इधर बंट रहे थे सम्मान, उधर लोग जा रहे थे श्मशान

-संजय शर्मा
KK1लखनऊ। यह सही है कि विभागीय मंत्री ही अखिलेश सरकार की साख को बट्टा लगा रहे हैं। खनन महकमा इसमें सबसे आगे है। प्रदेश में खनन को लेकर अब हत्याए भी होने लगी हैं। कल एक ओर खनन मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति राजस्व कलेक्शन में उम्दा कार्य करने वाले अधिकारियों को गन्ना किसान सभागार में सम्मानित कर रहे थे तो दूसरी ओर खनन माफिया बिजनौर में खून की होली खेल रहे थे।
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में दो खनन माफिया गुटों के बीच वर्चस्व की लड़ाई में तीन लोगों की मौत हो गई। पुलिस के अनुसार माफिया गुटों के बीच की जंग अवैध खनन से संबंधित बिजनौर में देर रात दो माफिया गुटों के आपसी संघर्ष में तीन लोगों की मौत हो गई। जिले के पत्थरवाला गांव के गुरमीत, तेजपाल और बब्बू ट्रैक्टर टॉली में पत्थर भरकर ले जा रहे थे। इसी दौरान वाहनों पर सवार होकर मौके पर पहुंचे दूसरे गुट ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियों से हमला कर दिया। हमले में गुरमीत और तेजपाल की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बब्बू ने अस्पताल ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया। जिले के पुलिस अधीक्षक हरिनारायण सिंह ने बताया कि पत्थरों के अवैध खनन को लेकर दो गुटों के बीच संघर्ष का मामला है। अवैध खनन के मामले में खून की होली पहली बार नहीं खेली गयी है। बरेली, बाराबंकी में इससे पहले हत्याएं हो चुकी हैं। ऐसे में अवैध खनन यूपी की एक बड़ी चिंता बनती जा रही है।
प्रदेश के भूतत्व एवं खनिकर्म मंत्री श्री गायत्री प्रसाद प्रजापति ने गन्ना संस्थान प्रेक्षागृह में खनन राजस्व प्राप्ति में उत्कृष्ट कार्य करने वाले भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के अधिकारियों/ कर्मचारियों को सम्मानित किया। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में विभाग का समग्र रूप से विकास हुआ है। जहां एक ओर राजस्व प्राप्ति में वृद्धि हुई है, वहीं विभाग के कार्यों में तेजी से विकास के साथ ही नये पदों का सृजन तथा अधिकारियों/ कर्मचारियों को प्रोन्नति दी गई हैं।
प्रजापति ने कहा कि फाइनेंशियल ईयर 2014-15 में कोयला को छोडक़र अन्य खनिजों के लिए निर्धारित लक्ष्य 765 करोड़ रुपए एवं कोयला सहित लक्ष्य 1100 करोड़ रुपए के सापेक्ष अन्य उप खनिजों से 765 करोड़ रुपए के विपरीत 778.67 करोड़ रुपए की उपलब्धि रही। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि लक्ष्य के विपरीत 100 प्रतिशत से भी अधिक रही, जबकि कोयला सहित उपलब्धि 1029.28 करोड़ रुपए रही। उन्होंने कहा कि यदि भारत सरकार के उपक्रम एन.सी.एल. से यह धनराशि प्राप्त हो जाती तो लक्ष्य के विपरीत 100 प्रतिशत से भी अधिक उपलब्धि होती। खनिज राजस्व में गत वर्ष में कुल उपलब्धि 1029.28 करोड़ रुपए पूर्ववर्ती वर्षों में प्राप्त राजस्व की अपेक्षा एक कीर्तिमान है।

पूरा मामला बेहद संगीन और हमारे संज्ञान में है। हम दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करेंगे। आप खुद देख रहे हैं कि पूरे प्रदेश में सभी जिम्मेदार लोगों को एलर्ट किया जा चुका है और यह विभागीय कोशिशों का ही नतीजा है कि राजस्व में बढ़ोत्तरी हो रही है। इक्का दुक्का घटनाओं से पूरे विभाग को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है
-गायत्री प्रसाद प्रजापति,
खनन मंत्री

