उपभोक्ताओं की मिलीभगत से जारी है घरेलू सिलेंडर की कालाबाजारी

 प्रभात तिवारी

Captureलखनऊ। सरकार घरेलू सिलेंडर की कालाबाजारी रोकने की लाख कोशिशें कर रही है। इसके बावजूद सिलेंडर की कालाबाजारी के काम में लगे लोग कोई न कोई रास्ता निकाल ही लेते हैं। इसकी मिसाल राजधानी में बखूबी देखने को मिल रही है, यहां आजकल घरेलू सिलेंडर की कालाबाजारी उपभोक्ताओं के साथ मिलकर की जा रही है। उपभोक्ता अपने कोटे का बचा हुआ सिलेंडर सब्सिडी की रकम के बदले डिलीवरी मैन को उपलब्ध करवा रहे हैं। जिसको खुलेआम 250 रुपये प्रति सिलेंडर अतिरिक्त लेकर बाजार में बेचा जा रहा है। इस शातिर खेल की भनक पेट्रोलियम कंपनियों के अलावा आपूर्ति विभाग के अधिकारियों को भी है लेकिन लिखित शिकायत के अभाव में सब कुछ जानकर भी चुप्पी साधे हुए हैं।
केन्द्र सरकार ने घरेलू सिलेंडर पर दी जाने वाली सब्सिडी सीधे उपभोक्ताओं के खाते में भेजने के लिए डीबीटीएल (डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर लिमिट) योजना शुरू की थी। इसमें घरेलू उपभोक्ताओं को एक साल में सब्सिडी वाले 12 घरेलू सिलेंडर दिये जाने का नियम है। उपभोक्ताओं को सिलिंडर की ऑनलाइन बुकिंग करवानी होती है। इसके बाद बुकिंग नंबर और डिलीवरी से संबंधित जानकारी उपभोक्ता के मोबाइल नंबर पर एमएमएस से दी जाती है। होम डिलीवरी के दौरान उपभोक्ता को सिलेंडर का बाजार मूल्य देना पड़ता है। इसके ठीक 48 घंटे के अंदर घरेलू सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी उपभोक्ता के बैंक खाते में पहुंच जाती है। इसी धनराशि के बदले आजकल घरेलू सिलेंडर को बाजार में बेचने का खेल चल रहा है। जिस उपभोक्ता को साल में मिलने वाले 12 सिलेंडर का कोटा पूरा नहीं हो पाया है। वह डिलीवरीमैन के साथ साठ-गांठ कर अपने कोटे का सिलेंडर बाजार में बेच रहा है। इसमें डिलीवरीमैन को प्रति सिलेंडर 250 रुपये का लाभ हो रहा है।
व्यापारी उठा रहे फायदा
राजधानी में फूड स्टाल, रेस्टोरेंट, चाय की दुकान और होटलों में घरेलू सिलेंडर का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। इन दुकानदारों को घरेलू सिलेंडर की सप्लाई पेट्रोलियम कंपनियों के डिलीवरीमैन ही करते हैं। जिले में अवैध री-फिलिंग के दर्जनों मामलों में गैस एजेंसियों से जुड़े डिलीवरीमैन को रंगेहाथों पकड़ा जा चुका है। इनके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई भी की गई लेकिन घरेलू सिलेंडर की कालाबाजारी का खेल जारी है। दरअसल सिलेंडर की कालाबाजारी में लगे लोग हर नियम का कोई न कोई तोड़ निकाल लेते हैं। इसी वजह से उपभोक्ताओं को सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी की रकम दिलाने का लालच देकर घरेलू सिलेंडर की कालाबाजारी की जा रही है। कालाबाजारी के काम में लगे लोग चार घरेलू सिलेंडर में से थोड़ी-थोड़ी एलपीजी निकालकर अवैध री-फिलिंग से पांच सिलेंडर बनाते हैं। इसमें प्रति सिलेंडर 250 रुपये का लाभ होता है। इसके अलावा पांचवे सिलेंडर की पूरी कीमत अतिरिक्त मुनाफे के रूप में होती है। जबकि सरकार ने घरेलू सिलेंडर पर दी जाने वाली सब्सिडी की रकम सीधे उपभोक्ताओं के खाते में भेजने का फैसला कालाबाजारी रोकने के लिए किया था। इसके साथ ही सभी फूड स्टाल, रेस्टोरेंट, चाय की दुकानों, कैटरर्स और होटलों में व्यावसायिक सिलेंडर इस्तेमाल करना अनिवार्य कर दिया था। इसके बावजूद बहुत ही कम दुकानों, होटलों और फूड स्टालों पर व्यवसायिक सिलेंडर का इस्तेमाल होता है। हर जगह खुलेआम घरेलू सिलेंडर का इस्तेमाल किया जा रहा है।

