इंस्पेक्टर राज को मिलेगा बढ़ावा, इलाज होगा महंगा

दैनिक स्थापना नियमावली से समाप्त हो जायेगा एकल क्लीनिक का अस्तित्व

  • इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और उत्तर प्रदेश नर्सिंग होम एसोसिएशन कर रहा एक्ट का विरोध

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

Captureलखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने दैनिक स्थापना (रजिस्ट्रीकरण और विनिमय) नियमावली 2016 जारी की है। इस एक्ट के मुताबिक सभी अस्पतालों में मान्यता प्राप्त नर्सों तथा अन्य चिकित्सा सेवाकर्मी को रखना अनिवार्य होगा। वहीं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और उत्तर प्रदेश नर्सिंग होम एसोसिएशन इस एक्ट के विरोध में हैं। आईएमए का कहना है कि ये एक्ट पश्चिमी देशों के मानकों के आधार पर बनाया गया है। इसका असर ये होगा कि जब मेडिकल संस्थान बंद होंगे तो इलाज मंहगा हो जायेगा। ऐसे में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने उत्तर प्रदेश सरकार से दैनिक स्थापना (रजिस्ट्रीकरण और विनिमय) पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।
आईएमए इस एक्ट से होने वाले नुकसान के बारे में जनजागरण अभियान भी शुरू करेगा। अब गरीबों और आम जनता को इलाज के लिए दर-ब-दर भटकना पड़ सकता है। ये खबर गरीबों और आम जनता के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों के लिये भी है, जहां प्राथमिक इलाज भी मुश्किल से मिलता है। सरकार ने दैनिक स्थापना नियमावली 2016 की अधिसूचना जारी कर दी है। आईएमए का मानना है कि ये एक जनविरोधी नियम है, जिससे प्रदेश के कई अस्पताल बंद हो सकते हैं। इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा।
आईएमए की मांग है कि एकल क्लीनिक को उपरोक्त एक्ट से बाहर रखा जाए। क्योंकि,एकल क्लीनिक देश में प्रदान किए जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ की हड्डी है तथा 70 प्रतिशत स्वास्थ्य सेवायें इन्हीं एकल क्लीनिक द्वारा प्रदान की जाती है।

वर्तमान समय में प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के हालात
प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग मौजूदा समय में चिकित्सकों तथा कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। जानकारों की मानें तो मुख्यमंत्री के प्रयासों से स्वास्थ्य महकमे में काफी सुधार हुआ है। इसके बावजूद विभाग में लगातार चिकित्सकों की संख्या कम होती जा रही है। वहीं पैरामेडिकल स्टाफ के पद खाली पड़े हुऐ हैं, जिससे अस्पताल पर मरीजों का दबाव बढ़ रहा है। चिकित्सकों को मरीजों को इलाज मुहैया कराने में समस्या का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी अस्पतालों की बात की जाए तो लगभग 20 हजार से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। जिसमें लगभग 10 हजार पद डाक्टरों के हैं। बाकी के दस हजार नर्स, बेसिक हेल्थ वर्कर तथा सफाई कर्मी शामिल हैं।

जनविरोधी है नियमावली : डॉ. पीके गुप्ता

आईएमए के निर्वाचित अध्यक्ष डॉ. पीके.गुप्ता का कहना है कि दैनिक स्थापना (रजिस्ट्रीकरण और विनिमय) नियमावली 2016 पूरी तरीके से जनविरोधी है। जिस तरह से इस नियमावली में प्रविधान है। उससे गरीब मरीजों का इलाज और मंहगा हो जायेगा। वर्तमान समय में कम संसाधनों के बाद भी निजी अस्पताल काम कर रहे हैं। वहां पर मरीजों को हर प्रकार से स्वास्थ्य लाभ देने की कोशिश की जाती है। इस नियमावली में निजी संस्थानों के लिए जो प्रविधान दिये गये हैं, उसको पूरा करना बहुत ही मुश्किल हो जायेगा। यदि उन नियमों को निजी संस्थान पूरा करने की मंशा रखेगा, तो इसका बोझ भी गरीब जनता पर ही पड़ेगा। इतना ही नही निजी संस्थानों के साथ ही सरकार द्वारा संचालित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं समुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर भी प्रभाव पड़ेगा। नियमावली में दिये मानक की बात करें तो सरकारी अस्पतालों में भी उस मानक को पूरा नहीं किया जा रहा है।

सीएम ने दिया आश्वासन

आईएमए लखनऊ शाखा के सचिव डॉ. विश्वजीत सिंह ने बताया कि आईएमए का प्रतिनिधिमण्डल मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिला था। उन्होंने हमें आश्वासन दिया है कि इस एक्ट पर पुन: विचार किया जायेगा। डॉ. विश्वजीत सिंह ने कहा कि हमें मुख्यमंत्री पर भरोसा है कि जनहित में हमारी जो आपत्तियां हैं, उस पर विचार करायेंगे।

मरीजों के लिए खतरनाक

आईएमए लखनऊ के अध्यक्ष डॉ. विजय कुमार का कहना है कि इस नियमावली के लागू होने से इंस्पेक्टर राज को बढ़ावा मिलेगा। अस्पताल के लिए सर्टिफिकेट लेने के लिए चिकित्सकों को चक्कर लगाना पड़ेगा। साथ ही गैर चिकित्सकीय लोग चिकित्सालय के लिए गाइड लाइन तैयार करेंगे। जो कि चिकित्सा क्षेत्र तथा मरीजों के हित के लिए खतरनाक साबित होगा।

 

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