकार सभी इसमें शामिल होते हैं। ये उम्मीदें कई बार सीमित और कई बार असीमित होती हैं। इसके बीच अंतर करना काफी कठिन होता है। इस झीने अंतर को समझना जरूरी होता है। यह समझ तभी आती है जब उम्मीदें तर्क और सत्य की कसौैटी पर कसी हो। भारत की जनता को भी नववर्ष पर सरकार से तमाम उम्मीदें हैं। किसानों को उम्मीद है कि सरकार कुछ ऐसा करे कि उनका जीवन सरल हो सके। वे आर्थिक विपन्नता से मुक्त हो सकें। उन्हें कर्ज में डूबकर आत्महत्या करने पर मजबूर न होना पड़े। जनता को नोटबंदी से हो रही परेशानियों से निजात मिलने की उम्मीद है। उम्मीद है कि इस बार सरकार महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों पर नियंत्रण लगा सकेगी। वे महफूज रहेंगी। उन्हें गर्भ में ही नहीं मारा जाएगा। नवजात बच्चियों को कोई मां सडक़ों पर मरने के लिए नहीं छोड़ देगी। समाज के हाशिए में जीवन जी रहे लोगों को भी उम्मीद है कि नववर्ष पर सरकार उनके जीवन की राहों में बिछे कांटों को कुछ कम करेगी। बुद्धजीवियों को उम्मीद है कि एक ऐसे समाज की रचना करने में वे सफल होंगे जहां मानवता ही अहम होगी। तो आइए नववर्ष पर संकल्प लें कि हम एक संपूर्ण मनुष्य बनेंगे।

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