इंटरनेट की दौड़ में भारत पीछे

डिजिटल इंडिया का मकसद है कि 2019 तक पूरे देश में तेज रफ्तार इंटरनेट मुहैया कराकर डिजिटल विभाजन को कम कर दिया जाए। फिलहाल ऐसा होता दिख नहीं रहा। यूनेस्को की रिपोर्ट के नतीजे उन चुनौतियों की ओर इशारा करते है जिसका सामना डिजिटल इंडिया अभियान कर रही है।

sanjay sharma editor5भारत सरकार द्वारा देश में चलाए जा रहे डिजिटल इंडिया जैसे बड़े अभियान के बीच संयुक्त राष्टï्र की संस्था यूनेस्को ने एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें भारत इंटरनेट के इस्तेमाल में अपने कई पड़ोसी देशों से पीछे है। देश में मोबाइल इंटरनेट और ब्रॉडबैंड की पहुंच बढ़ाने की दौड़ में भारत का प्रदर्शन पिछले साल तक काफी खराब रहा है। संयुक्त राष्टï्र की संस्था यूनेस्को ने 189 देशों को शामिल करते हुए ‘द स्टेट ऑफ ब्रॉडबैंड 2015’ नाम से एक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, ब्रॉडबैंड पहुंच के मामले में भारत की रैंकिंग 2013 के मुकाबले 2014 में छह अंक गिरकर 131 पर पहुंच गई। मोबाइल इंटरनेट के मामले में भारत 2013 में 113वें पायदान पर था, वहीं 2014 में वह 155वें पायदान पर खिसक गया। और तो और भारत की स्थिति श्रीलंका और नेपाल से भी नीचे रही, जिनकी रैंकिंग क्रमश: 126 और 115 है। रिपोर्ट के मुताबिक, घरों में इंटरनेट कनेक्शन में बढ़ोतरी के बावजूद 133 विकासशील देशों में भारत पांच पायदान खिसक कर 80 पर आ गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या मोदी सरकार की परियोजना डिजिटल इंडिया अपने मकसद में कामयाब हो पाएगी।
डिजिटल इंडिया का मकसद है कि 2019 तक पूरे देश में तेज रफ्तार इंटरनेट मुहैया कराकर डिजिटल विभाजन को कम कर दिया जाए। फिलहाल ऐसा होता दिख नहीं रहा। यूनेस्को की रिपोर्ट के नतीजे उन चुनौतियों की ओर इशारा करते है जिसका सामना डिजिटल इंडिया अभियान कर रही है। इस रिपोर्ट के आने से डिजिटल इंडिया की कामयाबी को लेकर विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है। डिजिटल इंडिया परियोजना में भारत की उस 68 प्रतिशत आबादी के बारे में बात की गई है जो गांवों में रहती है। विशेषज्ञों की माने तो डिजिटल इंडिया का जो लक्ष्य है वह व्यवहारिक नहीं है। यह लक्ष्य तभी पूरा होगा जब तक सरकार बुनियादी कमियों को पूरा नहीं करती।
डिजिटल इंडिया परियोजना का लक्ष्य है करीब ढाई लाख सरकारी स्कूलों और ढाई लाख ग्राम पंचायतों को इंटरनेट से जोड़ कर ई-शिक्षा और ई-प्रशासन को बढ़ावा देना। जबकि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के ग्रामीण इलाकों में रह रहे 88.4 करोड़ लोगों में 36 प्रतिशत लोग अशिक्षित हैं। बाकी 64 प्रतिशत जो शिक्षित हैं उनमें भी 5.4 प्रतिशत लोगों ने ही हाई स्कूल तक की शिक्षा ग्रहण की है। ऐसे में सवाल उठता है कि इंटरनेट का उपयोग कौन करेगा। इसके अलावा सबसे बड़ी समस्या बिजली की है। गांवों में बिजली पहुंचाने का काम भी बड़ी चिंता का विषय है। मोबाइल फोन के मामले में भारत एक बड़ा बाजार है लेकिन मोबाइल उपकरणों के मार्फत अच्छी इंटरनेट स्पीड हासिल करना अभी दूर की कौड़ी है।

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