इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला में जल्द ही बदली जाएंगी मशीनें

नक्षत्रशाला में दिखाए जा रहे दृश्यों की गुणवत्ता बढ़ाने के किए जा रहे प्रयास

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला में जल्द ही पुरानी मशीनों का स्थान नई तकनीक से लैस मशीनें लेंगी। इसके लिए दर्शकों को थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है। ऐसा यहां दृश्य की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिये किया जा रहा है। बदलते समय के साथ वर्षों से लगीं मशीनें ठीक से काम नहीं कर रही हैं। इसको देखते हुये नक्षत्रशाला प्रशासन ने यह निर्णय लिया है।
इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला बनाने के पीछे कई कारण थे। इसका मुख्य कारण विज्ञान की लोकप्रियता को बढ़ावा देना था। शनि ग्रह के आकार की इस खूबसूरत नक्षत्रशाला के इमारत की नींव 28 फरवरी 1988 को रखी गई, जिसके बाद 8 मई को इसका उद्ïघाटन किया गया। यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने 9 मई को इसे आम लोगों के लिए खोल दिया था। 21 मीटर व्यास की इस गोलाकर इमारत को मंच और फव्वारे से घेर कर बनाया गया है। सालों से चल रही इन मशीनों में अब पहले जैसी क्वॉलिटी न होने की वजह से इसे बदलने का फैसला लिया जा रहा है। जिम्मेदारों की मानें तो लोगों को इसमें ज्यादा फर्क नहीं समझ आता है लेकिन दर्शकों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए मशीनों को बदलना ही एक मात्र विकल्प है। इसको बदलने के लिए नक्षत्रशाला को कुछ दिनों के लिए बंद करना पड़ सकता है। इसके लिए बजट आ चुका है बस जल्द ही काम शुरू हो जाएगा।

प्रतिदिन इसमें चलते हैं कई शो
नक्षत्रशाला में एक दिन में चार शो चलते हैं इसमें एक बार में करीब पांच सौ लोग देखते हैं। शनिवार व रविवार को ज्यादा संख्या में दर्शक यहां आते हैं। इन दोनों दिन शो इंग्लिश में चलाया जाता है। इसमें बच्चों से अधिक बड़े शामिल होते हैं। आम दिन में यहां स्कूलों द्वारा बच्चों को शो दिखाने के लिये लाया जाता है।

प्रतियोगिताओं में मिलती है सहायता
नक्षत्रशाला देखने आए शिक्षकों से सवाल करने पर उन्होंने बताया की खगोल के विषय में बच्चों को समझाने का यह एक अच्छा साधन है। प्रतियोगिताओं की तैयारी करने लिए छात्र यहां आकर नक्षत्रों का विजुअल देखते हैं जिससे वह जल्दी उन्हें याद हो जाता है। विषय को सरलता से समझाने के लिए छात्रों को यहां शो दिखाने जाया जात है। जिससे विषयों में रोचकता आती है।

मशीनों के बदलाव से मिलेगी अच्छी क्वॉलिटी
नक्षत्रशाला के स्टेट प्रोजेक्ट को-ऑर्डिनेटर डॉ.अनिल यादव का कहना है कि समय के साथ जब हम बदलते हैं, फैशन बदलता है तो मशीनें क्यों न बदलें। पुरानी मशीनें घिस गई हैं। इन्हें बदलेंगे तो अच्छी गुणवत्ता मिलेगी। यहां की मशीनें बदलने में जितना समय लगेगा उतने दिनों तक नक्षत्रशाला बंद रहेगी। हालांकि इससे दर्शकों को असुविधा होगी लेकिन उसके बाद उन्हें शो देखने में और अच्छा लगेगा।

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