इशरत पर हेडली का खुलासा मोदी-शाह के लिए राहत

 नीरज कुमार दुबे 

26/11 मामले में मुंबई की एक अदालत के समक्ष दी गई गवाही में पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली ने जो खुलासे किये हैं उससे निश्चित ही भारत सरकार को राहत मिली है। एक तो मुंबई हमला मामले में पाकिस्तान की साजिश का खुलासा होने से इस्लामाबाद बैकफुट पर आ गया है तो दूसरी तरफ इशरत जहां के बारे में हेडली ने यह बताकर कि वह लश्कर की आत्मघाती हमलावर थी, भारत में कांग्रेस तथा जद-यू सहित अनेक विपक्षी दलों को अपने पूर्व के बयानों से पलटने पर मजबूर कर दिया है।
गौरतलब है कि इशरत को गुजरात में 15 जून 2004 को तीन अन्य लोगों के साथ मुठभेड़ में मार गिराया था। तत्कालीन गुजरात सरकार का कहना था कि यह पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य थे जोकि तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या के इरादे से आये थे। जबकि विपक्ष का आरोप था कि यह फर्जी मुठभेड़ थी और इसके लिए कई मानवाधिकार संगठनों तथा राजनीतिक दलों ने दस वर्षों तक नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर हमला जारी रखा। हमले इतने बढ़ गये थे कि तत्कालीन भाजपा आलाकमान तक के लिए मोदी और शाह का बचाव कर पाना मुश्किल होता था। इस मामले में महाराष्ट्र की तत्कालीन सरकार से संबद्ध कुछ लोग तो इशरत के घर जाकर आर्थिक मदद भी देकर आये थे जबकि उस समय के केंद्रीय गृहमंत्री के पास भी इस बात के पुख्ता सबूत थे कि इशरत आत्मघाती हमलावर थी। लेकिन इस मुठभेड़ की घटना को जिन राजनीतिक दलों और मीडिया के जिस वर्ग ने हमेशा ‘फर्जी मुठभेड़’ के नाम से पुकारा गया उनके लिए अब शर्मसार होने का समय है।
हेडली ने साथ ही पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई, पाकिस्तान सेना और लश्कर-ए-तैयबा की मिलीभगत की बात उजागर की है। भारत के यह आरोप एक बार फिर साबित हो गये हैं कि आतंकवाद को शह और बढ़ावा देना पाकिस्तान की ‘सरकारी’ नीति बना हुआ है। भारत की ओर से संबंध सुधारने के कितने ही प्रयास क्यों न किये जाएं, पाकिस्तान की ओर से सदा पीठ में छुरा घोंपा जाता रहा है। बात कारगिल और पठानकोट तक ही सीमित नहीं है आईएसआई ने किस तरह से भारत में अपने नेटवर्क का जाल बिछाया हुआ है यह बात हाल ही में हुई कुछ गिरफ्तारियों से साबित हुई है। साथ ही पाकिस्तान की ओर से सीमा पार से लगते इलाकों में मादक पदार्थों की तस्करी जमकर की जा रही है और दुख की बात यह है कि इसमें कुछ अपने ही लोग तस्करों का साथ दे रहे हैं।
हैरानी होती है कि छोटी सी छोटी बात पर भी प्रतिक्रिया जताने वाला पाकिस्तान हेडली के खुलासों पर चुप क्यों है? और पाकिस्तानी मीडिया ने हेडली संबंधी खबरों से क्यों दूरी बनायी हुई है? हालांकि पाकिस्तान के पूर्व गृह मंत्री रहमान मलिक ने हेडली की गवाही को ‘‘झूठ का पुलिंदा’’ बताते हुए भारत पर आरोप लगाया है कि वह पाकिस्तानी-अमेरिकी आतंकवादी के गढ़े हुए इकबालिया बयान से पाकिस्तान को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान को यह बताना चाहिए कि कैसे किसी आतंकवादी संगठन का सदस्य (हेडली) उसकी खुफिया एजेंसी और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठकें करता है और उनसे निर्देश प्राप्त कर काम को अंजाम पहुंचाता है? जबकि पाकिस्तान ने सार्वजनिक रूप से यह वादा कर रखा है कि वह अपनी धरती का इस्तेमाल किसी देश के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं होने देगा। मुंबई हमला मामले में अब यह बात साफ हो चली है कि कदम दर कदम आतंकियों को पाक रक्षा प्रतिष्ठान का पूरा समर्थन हासिल था और सरकारी एजेंसियों के बीच इस मामले में बेहतर तालमेल था। पाक रक्षा प्रतिष्ठान ने ना सिर्फ वित्तीय रूप से बल्कि सैन्य और मनोवैज्ञानिक रूप से भी लश्कर को पूरी मदद पहुंचाई थी।
उल्लेखनीय है कि हेडली ने स्वीकार किया है कि वह वर्ष 2006 की शुरूआत में आईएसआई के मेजर इकबाल से लाहौर में मिला था। मेजर इकबाल ने उसे भारत की खुफिया सैन्य जानकारी एकत्र करने के लिए कहा था। हेडली ने बताया है कि लश्कर-ए-तैयबा ने पहले ताज होटल में भारतीय रक्षा वैज्ञानिकों पर हमला बोलने की योजना बनाई थी और इस संगठन की मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर पर भी हमले की योजना थी। यही नहीं मुंबई हमला दो असफल प्रयासों के बाद अंजाम दिया गया। इस हमले की पूरी कमान जकीउर रहमान लखवी ने हाफिज सईद के निर्देश पर संभाली थी।
इधर, भारत अब भी पठानकोट वायुसेना अड्डे पर हुए आतंकी हमला मामले पर पाकिस्तान की कार्रवाई रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है और पाकिस्तान की ओर से उठ रहे विपरीत कदमों से दिन पर दिन चौंक भी रहा है। भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने हुर्रियत नेताओं के साथ मुलाकात कर और ‘कश्मीर राग’ अलाप कर भारत को एक बार फिर नाखुश करने का काम किया है। बताया जा रहा है कि हुर्रियत नेताओं ने इस मुलाकात में बासित से कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत होने से कश्मीरियों पर भारतीय सेना की ओर से किये जा रहे कथित अत्याचार से ध्यान हट जाता है।

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