इंदिरानगर में शराब व्यापारी की गोली मारकर हत्या

  • ज़मीनी विवाद में हत्या की आशंका

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
2लखनऊ। इंदिरानगर में खुलेआम असलहों से लैस बदमाशों ने शराब व्यापारी पंकज जायसवाल को गोलियों से भून दिया। उसको लोहिया अस्पताल ले जाया गया। जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। इस तरह दिन-दहाड़े पॉश इलाके में हत्या की घटना से आस-पास की कालोनियों में रहने वाले लोगों में दहशत फैल गई है। वहीं पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेकर छानबीन शुरू कर दी है लेकिन नतीजा सिफर है।
राजधानी में बदमाशों के हौसले बुलंद हैं। बदमाश हत्या, लूट और डकैती जैसी संगीन वारदातों को अंजाम देने में कामयाब हो रहे हैं। पुलिसकर्मी वसूली की रकम का बंटवारा करने को लेकर आपस में भिड़ रहे हैं। माडर्न पुलिसिंग का दावा फेल साबित हो रहा है। जबकि एसएसपी मंजिल सैनी बेहतर पुलिसिंग और क्राइम कंट्रोल होने के आंकड़े पेश करती नहीं थक रही हैं। आज सुबह करीब 10:15 बजे बदमाशों ने शराब व्यापारी को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। इंदिरानगर थाना क्षेेत्र के अमराई गांव निवासी पंकज जायसवाल (40) पुत्र राम लखन जायसवाल पेशे से शराब व्यापारी है। जो आज सुबह अपने मकान से कुछ ही दूरी पर स्थित हाजी आरामशीन के पास टहल रहा था। उसी वक्त वैगनआर सवार बदमाशों ने पंकज पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। इसमें दो गोली पंकज को लगी और वह गंभीर रूप घायल होकर ज़मीन पर गिर गया। गोली चलने की आवाज़ सुनते ही भगदड़ मच गयी। वहीं हमलावर पंकज को गोली मारते ही मौके से फरार हो गये। मौके पर पहुंची पुलिस ने गंभीररूप से घायल पंकज को लोहिया अस्पताल भेज दिया। जहाां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पंकज की मौत की सूचना मिलते ही परिजनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस बात की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के आलाधिकारी मौके पर पहुंच गये। अधिकारियों ने हमलावरों को जल्द से जल्द पकडऩे का आश्वासन देकर लोगों को शांत कराया।

वसूली में व्यस्त है राजधानी की पुलिस

जहां राजधानी में अपराधी एक के बाद एक वारदातों को अंजाम दे रहे हैं, वहीं पुलिस सिर्फ और सिर्फ वसूली में व्यस्त नज़र आ रही है। इसलिए राजधानी में अपराध कम होने की बजाय दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। गोमती नगर में गुरुवार को मालखाना इंचार्ज अवधेश सिंह और जीडी मुंशी आनंद में घूस के पैसों के बटवारे को लेकर जमकर मारपीट हुई। कोतवाली में मौजूद अन्य पुलिस कर्मी दोनों के बीच हो रही मारपीट को शांत कराने की बजाय सिर्फ मजा लेते रहे। इस मामले की जानकारी एसएसपी मंजिल सैनी को मिली, तो उन्होंने तत्काल प्रभाव से दोनों पुलिस कर्मियों को सस्पेंड कर दिया। लेकिन घुसखोरी में व्यस्त पुलिस कर्मियों पर लगाम लगाने में एसएसपी नाकाम रही हैं। दरअसल पुलिस की घूसखोरी और वसूली का ये कोई नया मामला नहीं है। बल्कि इससे पूर्व भी मडिय़ांव और अन्य कई थाना क्षेत्रों में वसूली के रूपए को लेकर जमकर मारपीट हुई थी, जिसका विडियो वायरल होते ही एसएसपी ने आरोपी पुलिसकर्मी को सस्पेंड कर दिया था। ऐसे में एक के बाद एक संगीन वारदातों को अंजाम देने में कामयाब हो रहे बदमाशों पर लगाम लगाने की बजाय वसूली में व्यस्त रहने वाली पुलिस के भरोसे सुरक्षा का दावा बेमानी साबित हो रहा है।

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