उगते सूर्य को अघ्र्य देकर व्रतियों ने खोला उपवास

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लखनऊ। उगते सूर्य को अघ्र्य देने के साथ ही लोक आस्था के पर्व छठ का समापन हो गया है। आज सुबह चार बजे से ही घाटों पर व्रती महिलाएं उगते सूर्य को अघ्र्य देने के लिए राजधानी में गोमती नदी के तट से लेकर जगह-जगह बने तालाबों और पोखरों पर गईं। इसके अलावा, कई व्रतियों ने अपने घरों में बनाए गए कृत्रिम जलकुंडों में सूर्य को अघ्र्य अर्पित किया। यहां महिलाओं ने सूर्य की उपासना की और अपने परिवार की भलाई के लिए उनका आशीर्वाद लिया। इसके साथ ही चार दिन से चल रहा छठ पूजा उत्सव समाप्त हो गया। इस दौरान पूरे लखनऊ में छठ को लेकर उत्साह का माहौल दिखा।

सुबह के अघ्र्य को लेकर लखनऊ की गोमती नदी के किनारे विशेष घाटों की व्यवस्था की गई थी और साथ ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम भी किए गए थे। सूर्योदय से काफी पहले से ही श्रद्धालुओं का तांता गोमती के तटों पर पहुंचने लगा। घाटों पर मेले जैसा माहौल था। सुबह काफी ठंड थी, बावजूद इसके श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। जैसे-जैसे उजाला बढ़ता गया, श्रद्धालु गोमती के किनारे अघ्र्य देने की तैयारी करने लगे। अंधेरे में ही व्रती महिलाएं और उनके परिजन सूप में फल, मिठाई, ईख और सिंदूर सहित अन्य पूजन सामग्री लेकर तटों पर पहुंचने लगे थे। बेदी पर पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं को बस इंतजार था सूरज निकलने का। जैसे ही सूरज की लालिमा दिखी महिलाएं गोमती नदी के ठंडे पानी में उतरीं और अघ्र्य देने का कार्यक्रम शुरू हुआ। ठंडे पानी में कमर तक उतरकर श्रद्धालुओं ने अघ्र्य दिया और दीया जलाकर पूजा पूरी की। पूजा में व्रती महिलाओं के पति व अन्य परिजनों ने भी हिस्सा लिया। इस अवसर पर घाट पर एक-दूसरे को लोगों ने प्रसाद भी बांटा।

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