आवास विकास में रिश्वत की होती है चिंता, रिकॉर्ड की नहीं है सुरक्षा

25 साल पुराने कागजों को फेंका गया गैलरी में

Capture प्रभात तिवारी
लखनऊ । मुख्य वास्तुविद नियोजक कार्यालय इंदिरानगर में 25 साल पुराने कागजातों को कूड़ा समझकर कार्यालय की गैलरी में फेंक दिया गया है। इन कागजों में वास्तु नियोजक लखनऊ, गाजियाबाद और मेरठ के अधिकार क्षेत्र में आने वाले हजारों आवासों और उनके स्वीकृत नक्शों का विवरण मौजूद है। आवास विकास में होने वाले घोटोलों से जुड़े कागजात भी हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार अधिकारी बिल्कुल भी चिन्तित नहीं हैं।
मुख्य वास्तुविद नियोजक आवास विकास उत्तर प्रदेश के कार्यालय में आवास विकास की यूनिट एक से लेकर सात तक के वास्तुविद नियोजकों के अधिकार क्षेत्र से जुड़े सारे रिकार्ड मौजूद हैं। इस इमारत के रिकार्ड रूम में तकरीबन एक साल पहले वास्तु नियोजक गाजियाबाद और मेरठ के कार्यालय का भी सारा रिकार्ड शिफ्ट किया गया था। इन दोनों आफिसों से जुड़ी सैकड़ों फाइलों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी मुख्य वास्तुविद और सहायक वास्तुविद की थी। उन्होंने फाइलों को सुरक्षित रखने की बजाय कार्यालय की गैलरी में कूड़े की तरफ फेंकवा दिया है। इन महत्वपूर्ण फाइलों पर धूल गंदगी और पान की पीकें साफ देखी जा सकती हैं। इसके साथ ही बेतरतीब तरीके से रखी बहुत सी फाइलों के पन्नों को फाड़ दिया गया है। इस कार्यालय में आने-जाने वाला कोई भी व्यक्ति आसानी से फाइलों को अपने साथ ले जा सकता है। ऐसा करने वालों पर रोक लगाने वाला भी कोई नहीं है।

फाइलों में अपार्टमेंट्स का स्वीकृत नक्शा
बिल्डर्स और आवास विकास के अधिकारियों तथा कर्मचारियों की मिलीभगत से अपार्ट्समेंट का नक् शा स्वीकृत कराने का खेल भी काफी बड़ा है। इसकी हकीकत किसी से छिपी नहीं है। इसमें करोड़ों रुपये के अपार्टमेंट का नक्शा स्वीकृत करवाने के लिए बिल्डर 10 से 20 लाख रुपये देने में नहीं हिचकिचाते क्योंकि उनके अपार्टमेंट्स में एक फ्लैट की कीमत कम से कम 65-70 लाख रुपये होती है। गाजियाबाद में अपार्टमेंट का मुद्दा कितना गंभीर है, इसका अंदाजा हाईकोर्ट में अपार्टमेंट्स बनाने के लिए अधिग्रहीत जमीन की सुनवाई पर आने वाले निर्णय से लगाया जा सकता है। हाईकोर्ट ने गाजियाबाद में भूमि अधिग्रहण और अपार्टमेंट्स से जुड़े मामले की सुनवाई में दो दिन पहले सैकड़ों अपार्टमेंट्स और जमीनों के अधिग्रहण को अवैध घोषित कर दिया है। इस वजह से गाजियाबाद विकास प्राधिकरण से जुड़ा मामला और भी गंभीर हो गया है। जिन बिल्डर्स की फाइलों के स्वीकृत नक् शे और अन्य रिकार्ड मुख्य वास्तुविद नियोजक कार्यालय में रखे हुए हैं। वे दोबारा अपने अपार्टमेंट्स से जुड़ी फाइलों और रिकार्ड्स को लेकर सक्रिय हो जायेंगे। ऐसे में फाइलों की सुरक्षा का मुद्दा अत्यंत गंभीर हो गया है। इस विभाग से जुड़े एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि गैलरी में रखी बहुत सी फाइलें गायब हो चुकी है। इसमें कई फाइलों के पन्ने और उसमें मौजूद नक्शों को फाड़ कर कुछ लोग उठा ले गये हैं। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को जानकारी दी जा चुकी है लेकिन फाइलों को सुरक्षित करने को लेकर कोई भी गंभीर नहीं है।

सरकारी रिकार्ड बहुमूल्य सम्पत्ति

किसी भी विभाग से जुड़ा सरकारी रिकार्ड बहुमूल्य सम्पत्ति माना जाता है। इसकी सुरक्षा करना संबंधित विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में करीब 25 साल पुरानी फाइलों के रखरखाव में लापरवाही अपराध की श्रेणी में आता है। इसलिए रिकार्ड की सुरक्षा में लापरवाही बरतने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

मुख्य वास्तुविद नियोजक कार्यालय की गैलरी में बेतरतीब रखी सैकड़ों फाइलों के संबंध में मुझे अधिक जानकारी नहीं है। रिकार्ड तो महत्वपूर्ण हैं, उनको सुरक्षित रखा जाना चाहिए लेकिन लापरवाही क्यों बरती गई। इस संबंध में कुछ कह नहीं सकते। इस मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जायेगी।
-विकास कुमार
सहायक वास्तुविद नियोजक
आवास विकास

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