आसमान छू रहे खाद्य पदार्थों के दाम

नवरात्र शुरू होने से पहले ही फलों की बढ़ी कीमत व्रत रखने वालों के लिये बनी मुसीबत

  • खोखला साबित हो रहा सरकार का महंगाई कम करने का दावा
  • सभी खाद्य पदार्थों की कीमतों में भारी उछाल
  • अरहर की दाल का रेट हुआ 180 रुपए प्रति किलो

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। महंगाई की मार से आहत जनता को राहत नहीं मिल रही है। खाद्य पदार्थों से लेकर फल, सब्जी सभी के दाम बढ़ गए हैं। नवरात्र शुरू होते ही सबसे ज्यादा फलों और व्रत में खाए जाने वाले सामान की कीमत में बढ़ोत्तरी हो गई है। पूजा सामग्री की कीमत में भी बढ़ोत्तरी हो गई है। पिछले नवरात्र में जिस चुनरी की कीमत 30 रुपए थी, वह अब 50 रुपए में बेची जा रही है। ऐसा ही हाल सभी वस्तुओं की कीमत का है।
पिछले कई माह से देश की जनता महंगाई की मार से बेहाल है। दाल, प्याज, सरसों का तेल आदि खाद्य पदार्थों की कीमत में बढ़ोत्तरी हुई है। यह बढ़ोत्तरी आज भी जारी है। सरकार बार-बार बयान दे रही है कि हम महंगाई पर नजर रखे हुए हैं पर दाम घटने के बजाय बढ़ गए हैं। जो अरहर की दाल 150 रुपए में मिल रही थी अब उसकी कीमत 180 रुपए से ज्यादा हो गई है। इसी तरह अन्य खाद्य पदार्थों की कीमत का भी हाल है।
दाल की कीमतों में कमी के कोई भी आसार नजर नहीं आ रहे हैं। आलम ये है कि अनाज मंडी में थोक रेट में अरहर की दाल 180 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रही है। जिसका खुदरा रेट दुकानों पर पहुंचते ही 10 से 20 रुपये तक बढ़ जाता है। इस कारण गृहणियों का बजट गड़बड़ा गया है।
सरकार की तरफ से महंगाई को नियंत्रित करने की सारी कोशिशें नाकाम साबित हो रही हैं। खाने वाली वस्तुओं के दाम कम होने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। नवरात्र के दिनों में व्रत रखने वालों को सेब, केला, आम, अंगूर, संतरा, मौसमी, अनार, नाशपाती, नागा, खरबूजा, तरबूज आदि फल सामान्य दिनों की अपेक्षा अधिक मूल्य देकर खरीदने पड़ रहे हैं। सेब 140 रुपये प्रति किग्रा, आम 160 रुपये प्रति किग्रा, केला 50 रुपये दर्जन, अंगूर 180 रुपये प्रति किग्रा, संतरा 80 रुपये प्रति किग्रा, अनार 140 रुपये प्रति किग्रा, नागा 80 रुपये प्रति किग्रा के हिसाब से बिक रहा है। इस कारण व्रतधारियों के लिए फलाहार करना भी महंगा साबित हो रहा है।

दाल की कीमत में सबसे अधिक इजाफा

आम दिनों में रोजाना इस्तेमाल होने वाली दालों की कीमतें भी आसमान छू रही हैं। अरहर की दाल 180 रुपये प्रति किग्रा, धुली उरद की दाल 160 रुपये प्रति किग्रा, हरी उरद की दाल 150 रुपये प्रति किग्रा, मूंग की दाल 140 रुपये प्रति किग्रा और चने की दाल 90 रुपये प्रति किग्रा है। इनकी कीमत मंडी से दुकानों पर पहुंचते ही 10 से 20 रुपये तक बढ़ जाती है। आंकड़ों पर गौर करें तो मई 2014 में अरहर की दाल 73 रुपये प्रति किग्रा, उरद की दाल 71 रुपये प्रति किग्रा, मसूर की दाल 69 रुपये प्रति किग्रा, मूंग की दाल 70 रुपये प्रति किग्रा और चना की दाल 40 रुपये प्रति किग्रा थी। इस समय यानी अक्टूबर 2015 में अरहर की दाल 180 रुपये प्रति किग्रा, उरद की दाल 130 रुपये प्रति किग्रा, मसूर की दाल 100 रुपये प्रति किग्रा, मूंग की दाल 110 रुपये प्रति किग्रा और चने की दाल 60 रुपये प्रति किग्रा तक पहुंच गई है। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि दाल की कीमतों में कितनी तेजी से उछाल आया है। गरीब आदमी की थाली से दाल गायब हो गई है। उसने दाल के अन्य विकल्पों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।

होटलों में थाली भी महंगी

खाद्य पदार्थों की कीमत बढने के कारण होटलों में थाली की कीमत में भी इजाफा हो गया है। ढ़ाबे पर छह महीने पहले जो थाली 60 रुपये में मिलती थी, वह आजकल 100 रुपये में मिल रही है। इसके साथ ही होटलों में अरहर की दाल, दाल मखानी और सब्जियों की कीमत भी बढ़ गई है। प्याज, खीरा और टमाटर की कीमत बढऩे के कारण सलाद की प्लेट भी महंगी हो गई है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी का असर

उत्तर प्रदेश सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले वैट को फिक्स कर दिया है। इस कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी का लाभ प्रदेश की जनता को नहीं मिल पायेगा। इसके साथ ही सरकार ने क्रूड आयल के आयात पर लगने वाला टैक्स भी बढ़ा दिया है। जिसकी वजह से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और बढ़ोत्तरी हुई है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा होने के कारण माल की ढुलाई भी महंगी हो गई है। अनाज, तेज, सब्जियों और फलों की कीमतों के साथ ही अन्य सामान भी महंगे हो गये हैं। ऐसे में महंगाई पर नियंत्रण लगाने के लिए सरकार को पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों को भी नियंत्रित करना होगा।

सरसों के तेल की कीमत भी बढ़ी

इसी प्रकार सरसों का तेल 120 रुपये प्रति किग्रा है। चीनी की कीमत 34 रुपये प्रति किग्रा हो गई है। इस कारण चीनी की मिठास का इस्तेमाल करने से भी लोग हिचकने लगे हैं। गृहणियों की मानें तो महंगाई बढऩे की वजह से रसोई का सारा बजट गड़बड़ा गया है। किचन में दाल सिर्फ डिब्बे में दिखावे के रूप में रखी जाती है। यदि दाल घर में बनती है, तो तभी जब घर पर कोई मेहमान आता है। आम दिनों में दाल के अन्य विकल्पों के रूप में काबुली चना, राजमा और रसेदार सब्जियों का इस्तेमाल किया जाता है। यदि ऐसेे ही दाल की कीमतें बढ़ती रहीं, तो कुछ दिनों में दाल भी सुनार की दुकानों पर छोटे-छोटे पैकेटों में बेची जायेगी। हालांकि सब्जियों और मसालों की कीमतें भी अधिक हैं। इसमें लहसुन 140 रुपये प्रति किग्रा, प्याज 50 रुपये प्रति किग्रा, टमाटर 40 रुपए किग्रा, अदरक 80 रुपये प्रति किग्रा, लौकी-30 रुपये किलो, परवल 60 रुपये प्रति किग्रा, कद्दू 40 रुपये प्रति किग्रा, मेथी-80 रुपये प्रति किग्रा, पालक 60 रुपये प्रति किग्रा, तरोई 40 रुपये प्रति किग्रा, गोभी का फूल 30 रुपये प्रति किग्रा और आलू 18 प्रति किग्रा में बिक रहा है।

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