आसान होगा व्यावसायिक सम्पत्तियों का हस्तान्तरण

एलडीए बोर्ड की बैठक में पेश 40 प्रस्तावों में 29 पर लगी मुहर

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण ने अपनी योजनाओं में व्यावसायिक सम्पत्तियों पर कब्जा पाने की प्रक्रिया को सरल बनाने का फैसला लिया है। ऐसी सम्पत्तियों के भुगतान और हस्तांतरण की प्रक्रिया आवंटियों की सुविधा के अनुसार बनाई जायेगी। इससे आवंटी को 25 फीसदी धनराशि जमा करने पर कब्जा मिल जायेगा। जबकि आवंटी को शेष धनराशि किश्तों में जमा करने की सुविधा मिलेगी। इसमें व्यावासायिक सम्पत्ति की कीमत पांच लाख और उससे अधिक होने की शर्त भी निर्धारित की गई है।
मंडलायुक्त महेश कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में हुई एलडीए की 155वीं बैठक में 40 प्रस्ताव लाए गए थे। इसमें से 29 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई जबकि पिछली बोर्ड बैठक में लिए गए निर्णय को यथावत ही रखा गया है। दरअसल मौजूदा समय में लागू नियम से व्यावसायिक सम्पत्तियों के आवंटन के बाद भुगतान के समय आवंटी को पूरी धनराशि जमा करनी पड़ती है। कम पूंजी में व्यापार करने वालों के लिए एलडीए ने अच्छा विकल्प दिया है। यह निर्णय रोजगार करने वालों के लिए राहत भरा है।
गौरतलब हो कि वर्तमान में लागू नियम के अनुसार एलडीए की योजना में संचालित व्यावसायिक सम्पत्तियों के भुगतान की प्रक्रिया काफी जटिल थी। इसके अंतर्गत नीलामी के बाद आवंटी को कब्जा पाने के लिए दुकान की पूरी कीमत जमा करनी होती थी। इससे कई लाख की दुकान की कीमत देने में ही आवंटी की पूरी कमाई लग जाती थी। इससे उसे व्यापार शुरू करने में समस्या होती थी, लेकिन शुक्रवार को एलडीए बोर्ड की बैठक में नियम को सरल बनाने का प्रस्ताव लाया गया। जिस पर बोर्ड के पदाधिकारियों ने सशर्त अपनी मंजूरी दी है, जिसमें नीलामी से पूर्व सम्पत्ति के आरक्षित मूल्य का 10 प्रतिशत टोकेनमनी और उच्चतम बोली स्वीकृति होने पर 15 प्रतिशत की धनराशि एक माह में जमा करने के बाद अर्थात कुल 25 प्रतिशत धनराशि जमा होने के बाद पांच वर्ष में 20 त्रैमासिक ब्याज सहित किश्ते निर्धारित कर आवंटन जारी किया जाएगा। इसके बाद क्रेता को रजिस्टर्ड अनुबंध कराकर कब्जा हस्तांतरित किया जाएगा। इस दौरान डीएम राजशेखर, एलडीए वीसी सत्येंद्र सिंह, नगर आयुक्त उदय राज सिंह, सचिव श्रीश चंद्र वर्मा समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे।

सहारा को नहीं मिला सहारा
बिना ले आउट के विकसित कर दिए गए सहारा शहर के ले आउट प्लान को दोबारा पास करने की कसरत को झटका लगा। सचिव श्रीश कुमार वर्मा ने बताया कि कानूनी अड़चनों के चलते इस प्रस्ताव को विचार के लिए आगे बढ़ा दिया गया है। उन्होंने कहा कि सहारा के ले आउट प्लान में सभी पहलुओं का परीक्षण कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब हो कि सहारा 170 एकड़ में बना है। जहां पर इसका निर्माण हुआ है उसे ग्रीन बेल्ट, सुन्दरीकरण और आवासीय सुविधाओं के लिए विकसित किया जाना था लेकिन सहारा कन्सट्रक्शन ने नियमों का उल्लंघन करते हुए इसमें केवल सहारा समूह के लोगों के लिए आवास बनवा दिए। उस दौरान नक्शा नगर निगम ने पास किया था जबकि उसे इस बात का अधिकार नहीं है कि शहरी क्षेत्रों में वह किसी प्रकार के आवासीय मानचित्र को पास करे। इस मामले को लेकर लविप्रा ने अनिधिकृत ले आउट को अधिकृत करने की कसरत शुरु की थी। इस बारे में लविप्रा उपाध्यक्ष ने भी कहा था कि नियमों के संशोधन कर अनधिकृत को अधिकृत किया जा सकता है। इसी के बाद से इसे वैध करने की कवायद की जा रही थी। लेकिन शुक्रवार को हुइ बोर्ड की बैठक में इस पर सहमति नहीं बन पाई।

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