उद्यमियों ने केंद्रीय मंत्रियों को सुनाई खरी खोटी

  • इंडस्ट्रियल यूनाईटेड डेवलपमेंट फाउंडेशन के सम्मेलन में शामिल हुए मंत्री

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। इंडस्ट्रियल यूनाईटेड डेवलपमेंट फाउंडेशन (आइयूडीएफ) के प्रथम उद्यमी महासम्मेलन में केंद्रीय खाद्य उपभोक्ता मामले एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री रामविलास पासवान और सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योग मंत्री कलराज मिश्र को उद्यमियों ने काफी खरी खोटी सुनाई। उद्यमियों ने उत्पीडऩ के खिलाफ विभागवार श्वेतपत्र जारी करने के साथ ही अपनी समस्याओं के समाधान की मांग भी की। उद्यमियों ने केन्द्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकार के खिलाफ भी निशाना साधा है।
साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में रविवार को आयोजित महासम्मेलन में विभिन्न जिलों के उद्यमियों ने दोनों मंत्रियों के समक्ष अपनी-अपनी समस्याएं गिनाई और राइस मिलों की बदहाली के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। जिस पर पासवान ने मिलर्स की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर समाधान का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा किसान व उद्यमियों का उत्पीडऩ व भ्रष्टाचार किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र ने विभागीय उपलब्धियों को गिनाया और छह माह के भीतर तस्वीर बदलने का दावा किया।
इस अवसर पर अध्यक्ष देव भट्टाचार्य ने 18 सूत्री मांगपत्र प्रस्तुत करते हुए एफसीआई के अधिकारियों पर मनमानी के आरोपों की झड़ी लगा दी। उन्होंने पासवान से कहा कि कि एफसीआई का उत्पीडऩ जारी रहने से 40 से 50 प्रतिशत मिलें बंद हो चुकी हैं। इसका नुकसान किसानों को झेलना पड़ता है। धान में नमी संबंधी मानक निर्धारण की आड़ में शोषण के मुद्दे को भी उठाया गया और कहा मिलर्स को आर्थिक शोषण झेलना पड़ता है। चावल रिकवरी 67 प्रतिशत से 63 फीसद करने की मांग करते हुए भट्टाचार्य ने एफसीआइ के गोदामों में पल्लेदारों की मनमानी को सख्ती से रोकने की मांग की। वहीं भुगतान नीति लागू कराने और समय सीमा तय करने का मुद्दा भी पुरजोर ढंग से उठाया गया। आइयूडीएफ के महामंत्री शैलेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि राज्य सरकारें धान खरीद का कार्य नहीं करें तो ही बेहतर है। यह काम एफसीआई को ही करना चाहिए।

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