सब्सिडी कोटा का सिलेंडर बुक करवाने की होड़

जिले में एलपीजी उपभोक्ताओं कुल संख्या 7,65,000 है। इसमें इंडेन, एचपी और बीपी की एजेंसियों की कुल संख्या 53 है। इन सभी एजेंसियों पर दिसंबर महीने के आखिरी सप्ताह से घरेलू सिलेंडर की बुकिंग के आंकड़ों में अचानक बढ़ोत्तरी हुई है। एजेंसियों पर औसतन एक दिन में बुक होने वाले 200 सिलेंडर की बजाय 250-300 सिलेंडर की बुकिंग होने लगी है। इसका कारण सब्सिडी पर मिलने वाले सिलेंडर का कोटा लैप्स होने की लालच में की जा रही बुकिंग है। जो घरेलू सिलेंडर की आपूर्ति में विलंब की प्रमुख वजह बन रही है। जबकि सरकार ने घरेलू और कामर्शियल दोनों तरह के सिलेंडर की कीमत में हाल के दिनों में कमी कर दी है। अब 14.2 किग्रा. वजन का घरेलू सिलेंडर 553.50 रुपये में मिल रहा है। जबकि पहले घरेलू सिलेंडर की कीमत 615 रुपये थी। इसमें उपभोक्ताओं को पहले 189.74 रुपये की सब्सिडी मिलती थी, जो सिलेंडर की कीमत में कमी आने के बाद 128.24 रुपये हो गई है। जबकि 19 किग्रा. वजन के कामर्शियल सिलेंडर की कीमत घटकर 1099.50 रुपये हो गई है। जो कि पूर्व में 1207 रुपये प्रति सिलेंडर थी। इन सबके बावजूद घरेलू सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी की लालच में कालाबाजारी करने वालों का सहयोग किया जा रहा है। जो सरकार की मंशा पर पानी फेरने वाला कदम साबित हो रहा है।

बुकिंग के आंकड़ों में बढ़ोत्तरी

ममता गैस एजेंसी के प्रबंधक जितेन्द्र कुमार के मुताबिक पिछले दो महीनों से घरेलू सिलेंडर की बुकिंग के आंकड़ों में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। इसलिए सिलेंडर की होम डिलीवरी में थोड़ा विलंब हो रहा है। स्टेप्को गैस सर्विस के प्रबंधक बशीर के मुताबिक हर साल फरवरी-मार्च के महीने में घरेलू सिलेंडर की बुकिंग कराने वालों की संख्या 15-20 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। इसकी वजह से समय पर उपभोक्ताओं को डिलीवरी देने का दबाव बनने लगता है। हमें प्लांट से अतिरिक्त सिलेंडर की डिमांग करनी पड़ती है लेकिन इस बार पहले के अनुभवों की वजह से अतिरिक्त बुकिंग का कोई खास फर्क नहीं पड़ रहा है। ये अलग बात है कि सिलेंडर की बुकिंग करवाने के बाद उपभोक्ताओं को सिलेंडर मिलने में तीन से चार दिन का समय लग रहा है। इस गैप को भरने की हर संभव कोशिश की जा रही है। इसी प्रकार इंडेन, एचपी और बीपी की अन्य गैस एजेंसियों पर भी रोजाना होने वाली घरेलू सिलेंडर की बुकिंग के आंकड़ों में बढ़ोत्तरी हुई है।

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