बदायूं के घूसखोर सीएमओ को बचाने में जुटे प्रमुख सचिव स्वास्थ्य
– 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। बदायूं के सीएमओ घूसकांड में जो शर्मनाक तस्वीर सामने आ रही है उसने साफ कर दिया है कि भ्रष्टïाचार की जड़े कितनी गहरी हैं और इनका कोई उपचार नहीं है। जिस सीएमओ के रिश्वत लेने की बात साबित हो गयी थी उसे एक माह बीतने पर भी सिर्फ तबादले पर भेजा गया। उसकी जगह कोई तैनाती नहीं की जा रही है जिससे वह अदालत से स्टे हासिल कर लें। इस सम्बन्ध में प्रमुख सचिव अरविन्द कुमार की भूमिका खासी संदिग्ध हो रही है।
बदायूं सीएम के सांसद भाई धर्मेन्द्र यादव का निर्वाचन क्षेत्र है। यहां सीएमओ और डिप्टी सीएमओ ने निजी नर्सिंग होम के रजिस्ट्रेशन के नाम पर घूस इक_ïी की थी और राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त विधायक आबिद रजा के दखल के बाद ये रिश्वत वापस की गयी। जिला निगरानी की समिति की बैठक में दो सांसदों और चार विधायकों के सामने सीएमओ ने स्वीकार किया था कि ये रिश्वत ली गयी थी मगर विधायक के दखल के बाद रिश्वत वापस कर दी गयी।
बरेली के एडी डा. सुबोध ने इस मामले की जांच करने पर पाया था कि आरोप सही हैं। उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट प्रमुख सचिव अरविन्द कुमार को सौंप दी। इसके बाद पैसे का घिनौना खेल शुरु हुआ आरोप है कि दस लाख रुपये की धनराशि इस बात के लिए खर्च की गयी कि सीएमओ का कोई नुकसान न हो। 4पीएम द्वारा लगातार इस मामले को उठाने और सांसद धमेन्द्र यादव के कड़े विरोध के कारण सीएमओ को बरेली एडी आफिस से अटैच किया गया।
कल बरेली के एडी डां. सुबोध बदायूं में सीएमओ का चार्ज दिलवाने के लिए गये हुए थे तभी लखनऊ से आये एक फोन के बाद उन्हें वापस लौटना पड़ा। इस फोन पर कहा गया था कि अभी चार्ज न करायें। बताया जाता है कि प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ने सीएमओ को आश्वस्त कर दिया है कि उनका नुकसान नहीं होगा। इसी के मद्देनजर बदायूं घूस कांड की जांच निदेशक स्तर के एक और अधिकारी को दे दी गयी है।
यह इसलिए किया जा रहा है कि सीएमओ इस बीच अदालत से स्टे ले लें। उनकी नौकरी का सिर्फ एक माह बचा है। ऐसे में बड़े अफसर चाहते हैं कि इस घूसखोर सीएमओ की सम्मान के साथ विदाई हो।
पूछने के लिए सही जगह नहीं है
स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन से जब पूछा गया कि बदायूं घूसकांड में क्या कार्रवाई हुई तो उन्होंने कहा कि सीएमओ और डिप्टी सीएमओ दोनों को हटा दिया गया है। जब उनसे पूछा गया कि इस मामले में दोषी लोगो के खिलाफ एफआईआर दर्ज क्यों नहीं हुई तो उन्होंने कहा कि यह बात यहां मत पूछिए। यह सही जगह नहीं है इस बात को पूछने के लिए। जाहिर है कोई भी इस मुद्दे पर बात करने को राजी नहीं है। कल प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को इस सम्बन्ध में जानकारी लेने के लिए कई बार फोन किया गया। और एसएमएस किये गये मगर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

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