आवास-विकास परिषद में तिहरा लाभ उठाकर सरकार को लगाई जा रही करोड़ों की चपत

  • बेरोजगार युवाओं को नहीं मिल पा रहा मौका, सरकारी योजनाओं में नहीं आ रही तीव्रता

अंकुश जायसवाल
Captureलखनऊ। एक ओर जहां पढ़े-लिखे युवा बेरोजगारी के चलते दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। वहीं दूसरी ओर सरकारी विभागों में तिहरा फायदा उठा रहे कर्मचारी और अधिकारी सालों से जमे हैं। आफिस में काम करने की बजाय दिन भर मौज मस्ती करते रहते हैं। जबकि युवा वर्ग से अनेकों लोग रोजगार की आस लगाये बैठे हैं, उन्हें काम ही नहीं मिल पा रहा है। जबकि बुजुर्ग तिहरे लाभ के साथ वहां जमे हुए हैं और लाखों की कमाई करके सरकार को चपत लगा रहे हैं। सूत्रों की माने तो विभाग में लगभग 40 से 50 कर्मचारी और अधिकारी आउटसोर्सिंग के जरिए रखे गये हैं, जो रिटायर्ड हैं और सालों से यहां जमे हुए हैं और यहां तिहरा लाभ पेंशन, मानदेय व दलाली कर के लाखों रुपए कमा रहे हैं। इस पर मुख्यमंत्री कार्यालय से जब रिपोर्ट मांगी गयी, तो विभाग की ओर से अधूरी रिपोर्ट भेजकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
खाली हैं पद, नहीं हो रही भर्ती
सूत्रों की माने तो आवास-विकास परिषद में कई वर्षों से लगभग 250 पद रिक्त हैं फिर भी भर्तियां नहीं की जा रही हैं। समन्वय विभाग के प्रशासनिक अधिकारी केडी शर्मा ने बताया कि हम लोगों को जब कर्मचारियों व अधिकारियों को जरूरत पड़ती है, तो हम आउटसोर्सिंग के जरिए कर्मचारियों को रखते हैं और उनसे काम लिया जाता है। आउटसोर्सिंग वाले जिसको भेज देते हैं हम उनसे काम लेते हैं फिर चाहे वह युवा हो या फिर सेवानिवृत्त। हालांकि युवाओं को रखने से काम में तेजी तो आएगी ही और काम समय पर पूरा हो जाएगा।
कर्मचारी संघ कर रहा मांग, नहीं हुई सुनवाई
आवास-विकास परिषद का कम्प्यूटर सेल हो या फिर समन्वय विभाग दोनों में ही लगभग 40 से 50 कर्मचारियों और अधिकारियों की उम्र 60 वर्ष से ऊपर हैं। ये लोग तिहरा फायदा लेते हुए विभाग में जमे हुए हैंं। इन कर्मचारियों को हटाकर नये युवाओं को भर्ती करने के लिए कई बार कर्मचारी संघ ने मांग भी की है पर अभी तक सुनवाई नहीं हुई और बुजुर्गों से काम लिया जा रहा है, जिससे विभाग में चल रहे कार्यों में गति नहीं आ पाती है। इस पर मुख्यमंत्री कार्यालय से जब रिपोर्ट मांगी गयी तो विभाग की ओर से अधूरी रिपोर्ट भेज दी गई। एक तरफ यह कर्मचारी-अधिकारी पेंशन का लाभ पा रहे हैं और दूसरी तरफ मानदेय का लाभ भी उठा रहे हैं। इसके अलावा अपने पद पर रहते हुए आवास विकास के जुड़े काम करवाने के नाम पर दलाली कर लाखों रुपये की चपत भी लगा रहे हैं।

आवास आयुक्त रुद्र प्रताप सिंह का आदेश भी बेअसर

सरकार की ओर से हर तीन माह में कोर्ई न कोई योजना निकालकर लोगों को समय से आवास दिलाने का वायदा करती है, पर जिस विभाग के भरोसे वह आम जनता को आवास देने का दम भरती है। वहां काम में लेटलतीफी होना कोई नयी बात नहीं है। क्योंकि जब युवाओं से अनदेखा कर बुजुर्गों से काम लिया जा रहा है, तो समय पर योजनाओं का लाभ आम जनता को मिल पाना टेढ़ी खीर लगता है, जिसका अंत में खामियाजा महंगे आवासों के रूप में आम जनता को ही भुगतना पड़ता है। हालांकि अपर आवास आयुक्त रूद्ध प्रताप सिंह ने आउटसोर्सिंग के जरिए विभिन्न पदों काउन्सलर, स्किल्ड, सेमी स्किल्ड, वाहन चालक, नान स्किल्ड के साथ-साथ अन्य परिषद के सेवानिवृत्त कार्मिक पद पर कार्य कर रहे कार्मिकों से बीते 30 जून, 2016 के बाद से कार्य न लिये जाने का आदेश दिया है।

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