आवास विकास परिषद अब बनेगा हाइटेक

  • हर कार्यालय में उपलब्ध होगी वीडियोकांफ्रेंसिंग की सुविधा
  • खर्च पर नियंत्रण करने के लिये की जा रही यह व्यवस्था

Capture 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद विभाग को हाईटेक बनाने की तैयारी कर रहा है। इसका मकसद विभागीय बैठकों में शामिल होने वाले अधिकारियों का समय और यात्रा पर होने वाले खर्च को नियंत्रित करना है। इसमें करीब 110 कार्यालयों को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए जोडऩे की तैयारी चल रही है।

प्रदेश में आवास विकास परिषद के छह जोनल कार्यालय हैं। इसमें करीब 110 कार्यालयों को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जोडऩे की तैयारी चल रही है। आवास विकास आयुक्त और विभाग के तकनीकी अधिकारियों ने वीडियो कांफ्रेंसिंग का प्रजेन्टेशन देने वाली कंपनी को हरी झंडी दे दी है। इसलिए बहुत जल्द आवास विकास परिषद से जुड़े अधिकारी अपने कार्यालयों में बैठकर एक दूसरे से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से रूबरू होंगे। इसके बाद विभाग से जुड़े महत्वपूर्ण, मुद्दों, योजनाओं, लक्ष्यों और प्रगति की समीक्षा करेंगे। इसके साथ ही अपनी समस्याओं का समाधान कराने के मकसद से आवास विकास परिषद के कार्यालयों में पहुंचने वाली जनता को भी अधिकारियों से मिलने का भरपूर समय मिलेगा। जनता का काम समय से होगा और उन्हें काफी सहूलियत भी मिलेगी।

मुख्यालय से जुड़ेंगे सभी कार्यालय
आवास विकास परिषद के अधिकारियों और इंजीनियर्स की महीने में एक बार समीक्षा बैठक होती है। प्रदेश भर के अधिकारी और इंजीनियर कार्यालय छोडक़र बैठक में हिस्सा लेते हैं। इस कारण उनके कार्यालय से जुड़ा काम प्रभावित होता है। इस मीटिंग में आने वाले अधिकारियों के रुकने, यात्रा खर्च और मीटिंग के दौरान खान-पान पर भी काफी खर्च होता है। इसमें विभागीय प्रशिक्षण के दौरान भी कम से कम तीन दिन का समय लगता है। ऐसे में विभाग को बैठकों और प्रशिक्षण पर सालाना लाखों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। यदि वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये सभी कार्यालयों को एक दूसरे से जोड़ दिया जायेगा, तो विभागीय अधिकारी कार्यालय में बैठकर एक दूसरे से रूबरू हो सकते हैं। इसमें एक कार्यालय में वीडियो कांफ्रेंसिंग की सुविधा उपलब्ध कराने का खर्च औसतन 20 हजार रुपये मासिक आयेगा, जो कि बैठकों पर होने वाले खर्च के मुकाबले काफी कम होगा। इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि विभाग को हाईटेक बनाने से राजस्व की बचत में भी सहयोग मिलेगा।

कंपनी लेगी मेंटीनेंस का जिम्मा
आवास विकास के सभी जोनल कार्यालयों में कम्पनी की तरफ से सारे उपकरण लगाये जायेंगे। इसमें उपकरणों का रखरखाव भी कंपनी ही करेगी। यदि आवास विकास के सभी छह जोनल कार्यालयों को एक दूसरे से जोड़ दिया जाता है, तो लगभग 1.2 लाख रुपये महीना का खर्च आयेगा। यह समीक्षा बैठकों और प्रशिक्षण पर होने वाले खर्च के मुकाबले बहुत ही कम है। इस व्यवस्था को जल्द ही लागू कर दिया जायेगा। हालांकि नयी व्यवस्था लागू होने के बावजूद शुरुआत में प्रतिमाह कम से कम एक बार अधिकारियों व इंजीनियर्स की बैठक बुलायी जाती रहेगी।

Pin It